प्रेम कहानियां

कुछ प्रेम कहानियां हमेशा जीवंत रहती हैं

अजय थोड़ा सहमा हुआ था। इसलिए नहीं कि वह अपनी बेचैनी को दूर करने के लिए कोई माध्यम ढूंढ रहा था। बल्कि उसे डर लग रहा था कि कहीं वह उससे बात करना बंद न कर दे।

सुबह के करीब 10 बज रहे थे। अजय तैयार होने के लिए आज कुछ जल्दी ही उठ गया था। आखिर, आज का दिन उसके लिए बेहद खास जो था। उसकी लव ऑफ लाइफ और दो बच्चों की मां नैना उसका बेसब्री से इंजतार कर रही थी।

इधर, बाहर बारिश हो रही थी। सुबह की बारिश उसे हमेशा उस दिन की याद दिला देती है, जब पहली बार वे दोनों मिले थे। गर्मी की बारिश उतनी ही ख़ूबसूरत थी, जितने 50 साल से भी ज़्यादा पुराने उनके रिश्ते।

इस खास मौके के लिए अजय ने पहले से ही सफेद लिली के फूल तोड़कर रख लिए थे। उसकी पत्नी को लिली के फूल काफी पसंद थे। उसने ब्राउन कलर की जैकेट, खाकी रंग की ट्राउजर और बेज कलर की शर्ट पहनी थी। नैना ने ही पिछले कुछ महीने पहले ये सारे कपड़े खरीदे थे। ऐसा पहली बार नहीं था, जब उसने अपनी पत्नी की खुशी के लिए फूल तोड़े थे। उसके चेहरे पर मुस्कुराहट लाने के लिए उसने पहले दिन से ही ये छोटे-छोटे काम शुरू कर दिए थे। कभी गिटार बजाकर, तो कभी मनपसंद खाना बनाकर उसे खुश रखने की अक्सर कोशिश करता रहता था। लेकिन अंत में उसे फूल ही सबसे अधिक पसंद आते थे।

अजय अपने गेट के बाहर खड़ा था, जबकि उधर नैना उसका इंतजार कर रही थी। दूर से देखने वाले को शायद ही ऐसा लग रहा था कि अपनी लव पार्टनर से मिलने के लिए वह किसी डेट पर जाने की सोच रहा है। वह थोड़ा सहमा-सहमा सा लग रहा था। इसलिए नहीं कि वह अपनी बेचैनी को दूर करने के लिए कोई माध्यम ढूंढ रहा था। बल्कि उसे डर लग रहा था कि कहीं वह उससे बात करना बंद न कर दे। वह अपनी आखिरी मुलाकात के बारे में सोचने लगा। उस समय दोनों को मिलकर बहुत ही अच्छा लगा था। लेकिन उसे यकीन नहीं हो रहा था कि पिछली बार की तरह इस बार भी ऐसा ही होगा।

गेट पर खड़े रहने से कुछ हल होने वाला नहीं था। इसलिए उसने अपने कदम बढ़ाए और नैना की ओर चल पड़ा।

अजय ने नैना की ओर देखा और मुस्कुराते हुए हाथों में ले रखे फूलों के साथ अपनी बाहें फैला ली। लेकिन हवा इतनी तेज़ थी कि मजबूरन उसे अपने हाथ सिर पर रखने पड़े, ताकि कही उसकी टोपी न उड़ जाए। थोड़ी देर सांस लेते हुए बोला- ‘कैसी हो तुम?’

नैना से बात करने का कुछ ऐसा ही अंदाज़ रहा है अजय का। कोई भी चार सरल शब्द, जब बहुत ही गहराई और अंतर्मन से बोले जाते हैं, तो अनंत काल तक दिमाग में उसकी गूंज मौजूद रहती है।

एक घंटे के बाद जैसे ही वह गेट के बाहर खड़ी अपनी कार में वापस जाने के लिए मुड़ा, तो फिर से तेज़ हवा चलने लगी। नैना की समाधि पर रखे फूल कुछ ऐसे हिले, मानो जैसे वह कुछ कह रही है। अजय ने देखकर मुस्कुराया और बोला- हां मैं समय पर खा लिया करूंगा। माई लव…. हम कल फिर मिलेंगे।

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