World River Day

विश्व नदी दिवस: कितनी ज़रूरी हैं नदियां?

आज भी कई शहर और गांव ऐसे हैं, जहां पानी का एक मात्र स्रोत नदियां हैं। वहां के लोगों के लिए नदियां ही उनके पीने, नहाने और अन्य ज़रूरतों के लिए पानी की पूर्ति करती हैं। ऐसे में जब लोग नदियों के प्रति ही जागरूक नहीं होंगे तो दूषित नदियों से सामान्य जन-जीवन खतरे में पड़ सकता है।

जैसा कि हम सब ही जानते हैं भारत में नदियां धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई हैं। सामान्य नागरिक नदियों की पूजा करते हैं। इसके बावजूद लोग नदियों के महत्व से अनजान हैं। नदियों का संरक्षण मानव जीवन के लिए बहुत ज़रूरी है। आज भी कई शहर और गांव ऐसे हैं जहां पानी का एक मात्र स्रोत नदियां हैं। वहां के लोगों के लिए नदियां ही उनके पीने, नहाने और अन्य जरूरतों के लिए पानी की पूर्ति करती हैं। ऐसे में जब लोग नदियों के प्रति ही जागरूक नहीं होंगे तो दूषित नदियों से सामान्य जन-जीवन खतरे में पड़ सकता है।

नदियां जल-चक्र को नियंत्रित रखती हैं ताकि मौसम चक्र नियंत्रित रह सके। नदियां भू-मंडल को उपजाऊ और शीतल रखती है। लेकिन, बड़ी फैक्ट्रियां और कारखानों से निकलता वेस्ट रसायन नदियों में फेंक दिया जाता है, जिससे नदी का पानी विषैला हो जाता है और उपयोग करने लायक नहीं रहता है। मृत शरीरों को नदियों में बहा देने से भी पानी दूषित हो जाता है

ऐसे ही बहुत से लोग जो नदियों के महत्व से अनजान हैं और अपने-अपने तरीके से नदियों को दूषित करते रहते हैं। हमें उन्हीं सामान्य लोगों को नदियों की ज़रूरत और रख-रखाव के बारे में बताने की ज़रूरत है, ताकि हम सब मिलकर नदियों को जीवित और स्वच्छ रख सकें। मार्क एंजलो ने कहा है कि “नदियाँ हमारे ग्रह की धमनियां हैं; वे सच्चे अर्थों में जीवनरेखा हैं।” यह बात शत-प्रतिशत सच है क्योंकि नदियां हमें जीवनदान देती हैं।

विश्व नदी दिवस कब मनाया जाता है? (Vishv nadi divas kab manaya jata hai?)

सितंबर महीने के आखिरी रविवार को विश्व नदी दिवस (World River Day) मनाया जाता है। इस साल यानी 2023 में यह 25 सितंबर को मनाया जा रहा है।

वर्ल्ड रिवर डे मनाने का उद्देश्य क्या है? (World river day manane ka uddeshye kya hai?)

नदियों की ज़रूरत और महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए वर्ड रिवर डे मनाने की शुरुआत हुई। रिवर डे या नदी दिवस के रूप में लोगों को नदियों की अहमियत समझाने की कोशिश की जाती है।

भारत में आठ मुख्य नदी प्रणाली हैं, जिनमें 400 से ज़्यादा नदियां बहती हैं। बहुत-से जन-जीवन इन नदियों के पानी पर आश्रित हैं। ऐसे में अगर नदियां ही मैली होंगी तो उनके लिए गुज़ारा करना बहुत मुश्किल हो जाएगा। नदियों की साफ-सफाई और ज़रूरतों पर ध्यान न देने से नदियां सूख जाती हैं और इससे मौसम चक्र भी प्रभावित होता है।

देश में नदियों को पूजा जाता है। पूजा की सामग्री, मूर्तियां और जाने कितनी ही चीज़ें पानी में बहा दी जाती हैं, जो नदियों के लिए हानिकारक होती हैं। नदियों की सतह पर कचरा जमा होता जाता है, जिससे पानी का स्तर घटता जाता है।

नदियों में नहाने से, कपड़े धोने से, साबुन के रसायन पानी को पीने लायक नहीं रहने देते। ऐसे पानी का सेवन करने से बहुत-सी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर हम सब मिलकर कोशिश करें तो विश्व नदी दिवस की जागरूकता को हर व्यक्ति तक पहुंचा कर नदियों को बचा सकते हैं।

विश्व नदी दिवस की मनाने की शुरुआत कैसे हुई? (Vishv nadi divas manane ki shuruaat kaise hui?)

विश्व नदी दिवस मनाने की शुरुआत मार्क एंजेलो ने 2005 में की। उन्होंने जब नदियों की बढ़ती दयनीय दशा देखी तो उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संग से बात की और बहुत सोच-विचार करने के बाद विश्व नदी दिवस की नींव रखी।

तभी से हर साल नदियों के रख-रखाव के लिए सामाजिक कार्यक्रम के आयोजन किए जाते हैं और लोगों को नदियों के महत्व के बारे में समझाया जाता है। इस विश्व नदी दिवस पर आप और हम भी नदियों को बचाने के लिए, किसी नदी की सफाई कर सकते हैं या किसी जागरुकता कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं।

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