प्यार की जीत

जीत हमेशा प्यार की होती है

रश्मि को जब यह पता चला हो वो दंग रह गई। उसे इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है। देखते ही देखते उसकी आंखों से आंसू झलक पड़े। उसने पूछा "क्या ऐसा कोई रास्ता नहीं है, जिससे तुम यहीं रह जाओ"?

रश्मि और किशोर एक ही कक्षा में पढ़ते थे, उनके बीच अच्छी फ्रेंडशिप थी। दोनों ही सामान्य परिवार से आते थे। इनमें काफी कुछ मिलता-जुलता था। जब वो हाई स्कूल में पहुंचे तो किशोर ने रश्मि से भी बाहर जाने के लिए कहा, रश्मि भी किशोर की बात मान गई।

दोनों के बीच दोस्ती को दो साल बीत चुके थे, वो दोनों एक दूसरे को चाहते भी थे, देखते ही देखते विदाई यानि फेयरवेल का दिन भी आ गया। फेयरवेल के दिन रश्मि कार्यक्रम में पहुंची। कुछ समय गुज़रने के बाद वहां किशोर भी आ गया। जैसे ही किशोर कार्यक्रम में पहुंचा, तो रश्मि की नज़र उसपर गई। वो किशोर के पास आकर बैठ गई। उस समय किशोर किसी बात को लेकर परेशान लग रहा था। रश्मि ने तपाक से पूछ लिया, क्या बात है। किशोर बोला, मेरे पापा की पोस्टिंग दूसरी सिटी में हो गई है। बावजूद इसके मैं तुम्हारे संपर्क में रहूंगा।

रश्मि को जब यह पता चला हो वो दंग रह गई। उसे इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है। देखते ही देखते उसकी आंखों से आंसू झलक पड़े। उसने पूछा “क्या ऐसा कोई रास्ता नहीं है, जिससे तुम यहीं रह जाओ”? इस बात पर किशोर ने सिर से न का इशारा करते हुए कहा, नहीं, मैंने इस बारे में अपने पैरेंट्स से बात की है, उन्हें बताया कि मैं हॉस्टल में भी रह लूंगा। लेकिन वो इस बात को मानने को तैयार तक नहीं हैं। 

रश्मि ने जैसे ही यह सुना जो बची हुई आस थी, वो भी नहीं रही। किशोर ने आशा भरी नज़रों से रश्मि से कहा। कॉलेज खत्म करने के बाद मैं वापिस आउंगा और शादी के लिए तुम्हारे पैरेंट्स से बात करूंगा। लेकिन तब तक हमें किसी प्रकार इस रिलेशनशिप को बचाए रखना होगा। रश्मि इस बड़े बदलाव के लिए तैयार ही नहीं थी। किशोर की बातों ने रश्मि को अंदर से झकझोर कर रख दिया था। इन बातों का जवाब भी रश्मि से सिर हिलाकर दिया। कहा, जाने से पहले हमें इस रिश्ते को खत्म करना होगा।

एक दूसरे से बिछड़े हुए इन्हें 5 साल बीत चुके थे। रश्मि ने अब तक किशोर से संपर्क रखना भी लगभग बंद ही कर दिया था। ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे अच्छी नौकरी मिल गई थी। बावजूद इसके वो किशोर को भुला ही नहीं पा रही थी, ऐसे में न ही वो अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ पा रही थी। खुद से वो सवाल करती थी, पता नहीं किशोर आजकल क्या करता होगा।

इधर, रश्मि के घर पर उसके पैरेंट्स शादी के लिए लड़के की तलाश करने लगे थे। उन्हें एक लड़का मिल भी गया था। लेकिन रश्मि इस बात को टाले जा रही थी। आखिरकार रश्मि ने किशोर को इसके बारे में बताया और रिश्ते को खत्म करने का फैसला लिया। किशोर का फोन नंबर उसके पास था। वो सोचने लगी कि क्या अभी भी किशोर इस नंबर का उपयोग करता होगा। इसी उधेड़बुन में रश्मि ने किशोर को फोन लगा दिया।

“हेलो! क्या सुखद आश्चर्य है,” खुशी से भरी हुई आवाज़ आई। वह किशोर था। पुराने दर्द के बावजूद, जिसके लिए वर्षों पहले उसने उसे छोड़ दिया था, उस पर भरोसा करके रश्मि ने उससे पूछा कि क्या तुम मुझे वापस ले जाओगे? उसने तुरंत ‘हां’ कहा और पूछा, “क्या तुम फिर से शुरू से शुरू करना चाहोगी?”

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