विश्व शांति और समझ दिवस

विश्व शांति और समझ दिवस: शांति और समझ कैसे बदल सकती है दुनिया?

हमें एक ऐसी दुनिया का निर्माण करना होगा, जहां सभी के साथ उनकी जाति, समाज और धर्म की परवाह किए बिना एक जैसा व्यवहार किया जाता है। सबको एक जैसे अधिकार प्राप्त हों। कोई किसी के साथ बुरा व्यवहार न करें और सब अपनी-अपनी जगह रहकर एक शांत और सुखद वातावरण में सांस लें।

विश्व शांति और नैतिकता की बातें करना और उन्हें सच करना दोनों अलग-अलग बातें हैं। विश्व शांति और सद्भावना का मतलब सिर्फ अपराध रोकना नहीं है, बल्कि इसका मतलब तो अहिंसा से बहुत ज़्यादा है। हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना होगा, जहां सभी को यह एहसास हो कि वे आगे बढ़ सकते हैं और फल-फूल सकते है। हमें एक ऐसी दुनिया का निर्माण करना होगा, जहां सभी के साथ उनकी जाति, समाज और धर्म की परवाह किए बिना एक जैसा व्यवहार किया जाता है। सबको एक जैसे अधिकार प्राप्त हों। कोई किसी के साथ बुरा व्यवहार न करें और सब अपनी-अपनी जगह रहकर एक शांत और सुखद वातावरण में सांस लें।

विश्व शांति और समझदारी दिवस की स्थापना भी इन्हीं भावनाओं को बढ़ावा देने के लिए हुई है। विश्व शांति और समझदारी दिवस का उद्देश्य यही है कि सिर्फ एक राज्य या राष्ट्र नहीं बल्कि पूरा विश्व अमन और चैन से भरा जीवन जी सके और ऐसा शांति और सद्भावना की भावना को अपने मन में रखने से ही संभव होगा। अगर हम सच में चाहते हैं कि विश्व शांति और समझदारी से भर जाएं तो ऐसे लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हमें समाज के हर हिस्से में ऐसी समझ विकसित करनी होगी जो नैतिकता के मूल्यों पर भी राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सके।

दुनिया के हर जन-जन तक हमें सुकून और शांति का पाठ पहुंचाना होगा। छोटे-बड़े, ऊंच-नीच और काले-गोरे का जो भेद अब तक हमारे समाज में फैला हुआ है, हमें उसे मिटाना होगा, हर व्यक्ति को एक समान दृष्टि से देखने का हुनर अपनाना होगा, तभी हम विश्व शांति और समझदारी दिवस के असली मकसद को समझ सकेंगे। हालांकि, दुनिया भर में बहुत से लोग इस भावना के सही मायने समझ चुके हैं। मगर, समाज का एक बड़ा हिस्सा अब भी इस भावना को समझने में पीछे है। हमें उन्हीं लोगों तक विश्व शांति और समझदारी दिवस का सही मतलब पहुंचाना होगा। आइए आगे सोलवेदा के साथ मिलकर विश्व शांति और समझदारी दिवस के बारे में और जानते हैं।

विश्व शांति और समझ दिवस की शुरुआत (Vishv Shanti aur Samjh Divas ki shuruaat)

विश्व में शांति और समझ की भावना विकसित करने को लेकर 23 फरवरी 1905 को पहली रोटरी बैठक हुई थी। इसके लिए शिकागो शहर की यूनिटी बिल्डिंग के रूम नंबर 711 में पॉल हैरिस, गुस्तावस लोएहर, सिल्वेस्टर शिएले और हीराम शोरे लोहर जैसी हस्तियां एकत्रित हुई थीं। अटॉर्नी पॉल हैरिस एक पेशेवर संघ बनाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने यह सभा बुलाई थी। इन हस्तियों के मिलने के स्थान रोटेट (Rotate) होते रहते थे, इसलिए हैरिस, गुस्तावस लोहर, सिल्वेस्टर शिएले और हीराम शौरी ने अपने इस क्लब का नाम रोटरी क्लब रखा था।

बाद में इस क्लब में मानवीय मूल्यों के लिए अपनी इच्छा साझा करने वाले लोगों का समूह जुड़ता गया। हालांकि, रोटरी क्लब ने औपचारिक रूप से साल 1922 में ‘रोटरी इंटरनेशनल’ नाम को अपनाया था। विश्व शांति और समझ दिवस दुनिया के सबसे बड़े कल्याण संगठनों में से एक की शुरुआत के वर्षगांठ की याद दिलाता है। इस संगठन की स्थापना की याद में हर साल ‘विश्व शांति और समझ दिवस’ मनाया जाता है। विश्व शांति और समझ दिवस के 117 साल के दौरान पूरी दुनिया ने विश्व शांति और सद्भावना को लेकर खुद में बहुत से बदलाव किए हैं। दूसरी ओर दुनिया भर के लोगों में सद्भावना, मन की शांति और समझ विकसित करने के लिए अभी और लंबा रास्ता तय करना है।

कब मनाया जाता है विश्व शांति और समझ दिवस? (Kab manaya jata hai Vishv Shanti aur Samajh Divas)

विश्व शांति और समझ दिवस हर साल 23 फरवरी को मनाया जाता है। यह रोटरी सदस्यों द्वारा आयोजित पहली बैठक की वर्षगांठ मनाने के लिए मनाया जाता है।

शांति और समझदारी के मायने (Shanti aur samajhdari ke mayane)

शांति से जीवन जीना किसको पसंद नहीं? कौन नहीं चाहता कि उसे समझा जाए? हम सब ही सुकून और शांति चाहते हैं, क्योंकि यही वे भाव हैं जिनसे ज़िंदगी की गाड़ी बिना रूकावट के चलती है। मगर, हम शांति से रहने के लिए क्या कर रहे हैं? क्या हम दूसरों को समझने की कोशिश करते हैं? कहते हैं किसी भी बदलाव की शुरुआत खुद से होती है, तो क्या हमने विश्व शांति और समझदारी के भाव को अपना लिया है? अगर नहीं तो क्यों न शुरुआत आज से ही की जाए?

हम सबको शांति से रहना पसंद है। भला दंगे और हिंसा किसे पसंद होगी? इसलिए हमें अपने आपको जागरूक करना होगा और समाज को भी यह एहसास दिलाना होगा कि हम सब एक हैं और हमें समाज में हमेशा शांति भाव बनाए रखना चाहिए और हमेशा दूसरों को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

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