उत्तराखंड की गोद में बसा झीलों का शहर नैनीताल

उत्तराखंड की गोद में बसा नैनीताल, ‘झीलों के शहर’ नाम से है फेमस

झील, पहाड़ और शांति... ऐसे ही खूबसूरत वादियों में मैं खो जाना चाहता था। इसलिए मैंने उत्तराखंड की गोद में बसे नैनीताल का रुख किया। यहां कई झील होने के कारण इसे ‘झीलों का शहर’ भी कहते हैं। मेरे साथ नैनीताल घूमने के लिए पढ़ें ये आर्टिकल।

रोपवे में बैठकर, एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ पर जाना, ऊंचाई से झील और पहाड़ की खूबसूरती निहारना, झील के किनारे वॉक करना, घास के हरे मैदान में लेटना, पहाड़ से आ रही झरने की आवाज़ सुनना… ये सब नैनीताल के एडवेंचरस ट्रिप पर मैंने पूरा किया। नैनीताल जाने के लिए मैंने काठगोदाम जाने की टिकट कराई और निकल गया अपने सफर पर।

नैनी लेक में बोटिंग कर की ट्रिप की शुरुआत

सफर के पहले पड़ाव पर मैं पहुंचा नैनी लेक। यहां पर कई लोग ‘आई लव नैलीताल’ के बोर्ड के पास फोटो खिंचाते नज़र आए। लेक किनारे खड़े होकर मैंने यहां की खूबसूरती को निहारा। यहां पास में बाजार, बोटिंग प्वाइंट और घूमने के लिए काफी कुछ दिखा। लेक किनारे वॉक करते-करते पानी में मेरी नज़र गई तो, वहां काफी मच्छलियां थीं। यहां के लकड़ी के बोट को देख मैं खुद को बोटिंग करने से रोक नहीं पाया। जब मैं यहां पहुंचा तो काफी धूप थी, लेकिन जैसे-जैसे शाम ढलने को आई बादल मानो जमीन पर ही उतर आए। देखते ही देखते धुंध छा गई। यहां का नजारा और भी ज्यादा खूबसूरत हो गया। यहां से मैं पूरे शहर को देख पा रहा था। ये लेक कई पहाड़ियों से घिरा था।

नैना देवी मंदिर में मत्था टेक किया दर्शन

अब मैं निकल चुका था नैना देवी मंदिर की ओर। मंदिर के बाहर काफी दुकानें थी। जहां पर जैकेट्स, स्कार्फ, ऊनी कपड़े और काफी कुछ बिक रहे थे। इसके अलावा यहां खाने-पीने की दुकानें भी थी। यहां की सबसे खास बात ये थी कि मंदिर के पास में ही गुरुद्वारा था और मंदिर के पिछले हिस्से में कुछ दूरी पर ही मस्जिद भी। इस मंदिर के घंटे की गूंज आध्यात्मिक शांति का एहसास करा रही थी। वहीं यहां पहुंचने पर इसकी विशेषता के बारे में भी पता चला, ये मंदिर भारत के शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव मां सती को लेकर जा रहे थे, तब मां सती की आंखें यहां गिरी थी। तब यहां मां नैना देवी शक्तिपीठ की स्थापना हुई।

ये मंदिर मुझे इसलिए भी अच्छा लगा क्योंकि ये न केवल खूबसूरत पहाड़ और पेड़ों से घिरा हुआ है, बल्कि मंदिर के प्रांगण में आने पर अजीब-सी शांति का भी एहसास हो रहा था।

मॉल रोड मार्केट में की खरीदारी

किसी खास जगह पर घूमने जाएं और वहां से कुछ सामान न खरीदें, तो यात्रा अधूरी रह जाती है। नैना देवी मंदिर के पास ही में मॉल रोड मार्केट है। यहां पर मैंने अपनी फैमिली के लिए कुछ सामान की खरीदारी की। घर पर सजाने के सामान भी खरीदे। खरीदारी करते-करते रात हो गई थी, इस रोड से पूरे नैनीताल का नजारा काफी खूबसूरत लग रहा था। पहाड़ पर लाइटें दिख रही थी, जो यहां के नजारे को और खूबसूरत बना रही थी। शॉपिंग करते हुए शाम ढल गई थी, वहीं पहाड़ पर बसे घर व होटलों से छनकर आ रही लाइटें जब झील की सतह पर पड़ रही थी, तो ऐसा लग रहा था कि मानो तारे जमीन पर उतर आए हों।

इको केव पार्क में गुफाओं का हुआ एहसास

यहां पर घुसते ही गुफाओं के अंदर जाने जैसा एहसास हो रहा था। यहां पर कई विचित्र चीजें भी देखने को मिली। जैसे – बोलते हुए पेड़, टाइगर केव सहित अन्य। हालांकि इन्हें मॉडर्न तकनीक से बनाया था, ठीक वैसे ही जैसा हम फिल्मों में देखते हैं। यहां पर छोटे बच्चों के लिए झूले थे, वहीं बड़ों के लिए एडवेंचर स्पोर्ट्स करने की भी सुविधा थी।

राजभवन का गर्वनर हाउस है खास

राजभवन का कैंपस काफी खूबसूरत था। बाहर हरे घास के मैदान के साथ सुंदर भव्य गर्वनर हाउस देखने को मिला। यहां एक म्यूजियम भी है, जहां पर पुराने सामान और इतिहास को बयां करते सामान देखने को मिले। इस जगह की सबसे खास बात यह पता चली कि इसे इंग्लैंड के बर्किंघम पैलेस की तर्ज पर तैयार किया गया था।

टिफिन टॉप के लवर प्वाइंट से खूबसूरत वादियों का नजारा

अब मैं गया टिफिन टॉप पर। सीढ़ियों को चढ़कर जब मैं पहाड़ के शिखर पर पहुंचा, तो मुझे लवर प्वाइंट देखने को मिला। यहां पर काफी संख्या में पर्यटक भी थे। ऊंचाई से खूबसूरत पहाड़ों का नजारा देखते ही बन रहा था। यहां से टिफिन टॉप जाने के लिए चाहे तो पैदल या फिर घुड़सवारी करके भी जा सकते हैं। यहां पर मैंने सनसेट का आनंद लिया।

रोपवे से की स्नो व्यू प्वाइंट सैर

पहाड़ों, रोड व खूबसूरत नजारों को देखते हुए अब मैं पहुंच चुका था स्नो व्यू प्वाइंट की ओर। यहां पर रोप-वे भी था। कई लोग इससे भी सफर कर के पॉइंट पर जा रहे थे। स्नो व्यू प्वाइंट के शिखर पर पहुंचते ही दूर बर्फ से ढके पहाड़ को देखने का अलग ही आनंद आया। बर्फ से ढके पहाड़ देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं, मानो सफेद चादर ओढ़कर कर बैठे हों। यहां पर लाइन से कई दूरबीन भी लगे हुए थे, जिसकी मदद से बर्फीली हिमालय की पहाड़ी को भी मैंने देखा।

इसके अलावा मैं जू भी गया। यहां कई ऐसे जीव थे, जो पहाड़ों में देखने को मिलते हैं। इसके बाद मैं हिमालय बोटेनेकिल गार्डन भी देखने के लिए गया। यहां पर कई सारी प्रजातियों के प्लांट देखने को मिले। वहीं, सरिया लेक के वॉटर फॉल भी को देखा। लेक किनारे समय गुजार कर मैंने शांति का एहसास किया।

कैसा लगा आपको ये सफर और यहां का रोमांच, हमें कमेंट करके बताएं। ऐसे ही रोमांचक सफर का आनंद लेने के लिए सोलवेदा के सफरनामा पर पढ़ते रहे लेख।

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