अहमदाबाद

हलचल से भरे शहर अहमदाबाद में घूमने वाली जगहें

एक वक्त था जब अहमदाबाद गुजरात राज्य की राजधानी हुआ करता था, पर अब गुजरात की राजधानी गांधीनगर को चुन लिया गया है। कहते हैं अहमदाबाद भारत के सबसे बड़े शहरों में से एक है, और ये टेक्सटाइल उद्योग में दूसरे स्थान पर भी है।

गुजरात के शहर अहमदाबाद को तो आप जानते ही होंगे, जो महात्मा गांधी जी की कर्मभूमि हुआ करता था। कोरोना काल के बाद पिछले साल ही मुझे अहमदाबाद घूमने का मौका मिला। अहमदाबाद में मेरी एक कजिन बहन रहती है। बहुत सालों से वो मुझे अपने घर आने का निमंत्रण देती आ रही थी, पर मैं ही हर साल टाल दिया करती थी। मगर, बीते साल हुआ यूं कि अचानक ही मेरी कजिन का फोन आया और उसने मुझे फिर से अपने घर आने को कहा और इस बार मैं मना नहीं कर पाई। तो बस फिर ऑफिस से चार दिन की छुट्टी लेकर मैं निकल गई अहमदाबाद की गलियों का सफर करने। वहां पहुंचने के लिए मैंने रेलमार्ग चुना, क्योंकि मुझे कोई भी सफर बाहर के सुंदर नज़ारे देखते हुए ही करना पसंद है, और भई! जो मज़ा ट्रेन में सवारी करने का है, वो फ्लाइट में कहां?

एक वक्त था जब अहमदाबाद गुजरात राज्य की राजधानी हुआ करता था पर अब गुजरात की राजधानी गांधीनगर को चुन लिया गया है। कहते हैं अहमदाबाद भारत के सबसे बड़े शहरों में से एक है और ये टेक्सटाइल उद्योग में दूसरे स्थान पर भी है। बड़ी-बड़ी इमारतें, ब्रांडेड कंपनियां और साफ-सुथरे मैट्रो स्टेशन्स को पार करती हुई मैं अपनी कजिन के घर पहुंच गई।

क्या आप जानते हैं, अहमदाबाद साबरमती नदी के किनारे बसा हुआ है और अहमदाबाद को गुजरात का दिल कहा जाता है? अहमदाबाद को वर्ड हैरिटेज साइट का दर्जा भी मिला हुआ है। इसके अलावा एक और बात जो शायद आपको अहमदाबाद के बारे में नहीं पता होगी वो है इस शहर का नाम। इस शहर का नाम अहमदशाह ने अपने नाम पर रखा था और ये शहर चारों तरफ से मीनारों से घिरा हुआ है। अहमदाबाद के बारे में ये कुछ बातें मुझे मेरी कजिन ने बताई और कुछ मैंने पहले से सुन रखी थी। घूमने की जगह हों या यहां का लज़ीज़ खाना मैंने पूरे चार दिन यहां रहकर, अहमदाबाद को अपनी मेहमान नवाजी का पूरा मौका दिया।

आइए मैं आपको ले चलती हूं अहमदाबाद की दिलचस्प जगहों की सैर कराने।

अहमदाबाद आएं तो यहां घूमे बिना नहीं रह पाएंगे (Ahmedabad aayein to yahan ghume bina nahin rah payenge)

अगर अपने शहर से किसी दूसरे शहर गये और वहां बस घर की चार दीवारों में ही रह कर चले आए तो क्या खास दूसरे शहर गये!

ऐसा कुछ न मैं महसूस करना चाहती थी और न ही मेरी कजिन ने मुझे ऐसा महसूस होने दिया, क्योंकि उसने मुझे इन चार दिनों में इतना घुमाया की मुझे लगने लगा कि मैं तो हमेशा से यही अहमदाबाद में ही रहती थी। हम लोग रोज़ शाम अहमदाबाद की गलियों पर निकल पड़ते थे। मेरी कजिन ने मुझे अहमदाबाद की हर वो जगह दिखाने की पूरी कोशिश की जिनके नाम से अहमदाबाद अपनी पहचान बनाये हुए है, फिर वो चाहे गांधी जी का साबरमती आश्रम हो या अक्षरधाम मंदिर। मेरी आंखों में अब भी अहमदाबाद की यादें और उन जगहों की भव्यता ऐसे बसी हुई है, जैसे मैं कल ही अहमदाबाद से लौटी हूं। तो चलिए आगे पढ़ते हैं अहमदाबाद में घूमने की जगहों के बारे में।

धार्मिक मान्यताओं से बंधा अक्षरधाम मंदिर (Dharmik manyataon se bandha Akshardham Mandir)

अक्षरधाम मंद‍िर अहमदाबाद के गांधीनगर नामक जगह पर स्थित है। अक्षरधाम मंदिर अहमदाबाद के खास तीर्थ स्थलों में से एक है। इस मंद‍िर की नींव 1992 में रखी गई थी।  अहमदाबाद के अक्षरधाम मंदिर में भगवान स्वामीनारायण की मूर्ति है। ये मूर्ति सोने से बनी हुई है, जिसकी लंबाई करीब 7 फीट ऊंची है। इस मंदिर की नक्काशीदार दीवारों पर गुलाबी रंग का पत्थर लगा है, जो दिन में सूरज की रौशनी में चमकता रहता है। मंदिर के चारों तरह गज़ब की हरियाली है, सुंदर मैदान और झरने लोगों को अपनी तरफ खींचते हैं। मंदिर में हर रोज़ हज़ारों श्रद्धालु सिर झुकाने दूर-दूर से आते हैं। मैंने पहली बार इस मंदिर की सुंदरता के दर्शन किए, और इस सुंदरता को देखते ही रह गई।

गांधी जी को समर्पित साबरमती आश्रम (Ghandhi ko samarpit Sabarmati Aashram)

साबरमती आश्रम का असली नाम सत्याग्रह आश्रम है। महात्मा गांधी की महानता और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को तो हम अच्छी तरह से जानते ही हैं। साबरमती एक समय पर गांधी जी का घर हुआ करता था। इसी आश्रम की छांव में बैठकर गांधी जी चरखे पर सूत कातने का काम करते थे। यहां आज भी गांधी जी का चखरा चित्र मौजूद है। इस आश्रम में महात्मा गांधी की मूर्तियां और अलग-अलग समय पर उनके द्वारा किए गए आंदोलनों की स्मृतियां मौजूद हैं। यहां भी खूब हरियाली देखने को मिलती हैं और इस आश्रम की शांति तो मन को मोह लेने वाली है।

रात की रौनक बढ़ाता लौ गार्डन (Rat ki raunak badhata Law Garden)

आपको यह सुनकर बहुत आश्चर्य होगा कि लॉ गार्डन नाइट मार्केट है, जिसकी शुरुआत रात के अंधेरे में ही होती है। अगर आप खरीदारी करने के शौकीन हैं और शाम के खाने के बाद टहलना पसंद करते हैं तो ये आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। यहां टहलना और शौपिंग दोनों एक साथ हो सकती है। ये जगह मेरी कजिन के घर से बहुत नज़दीक थी, इसलिए मैंने अपनी चार दिन की अहमदाबाद यात्रा में सबसे ज़्यादा मजा लॉ गार्डन नाइट मार्केट का ही लिया।

रंग-बिरंगे कपड़े, गुजराती संस्कृति के गहने और लंहगे-ओढ़नी रात की रौशनी में और भी चमचमाते लगते हैं। इसके साथ ही हस्त शिल्प और भी बहुत-सी ऐसी चीज़ें इस बाज़ार में देखने को मिलती हैं, जो देखने में भले ही आपके किसी काम की न हों, पर आप उन्हें खरीदें बिना भी नहीं रह पायेंगे।

सुंदरता से भरी कांकरिया झील (Sundarta se bhari Kankariya Jheel)

अहमदाबाद में ऐसा कहा जाता है कि कांकरिया झील शहर की दूसरी सबसे बड़ी झील है। यहां चिड़ियाघर मौजूद हैं। बच्चों के लिए बच्चों का घर और टॉय-ट्रेन बनी हुई है। हॉट-एयर बैलून की सवारी, पानी पर नाव की सवारी और ऐसे बहुत से मनोरंजन की चीज़ें, हमें कांकरिया झील के आस-पास देखने को मिलती हैं। ये झील सैलानियों को अपनी तरफ आकर्षित करती है। अहमदाबाद जाने वाले टूरिस्ट इस झील को ज़रूर देखते हैं। कहते हैं कि अगर आप अपने पार्टनर के साथ एक रोमांटिक शाम बिताना चाहते हैं तो, इसके लिए ये झील बहुत अच्छी जगह है।

काइट/पतंग म्यूज़ियम (Kite/Patang Museum)

पतंग से गुजरातियों का पुराना रिश्ता है। यहां के आसमान ज़्यादातर उड़ती पतंगों से भरे दिखाई देते हैं। खासतौर पर मकर संक्रांति के अवसर पर गुजरात का पूरा आसमान पतंगों से सजा रहता है।

हर साल यहां पतंग महोत्सव तो होता ही है, पर यहां पतंगों का संग्रहालय भी मौजूद है। ये संग्रालय पतंग उड़ाने की परंपरा के इतिहास, रोमांच और स्वाद को एक साथ देखने का एक केंद्र माना जा सकता है। यहां की सबसे अच्छी बात यह है कि पतंग संग्रहालय में 125 अन्य और अलग-अलग कला-कृतियों की खूबसूरत पतंगों के अलावा, यहां एक विशाल 16 फीट की पतंग भी है। यह म्यूज़ियम 66 साल पुराना है और इतना ही पुराना यहां के पतंगों का इतिहास है। लोग दूर-दूर से यहां आकर संग्रालय की दीवारों पर चिपकी इन रंग-बिरंगी पतंगों के दर्शन करते हैं।

लाल दरवाज़ा मार्केट (Laal Darwaza Market)

लाल दरवाज़ा अहमदाबाद के सबसे प्रसिद्ध बाज़ारों में से एक है। यहां भी लौ गार्डन की तरह ही बाज़ार सजता है।‌ यहां इलेक्ट्रॉनिक से लेकर कॉस्मेटिक तक आप हर तरह की खरीदारी यहां कर सकते हैं। यहां के पानी पूरी बहुत मशहूर हैं, जिसका भरपूर आनंद मैंने मेरी कजिन के साथ उठाया। इसके साथ ही आपको लाल दरवाज़ा मार्केट का मसाला डोसा भी ज़रूर खाना चाहिए। सच पूछिए आपको यहां के पकवानों की दुकान देख कर ही मुंह में पानी न आए, तो कहिएगा।

मानेक चॉक (Manek Chouk)

यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा आभूषण बाज़ार है। आप यहां दिन में अपने लिए सोने और चांदी के आभूषण और गहने खरीद सकते हैं। रात के 9.30 बजे के बाद यह जगह खाने के स्वर्ग में बदल जाती है। यह बिल्कुल किसी जादू की तरह है। पुराने वक्त से ही अहमदाबाद को इस तरह से डिज़ाइन और नियोजित किया गया था कि यह चौराहा पारंपरिक रूप से कीमती धातुओं और रत्नों के व्यापार का शहर-केंद्र था। यह जगह पुराने समय से ही गहनों की खरीदारी के लिए जानी जाती है और कुछ बहुत पुरानी दुकानें आज भी मानेक चौक में हैं। इस बाज़ार में पूरे दिन चहल-कदमी होती ही रहती है। यहां अब बहुत से आधुनिक मौल भी बन चुके हैं लेकिन, फिर भी इस बाज़ार की रौनक कम नहीं हुई। आवासीय लोग हों या फिर पर्यटक मानेक चौक में गहने और ज़ायके का स्वाद सभी लेते नज़र आते हैं।

हूथिसिंग जैन मंदिर (Hutchinsigh Jain Mandir)

अहमदाबाद का एक और पर्यटन स्थल है हूथिसिंग जैन मंदिर। सफेद संगमरमर के पत्थरों से बना यह बेहद सुंदर मंदिर है। यह मंदिर ऐतिहासिक रूप से पीढ़ी दर पीढ़ी कई जैन परिवारों के लिए पवित्र रहा है। इसे 1848 ई. में 15वें जैन तीर्थंकर, श्री धर्मनाथ को समर्पण के रूप में एक अमीर व्यापारी शेठ हुथीसिंग ने 10 लाख रुपये देकर बनाया था। मंदिर के पत्थर पर काम करने वाले पारंपरिक कारीगर सोनपुरा और सलात समुदायों के थे। इस मंदिर की दास्तां भी अनोखी है।

सलात समुदाय ने किलों, महलों से लेकर मंदिरों तक वास्तुकला की बहुत-सी इमारतें बनाई हैं। हुथीसिंग जैन मंदिर के निर्माण का श्रेय प्रेमचंद सलात को दिया जाता है। यहां की इमारतें बहुत सुंदर और मनमोहक हैं। मंदिर का हर दरवाज़ा दूसरे के अलग न होते हुए भी अलग लगता है जो कि सबका ध्यान अपनी ओर कर लेता है। मैंने बाहर से इस मंदिर के साथ बहुत-सी तस्वीरें ली जो आज भी मेरी फोटो गैलरी में मौजूद हैं। अगर आप भी अहमदाबाद जाने का प्लान बना रहे हैं और ऐतिहासिक इमारतें आपकी पहली पसंद हैं तो आप हुथीसिंग मंदिर ज़रूर जाएं।

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