लोटस टेम्पल

दिल्ली की भीड़ में शांति का एहसास दिलाता ‘लोटस टेम्पल’

भारत की राजधानी नई दिल्ली में रोजमर्रा के हंगामे और शोर-शराबे के बीच एकांत में खड़ा है, ‘लोटस टेम्पल’। बहाई आस्था की जड़ों से जुड़ा यह स्तंभ विविधता और सद्भाव का प्रतीक है।

यदि आप हवाई सफर कर रहे हैं और जैसे ही आप दिल्ली में प्रवेश करते हैं, हवाई जहाज़ की खिड़की से बाहर झांकते हैं, तो जो चीज सबसे पहले आपकी नज़रों को अपनी ओर आकर्षित करती है, वह है खूबसूरत लोटस टेम्पल। नीले पानी के तालों से घिरी यह कलाकृति मानो एकांत में खड़ी हो, मानो भारत की राजधानी की भीड़ से भरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी और तेज़ रोशनी के प्रभाव को कम कर रहा हो।

लोटस टेम्पल (Lotus Temple) के चारों ओर बिछी खुशनुमा हरी घास के कालीन के साथ, मंदिर के चारों ओर के ताल, कमल की पत्तियां होने का आभास कराते हैं। जब यह पूरे शबाब पर होता है, तब मानो यहां लगे हुए सफेद गुलाब और नीले रंग के फूल नीरस दिन के माहौल को खुशनुमा बना देते हैं। यह मानव-निर्मित चमत्कार यूं तो आकाश को छूता प्रतीत होता है, जबकि इसकी जड़ें बहाई आस्था से जुड़ी हुई हैं।

बहाई आस्था के दस्तावेज बताते हैं कि पैगंबर मोहम्मद, यीशु मसीह, कृष्ण और बुद्ध ‘ईश्वर का स्वरूप’ हैं। इसी मान्यता के आधार पर विभिन्न धर्म एक साथ मिलजुल कर रहते हैं। इसी विधान के आधार पर बहाई आस्था के लोग जो कि इस मंदिर को ‘पूजा का घर’ मानते हैं, यहां पर कोई रूपक, पौराणिक कहानी या मूर्ति नहीं रखते हैं।

वास्तुकला के उस्ताद फरीबर्ज सहबा (Vaastukala ke Ustaad Phareebarj Sahaba) 

प्रतिभावान वास्तुकार फरीबर्ज सहबा के लिए मंदिर का नक्शा तैयार करना किसी आध्यात्मिक यात्रा पर जाने के अनुभव जैसा ही था।

उन्होंने संपूर्ण भारत की यात्रा एक ऐसे प्रतिरूप की खोज के लिए की जो सभी धर्मों को आकर्षित करते हुए बहाई आस्था के मूल्यों को प्रतिबिंबित करें। अपनी यात्राओं के दौरान ईरानी-अमेरिकी वास्तुकार की मुलाकात हमबहाई कमरूद्दीन बारतार से हुई, जिन्होंने मंदिर को कमल के आकार का बनाने की सलाह दी। हालांकि यह एक आदर्श विचार था, किंतु फूल के आकार कोयथार्थ करना, एक चुनौती-पूर्ण कार्य था।

इसके बाद शुरू हुआ ईंट दर ईंट जोड़ने का काम। आठ सौ शिल्पकारों की कड़ी मेहनत का फल यह मंदिर, आपको वास्तु शिल्प के अनूठे चमत्कार के रूप में नेहरू प्लेस के कोलाहल भरे माहौल में अवतरित हुआ दिखाई देता है।

दिल्ली की उमस भरी गर्मी में लोटस टेम्पल में मिलती है शांति (Delhi ki umas bhari garmi mein lotus Temple mein milti hai shanti) 

दिल्ली की उमस भरी गर्मी और कंपकपा देने वाली सर्दी भी तीर्थ यात्रियों को मंदिर में आने से रोक नहीं पाती। लोटस टेम्पल के परिसर में फैली असीम शांति लोगों को शहर के अशांत और कोलाहल भरे माहौल को भूलने का मौका देती है।

कुछ लोग यहां बैठकर सिर्फ इस जगह की भव्यता को निहारते हैं, जबकि कुछ इस वातावरण का लाभ उठाकर ध्यान में लीन हो जाते हैं। किसी भी अनुष्ठान और निर्धारित विधि-विधान के अभाव में मन तैरने लगता है और उसी स्थिरावस्था में सब यह सोचने पर विवश हो जाते हैं कि इस विस्तृत ब्रह्मांड में आप कहां खड़े हैं।

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