सिक्रेट जर्नल

द सिक्रेट जर्नल

एक दिन पाखी की सास सुनीता की नज़र उस बॉक्स पर पड़ी। उन्होंने उस बॉक्स को खोलकर देखा, तो उसमें एक सिक्रेट जर्नल पड़ा था।

पाखी अक्सर न्यूज एंकर बनने का सपना देखती थी। लेकिन, उसके पिता ने उसके सपनों और आकांक्षाओं पर एक तरह से ग्रहण लगा दिया। महज 21 साल की उम्र में ही उसके पिता ने उसकी शादी करा दी।

जैसे-जैसे वक्त गुजरा पाखी ने अपनी सारे ज़ज्बातों और सोच को अपनी सिक्रेट जर्नल में ही कैद कर लिया। शादी के वर्षों गुज़रने के बाद भी कभी-कभार उसे थोड़ा वक्त मिल ही जाता, जब वह अपनी पर्सनल जर्नल खोलकर देख लेती थी। उस जर्नल को देखने के बाद काफी देर तक वहीं बैठी रहती थी। उसे कुछ वैसा ही लगता था, जैसे वह शादी से पहले अपने सपनों के बारे में सोचती थी। पर, अब उसके सपनों में उस तरह की जान नहीं रह गई थी। समय के साथ सब कुछ मुरझा गए थे।

दरअसल, पाखी ने अपने जर्नल को एक छोटे से डिब्बे में रख उसे घर में कहीं छिपाकर रखा था। उसने मान लिया था कि उसकी ज़िंदगी अब मिसेज सुधीर शर्मा के अलावा कुछ भी नहीं है।

एक दिन पाखी की सास सुनीता की नज़र उस बॉक्स पर पड़ी। उन्होंने उस बॉक्स को खोलकर देखा, तो उसमें एक सिक्रेट जर्नल मिला। उन्हें अच्छी तरह मालूम था कि किसी की निजी चीज़ों को नहीं पढ़ना चाहिए। इसके बावजूद वह खुद को रोक नहीं पाईं। कहीं ऐसा न हो कि पाखी पढ़ते हुए उसे देख ले, सुनीता जल्दी-जल्दी सरसरी नज़र से सिक्रेट जर्नल के सारे पन्ने पलट गई। इसके बाद सुनीता ने जस के तस उस जर्नल को बॉक्स में रख कर तुरंत घर से बाहर चली गई।

थोड़ी देर बाद पाखी ने देखा कि उसकी सास सुनीता कागज़ों का एक बंडल लेकर घर आ रही थीं। ये सब क्या है? वह उन्हें देखकर हैरान रह गई।

सुनीता ने बड़े ही प्यार से मुस्कुराते हुए पाखी को कागज़ के बंडल थमा दिए। ये तुम्हारे मीडिया एंड कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री के लिए एडमिशन का फॉर्म है। जाओ, तुम इस फॉर्म को भर दो। तुम्हें एडमिशन लेना है न?

“अच्छा होता, अगर तुमने मुझे पहले ही जर्नल के बारे में बता दिया होता। तुमने अपने 5 साल के बेशकीमती समय यूं ही गवां दिए। सास-बहू से पहले हम दोनों एक महिला और एक अच्छे दोस्त हैं। मेरे लिए तुम्हारे सपने और महत्वाकांक्षाएं उतने ही अहम हैं, जितना कि मेरा बेटा”। सुनीता ने अपनी नम आंखों और एक प्यार भरी मुस्कान के साथ यह बात कही।

ज्यों ही वहां से सुनीता जाने के लिए तैयार हुई, पाखी बड़े ही गर्मजोशी के साथ अपनी सास के गले गई। थैंक यू मां… उसका गला यह कहते-कहते भर आया। अपनी सास के व्यवहार को देखकर और एडमिशन लेने की बात को सोचकर वह बहुत खुश थी। अब उसकी ज़िंदगी में मिसेज सुधीर शर्मा होने के साथ-साथ बहुत कुछ होने वाला था।

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