मैं तुम्हारे साथ हूं

अब मैं तुम्हारे साथ हूं

बृंदा बहुत ही बहादुर लड़की थी। उसकी आंखें मोतियों से भी तेज़ चमकीली थीं। लेकिन आकाश हर बार उसके डेस्क के पास जाता और फिर वहां से दबे पांव पीछे लौट आता। जबकि, वह खुद को संभालने में लग जाती।

यह कोई चिलचिलाती गर्मी की दोपहर थी। आकाश उस दिन की अपनी रिपोर्ट सबमिट करने के लिए न्यूजपेपर ऑफिस पहुंचा था। जैसे ही वह अपने डेस्क की तरफ पहुंचा, तो उसने देखा कि बृंदा अपने पैरेंट्स के साथ सोफा पर बैठी थी। वह अपने बॉस का इंतजार कर रही थी। उसने पहले भी उसे देखा था, लेकिन इस हालात में कभी नहीं देखा था।

अचानक उसे 7 महीने पहले की बात याद आने लगी, जब उसने बृंदा को पहली बार इस बिल्डिंग में देखा था। वह काफी बहादुर स्वभाव की लड़की थी। उसकी आंखें मोतियों से भी ज्यादा चमकीली थीं। उसके प्रति प्रेम का भाव जगने में ज़रा-सा भी समय नहीं लगा। हर वक्त वह बृंदा के डेस्क के पास जाता और फिर वहां से दबे पांव पीछे लौट आता। जबकि, वह खुद को संभालने में लग जाती थी। उसे बड़ा ही अजीब लगा। आकाश को घबराने की बजाय थोड़ा अच्छा फील हो रहा था।

उस दिन बृंदा बमुश्किल ही कुछ बोल पा रही थी। वह सहमी-सहमी सी लग रही थी। आकाश को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्यों डरी हुई है। उसने धीरे से पूछा, ‘क्या हुआ, तुम ठीक हो न?’ उसके प्रश्न को अनदेखा कर बृंदा अपनी आंटी के साथ सीधे बॉस के केबिन में चली गई।

इधर, बृंदा के व्यवहार से परेशान आकाश उसकी दोस्त टीना के पास गया और पूछा, क्या हुआ है?। टीना ने उसे बताया कि वह बाइपोलर से पीड़ित है। हाल ही में उसने खुद को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी। आकाश ने बड़े ही धैर्यपूर्वक उसकी बातों को सुना। क्योंकि, बृंदा जिस परेशानी से गुज़र रही थी, वह उससे बाहर निकालने में मदद करना चाहता था।

हमेशा की तरह अपने चिर-परिचित अंदाज़ में बृंदा ऑफिस से निकलकर जाने लगी। उसे देखकर आकाश पीछे-पीछे दौड़ा और बोला, ‘चिंता न करो, तुम अकेली नहीं हो। कोई बात नहीं, मैं तुम्हारे साथ हूं।’ उसके शब्द पहले की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही तेज़ी से निकल रहे थे। उसने अपने व्यवहार के लिए माफी मांगा, लेकिन बृंदा ने कुछ नहीं कहा। वह वहीं खड़ी रही और आभार जताते हुए मुस्कुरा दी।

उस दिन के बाद से जैसा कि आकाश ने वादा किया था, बृंदा अकेली नहीं थी। हालांकि, अगले कुछ महीनों के लिए बृंदा के भ्रम, दौरे, सुसाइड के प्रयास जैसे विचार बंद नहीं हुए। फिर भी अब आकाश उसकी मदद के लिए हमेशा चट्टान की तरह तत्पर रहता था। जब उनकी शादी हुई, तो दोनों ने एक नई ज़िंदगी की शुरुआत की। साथ ही दोनों ने कठिन से कठिन परिस्थिति में एक-दूसरे के लिए जीने-मरने की भी कसम खाई।

सहकर्मी से लेकर दोस्त और लाइफ पार्टनर तक, आकाश और बृंदा ने दुनिया को एक मिसाल दी कि मेंटल हेल्थ की स्थिति गंभीर हो सकती है। लेकिन अगर अपनों का प्यार और सपोर्ट मिल जाए, तो किसी को भी फाइटर बनाया जा सकता है।

और इस तरह बृंदा एक फाइटर बन गई थी।

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