प्रतिबद्धता

सपनों की राह

हैलो.. अपने ख्यालों में डूबी अदिति का हाथ हिलाते हुए अनिल ने उसे जगाया और पूछा, " कहां खोयी हुई थी तुम?"

शनिवार की सुबह का वक्त था, पर अदिति को शायद ही इससे कोई खास अंतर पड़ा हो। वह रोजाना एक ही रूटीन को फॉलो करती थी और आज भी उसके लिए कुछ अलग दिन नहीं था। अपने बिस्तर से सुबह 7 बजे उठकर सबसे पहले उसने ब्रश किया और सुबह 8 बजे म में जुट गई। एक कप चाय की चुस्की लेते हुए वह इस सोच में डूब गई कि पता नहीं उसकी ज़िंदगी किस दिशा में जा रही है। लेकिन, हमेशा की तरह उसे अपने सवालों का कोई जवाब नहीं मिला।

अदिति ने बगल में बैठे अपने पति अनिल की तरफ देखा। वह काफी खुश मिजाज और जीवन से भरपूर दिख रहा था। साथ ही वे अपने काम को भी उत्साहपूर्वक तरीके से कर रहा था। लेकिन, मुझे क्या हो गया है? उसने अपने विचारों के सागर में गोते लगाते हुए खुद से सवाल किया,”मैं इतना खाली क्यों महसूस कर रही हूं?”

हैलो.. अपने ख्यालों में डूबी अदिति का हाथ हिलाते हुए अनिल ने उसे जगाया और पूछा, ” कहां खोयी हुई थी तुम?”

“कहीं तो नहीं। मुझे बताओ, ” अदिति ने थोड़ा  मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

“सुनो, पास के एक थिएटर में कोई नाटक का मंचन हो रहा है। चलो देखकर आते हैं,” अनिल ने कहा।

“हां.. ज़रूर। मुझे थोड़ा तैयार होने के लिए वक्त दो” वह वहां से उठी और अपने कमरे में चली गई।

इसके बाद दोनों थियेटर में नाटक देखने पहुंचे। नाटक इतना शानदार था कि अनिल उसके पात्रों के डायलॉग, एक्टिंग और ड्रामा को देखकर  काफी मंत्रमुग्ध हो गया। जब नाटक खत्म हुआ, तो अनिल ने अदिति से कहा- चलो मैं तुम्हें किसी से मिलवाता हूं।

किससे मिलवाओगे तुम?, अदिति ने बड़े ही उत्सुकता से पूछा।

अरे आओ ना…अनिल उसे पकड़कर थियेटर के पीछे की ओर ले गया। “इनसे मिलो, ये हैं इस नाटक के निर्देशक और मेरे बड़े ही अजीज मित्र अरविंद। ये अपना एक एक्टिंग स्कूल भी चलाते हैं।”  अरविंद को देखकर अदिति थोड़ी देर के लिए अचंभित हो गई। वह अरविंद के बारे में बखूबी जानती थी। वह उनके काम की बहुत बड़ी प्रशंसक थी।

“मैंने सुना है कि आपको एक्टिंग का काफी शौक है?” अरविंद ने मन की लहरों को टलोलते हुए कहा। “हां … हां, मैं एक्टिंग करती हूं,” अदिति थोड़ी बुदबुदाते हुए बोली। लेकिन, मैंने काफी दिनों से कुछ भी नहीं किया है।

“आप कल मेरे स्कूल क्यों नहीं आ जाती हैं?” हम लोग इस मुद्दे पर कल आगे की बात कर लेंगे”, अरविंद ने अदिति को अपना कार्ड दिया और हाथ मिलाकर उन्हें गुड बाय बोलकर चला गया।

जैसे ही अरविंद वहां से गया, तो अदिति खुशी के मारे उछलकर अनिल के बाहों में आ गई। “हे भगवान, ये अभी होना था?”

“पता है, मुझे कुछ सप्ताह पहले तुम्हारी पुरानी जर्नल मिली थी। तुमने मुझे कभी नहीं बताया कि तुम्हें एक्टिंग का बहुत शौक है और यह लंबे समय से तुम्हारा सपना रहा है,” अनिल ने कहा। “अब जाकर मुझे मालूम पड़ा कि यही चीज़ तुम्हें इन दिनों काफी परेशान कर रही थी। तुम शादीशुदा हो गई हो, यह सोचकर अपने सपनों को गला नहीं घोटना चाहिए।

यह सुनकर अदिति को विश्वास नहीं हो पा रहा था। वह बस इतना ही कर सकती थी कि अपने आंसुओं को रोक कर अनिल के गले लग जाए।

“अरे क्या कर रही हो। चलो अब घर चलते हैं। कल तुम्हें अपनी एक्टिंग क्लास के लिए तैयारी भी करनी है,” अनिल ने उसकी आंखों से बह रहे आंसूओं को पोछते हुए कहा।

ज्यों ही वे अपनी कार के पास पहुंचे, तो अदिति ने अपने पति की ओर देखा और बड़े ही प्यार और कृतज्ञता से भरे स्वर से कहा, “थैंक यू अनिल।”

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