फिर से शुरू करना

चलो फिर से शुरू करें

आखिरी बार वह इतना ज्यादा तब घबराई हुई थी जब वह 6 साल पहले अपने पहले पति विवेक से पहली बार मिली थी।

शीतल की नज़र फिर से घड़ी पर पड़ी। वह घबराई हुई थी। ब्लाइंड डेट्स उसके बस की बात नहीं थी। फिर से शुरू करने की चाह में यहां वह एक कैफे में खिड़की के पास वाली सीट पर बैठी थी। वह बार-बार बस एक ही चीज़ के बारे में सोच रही थी, आखिर वह मुझसे मिलने के लिए क्यों राज़ी हुआ?

आखिरी बार वह इतना ज्यादा तब घबराई हुई थी जब वह 6 साल पहले अपने पहले पति विवेक से पहली बार मिली थी। विवेक में वह सब कुछ था जिसकी उसने आशा की थी। वह दयालु और आत्मविश्वासी था। उन्होंने शादी कर ली और दोनों ने तब तक एक आनंदमय जीवन जिया जब तक कि एक दुर्घटना ने विवेक को उससे दूर नहीं कर दिया।

कहते हैं वक्त हर जख्म को भर देता है। शीतल ने उन सब स्थितियों के साथ रहना सीख लिया था जो बार-बार दर्दनाक यादों को उसके जीवन में वापस ले आती थी। उसकी भाभी नीना ने उसे उसके सहयोगी देव से मिलने के लिए मना लिया था।

जब शीतल अपने इन विचारों में खोई हुई थी, देव अंदर आ गया।

“नमस्कार, आशा है कि मुझे देर नहीं हुई है?” देव ने कहा।

“नमस्ते। मैं ही थोड़ा जल्दी पहुंच गई,” शीतल ने जवाब दिया।

उसने मुस्कुराकर पूछा, “कोई बात नहीं! आप कैसी हैं?”

“मैं अच्छी हूं,” उसने जवाब दिया।

एक मिनट के लिए वो दोनों ही अजीब तरह से बैठे रहे, दोनों ही इस बात को लेकर असमंजस में थे कि आगे क्या बात करें।

“मैं कोई अशिष्ट व्यवहार नहीं करना चाहती लेकिन मैं जानना चाहती हूं कि आप मुझसे मिलने के लिए क्यों तैयार हुए? आपको पता है न कि मैं एक विधवा हूं?” उसने आखिरकार पूछ ही लिया।

“जी, मैं जानता हूं,” देव ने शीतल के सवाल का विनम्रता से उत्तर दिया। “मैं आपसे मिलने के लिए इसलिए सहमत हुआ क्योंकि हमारे बीच कुछ चीजें एक जैसी ही हैं। मैंने भी अपने एक प्रियजन को खोया है।”

शीतल को यह जानकार बहुत हैरानी हुई और उसने इस पर खेद प्रकट किया।

देव ने अपनी बात कहना जारी रखा। “हमारी सगाई हुई थी लेकिन हमारी शादी होने से पहले ही वह गुजर गई।”

इसपर शीतल ने कहा कि नीना ने उसे इस बारे में नहीं बताया।

देव ने कहा, “मैं क्षमा चाहता हूं लेकिन वह भी इस बारे में कुछ नहीं जानती। मुझे उसे बताना चाहिए था लेकिन यह सब जानकार भी अगर आप जाना चाहती हैं तो मैं समझ सकता हूं।“

“नहीं। मुझे खुशी है कि हमने इस मुश्किल को पार कर लिया,” उसने कहा। “चलो शुरू से शुरू करते हैं। हेलो, मैं शीतल।”

“मैं देव। आपसे मिलकर खुशी हुई!” उसने मुस्कुराकर कहा।

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