शुभ दिन

आज का दिन बेहद खास होने वाला है

उदास होकर सैम ने अपनी घड़ी की ओर देखा और बेंच पर बैठ गया। उसने चिंता के मारे दोनों हाथों से सिर पकड़ लिया। 'अब शायद ही मैं इस काम को समय पर पूरा कर पाऊंगा, यह सोचकर ही वो परेशान हो गया।

आज का दिन बेहद खास होने वाला था। इसके लिए सैम काफी दिनों से तैयारी कर रहा था। निकलने से पहले उसने उन सभी चीज़ों पर एक सरसरी नज़र डाल ली कि कहीं कुछ अधूरा तो नहीं रह गया है। प्रेजेंटेक्शन की फाइल, कार की चाबी, अपना कॉन्फिडेंस वगैरह-वगैरह।

लेकिन जैसे ही वह बाहर निकला, तो उसने किसी की चीख सुनी। शायद यह आवाज़ ग्राउंड फ्लोर में पार्किंग की तरफ से आ रही थी। सैम घबराकर नीचे की तरफ दौड़ा और देखा कि उसका पड़ोसी रवि फर्श पर बेहोश पड़ा है। घबराते हुए उसने सबसे पहले उसका पल्स चेक किया। इसके बाद सैम ने उसे अपनी गोद में उठाया और अपनी कार में बैठाकर नज़दीकी अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल पहुंचने के बाद सबसे पहले सैम ने सारी औपरिकताएं पूरी की। इसके बाद उसने रवि के भाई प्रवीण को फोन किया, कहा- देवी अस्पताल में रवि एडमिट है। तुम जल्दी आ जाओ।

सैम अस्पताल के वेंटिग एरिया में बैठा था। उसने हाथों से अपना चेहरा ढंक रखा था। बैठे-बैठे वह अपने प्रेजेंटेशन के बारे में सोचते हुए अपनी घड़ी की ओर देखा, अब मैं इसे समय पर पूरा नहीं कर पाऊंगा। उसने अपनी पॉकेट से मोबाइल निकाला और इस घटना की जानकारी अपने ऑफिस में दे दी।

करीब एक घंटे के बाद प्रवीण अस्पताल के रिसेप्शन काउंटर पर पहुंचा। घबराते हुए उसने पूछा, मेरा भाई यहां भर्ती है। उसका नाम रवि कुमार है। थोड़ा जल्दी चेक करके बताइए?

इससे पहले की रिसेप्शनिस्ट जवाब दे पाता, उसने अपने कंधे पर कुछ रखा हुआ महसूस किया। ‘हैल्लो प्रवीण‍..! रवि को चोट लगी थी, लेकिन अब वह ठीक है। मैंने अभी डॉक्टरों से बात की है। वह आराम कर रहा है, सैम ने उससे कहा।’

बहुत-बहुत शुक्रिया सैम, उसने उसे गले लगा लिया। ‘भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि आप वहां थे।’

‘कोई बात नहीं है भाई। वह मेरे लिए भी भाई की तरह है,’ सैम ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

‘आप काफी थके हुए लग रहे हैं। घर जाइए और आराम कर लीजिए। आप पहले ही हम लोगों लिए बहुत कुछ कर चुके हैं,’ प्रवीण ने जोर देकर कहा।

‘ठीक है। आपको कुछ ज़रूरत हो, तो बता दीजिएगा। मैं बस एक कॉल पर हाजिर हो जाऊंगा,” सैम ने कहा और अस्पताल से चल दिया।’

थके-हारे सैम अपने घर पहुंचा और सोफा पर जाकर गिर गया। ये भी क्या दिन है.., यह सोचकर वह अपने लीविंग रूम में ही पड़े-पड़े सो गया।

अगले दिन सैम में पहले की तरह उत्साह नहीं था। इसके बावजूद उसने अपने ईमेल चेक किए और देखा कि उसकी प्रेजेंटेक्शन की तारीख अगले एक हफ्ते के लिए बढ़ा दी गई थी। इसे देखकर वह काफी खुश हो गया कि उसकी मेहनत व्यर्थ नहीं गई।

उसने अपना ब्रेकफास्ट किया और काम की तैयारी में जुट गया। जैसे ही वह अपनी कार में बैठा उसका फोन बज उठा। इसमें मुस्कुराते हुए प्रवीण और रवि की तस्वीर थी। कैप्शन पढ़ा तो लिखा था, ‘धन्यवाद, सैम। आप बड़े ही एक नेक इंसान हैं।’

‘सैम ने अपने सिर को पीछे की ओर झुकाया और आंखें बंद कर ली और कुछ मन में ही बोला, आज का दिन बेहद खास होने वाला है।’

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