हवा में उछलना

छलांग लगाते ही वह हवा में उड़ने लगी

रिया के लिए ज़िंदगी के मायने सिर्फ जीवन और मरण के खेल नहीं थे। जब वह हादसे के बाद लकवाग्रस्त हो गई, तो उसकी सारी उम्मीदें, सपने और जीने की इच्छा उसकी आंखों के सामने रेत के मकान की तरह टूट गई।

ज़िंदगी और मौत की अंतिम छोर पर खड़ी रिया किसी भी क्षण कूदने को तैयार थी।

‘मैं अब इस तरह नहीं जी सकती,’ उसने अपनी आंखें बंद कर खुद से कहा।

इसी बीच तेज हवा चली। जैसे हवा उसे पीछे धकेलने की कोशिश कर रही हो, लेकिन वह अपने फैसले से जरा-सा भी डगमगाई नहीं। इसकी बजाय उसने एक और कदम आगे बढ़ाया। अब वह मौत को अपने सामने खड़ी देख रही थी।

रिया के लिए ज़िंदगी के मायने सिर्फ जीवन और मरण के खेल नहीं थे। जब वह एक हादसे के बाद लकवाग्रस्त हो गई, तो उसकी सारी उम्मीदें, सपने और जीने की इच्छा उसकी आंखों के सामने रेत के मकान की तरह टूट गई।

रिया उस समय 28 साल की होगी। वह एक प्रमोशन की इंतजार कर रही थी और लंबी छुट्टी पर जाने की योजना बना रही थी। उसे क्या पता था कि उसकी ज़िंदगी इस तरह थम जाएगी।

हादसे के बाद रिया लगभग हर चीज़ के लिए दूसरों पर निर्भर हो गई। हालांकि, उसकी फैमिली और दोस्तों ने अपनी तरफ से हर तरह से सपोर्ट किया, जो वे कर सकते थे। इसके बावजूद रिया दिव्यांगता के चलते अंदर ही अंदर टूटा हुआ महसूस कर रही थी।

कहीं उसने पढ़ा था कि जीवन वही है, जैसा आप इसे बनाना चाहते हैं। उसका कुछ हिस्सा एक जिद्दी कांटे की तरह उसके मन में अटका हुआ था। क्या मैं अभी भी अपने जीवन को बदल सकती हूं?, रिया अक्सर इस पर सोचती रहती थी। या तो वह फिर से ज़िंदगी शुरू कर सकती है या अपने दुख के आगे घुटने टेक दे। इसके बाद रिया ने अपनी राह चुन ली।

मौत के अंतिम छोर पर खड़ी रिया ने अपनी आंखें खोली, नीचे देखा और छलांग लगा दी।

रिया की ज़िंदगी उसकी आंखों के सामने चमक उठी, जब वह बीच हवा में थी। उसके दोस्त, फैमिली, जॉब, प्लान, वह बैग जो उसने खरीदा था, उसके मन में हर वह चीज़ घूमने लगी, जिसे वह बेइंतहा प्यार करती थी और दिल के बेहद करीब थी। लेकिन, वह बंदूक की गोली तरह तेजी से जमीन पर गिर रही थी। उसे ऐसा लग रहा था, जैसे कि समय ही धीमा पड़ गया है। पिछले कुछ महीनों से वह बेजान-सी महसूस कर रही थी। लेकिन आखिरकार अब उसे खुशी महसूस होने लगी। अब वह न तो खुद को बेसहारा महसूस कर रही थी और न ही अपने मन की कैदी। अब वह आजाद थी।

थोड़ी देर बाद रिया के कंधे के ऊपर एक हाथ ने पैराशूट को पाउच से बाहर निकाल दिया। दरअसल, रिया उस इंस्ट्रक्टर के बारे में पूरी तरह से भूल गई थी, जो उसके साथ एक रक्षा कवच की तरह जुड़ा था।

पैराशूट खुल गया और वह नीचे जाने की बजाय ऊपर की ओर बढ़ने लगी।

रिया अब अपनी पीड़ा को भूल चुकी थी और अपने जीवन के एक नये अध्याय की शुरुआत की ओर बढ़ रही थी।

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