गोदान

ग्रामीण जीवन का आईना दिखाता प्रेमचंद का लिखा उपन्यास गोदान

प्रेमचंद के द्वारा लिखित, आधुनिक हिंदी साहित्य के इस कालजयी उपन्यास में मुख्य रूप से सामाजिक बंधनों से बंधे समाज की कहानी है। आप गोदान को जितनी भी बार पढ़ेंगे, आप हर बार इसे पहले से ज़्यादा अर्थमय और असरदार पाएंगे।

भारतीय साहित्य में मुंशी प्रेमचंद किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने एक से बढ़कर एक क्लासिकल उपन्यास और कहानियां लिखी हैं। उनकी हर कहानी और उपन्यास में ग्रामीण भारत की झलक दिखती है। एक तरह से हिंदी साहित्य और प्रेमचंद को एक-दूसरे के पूरक कह सकते हैं। उनकी अमर प्रति गोदान के शीर्षक का अर्थ है गाय का दान, जो कि एक हिंदू मान्यता है अपने जीवन के सभी पापों से मुक्ति के लिए। 

प्रेमचंद के द्वारा लिखित, आधुनिक हिंदी साहित्य के इस कालजयी उपन्यास में मुख्य रूप से सामाजिक बंधनों से बंधे समाज की कहानी है। आप गोदान को जितनी भी बार पढ़ेंगे, आप हर बार इसे पहले से ज़्यादा अर्थमय और असरदार पाएंगे। इस उपन्यास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पढ़ते समय यह आपको अपना-सा महसूस होगा। 

भारत में साहित्य से अंजान लोगों की ज़ुबान पर भी प्रेमचंद और उनका उपन्यास गोदान का नाम आसानी से मिल जाता है। प्रेमचंद ने 1932 में गोदान लिखना शुरू किया और 1936 में इसे प्रकाशित करवाया। गोदान ने प्रेमचंद को उस मुकाम पर पहुंचा दिया, जहां आज तक कोई दूसरा नहीं पहुंचा पाया है। 

तो चलिए सोलवेदा हिंदी के इस आर्टिकल में हम आपको प्रेमचंद के गोदान से रूबरू करवाते हैं। साथ ही इस उपन्यास में किस तरह से भारतीय ग्रामीण जीवन को दिखाया गया है, उसके बारे में भी बताते हैं।

गोदान में दिखाया गया है ग्रामीण जीवन का आईना (Godan main dikhaya gaya hai gramin jeevan ka aaina) 

प्रेमचंद बहुत ही जागरूक लेखक थे। उन्होंने उस समय समाज में चल रही घटनाओं और सामाजिक संरचनाओं को गोदान में समाहित किया था। इस उपन्यास की खासियत ही यही थी कि समीक्षक और आलोचक अपनी कलम को रोक नहीं सके। इस उपन्यास को साहित्य प्रेमियों ने एक बार नहीं बल्कि कईयों बार पढ़ा। देशी और विदेशी लगभग हर भाषा में इस उपन्यास का अनुवाद हुआ। एक और खास बात यह रही कि प्रेमचंद के लिखे इस उपन्यास को सभी भाषाओं और जगहों पर वही सम्मान मिला, जो हिंदी भाषा और भारत में मिला।

गोदान में है होरी की दर्दनाक कहानी (Godan mai hai hori ki dardak kahani) 

गोदान में प्रेमचंद ने एक किसान की कहानी लिखी है। यह ब्रिटिश समय के एक भारतीय गांव के किसान होरी की कहानी है। इससे एक किसान दर्द दिखाया गया है। गोदान में उस समय समाज में मौजूद विसंगतियों, ऊंची-नीची जातियों, छूत-अछूत की समस्या का वर्णय किया गया है। गोदान एक तरह से आईना है, उस समय के समाज का। इसमें तत्कालीन समाज का चेहरा स्पष्ट तौर पर दिखता है। गोदान का होरी शोषित किसान का एक प्रतीक बना गया था, जो आज भी समाज में दिखता है। अफसोस है कि इतने सालों बाद भी आज किसान खुद को इस कहानी के पात्र के रूप में पाते हैं। 

गोदान हर भारतीय किसान की बन गई आत्मकथा (Godan har bhartiya kisan ki ban gayi atmakatha) 

प्रेमचंद की पारखी नज़र ही थी कि उन्होंने गोदान जैसा महाकाव्य लिखा। उनके अंदर कहीं न कहीं किसानों को लेकर एक सहानभूति थी और किसानों के साथ जो समस्या थी उसको लेकर वो चिंतित थे। गोदान उपन्यास इतना मार्मिक और करुणा से भरा है मगर इसके अंत में जब होरी की मौत हो जाती है, जो उपन्यास को पढ़ने वाले को कोई दुख नहीं होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ज़िंदा रहते हुए कभी होरी को सुख तो नसीब नहीं हुआ और वो अब बुढ़ापे की ओर बढ़ चले थे, जब उन्हें और दुख होने वाला था। वो जितना ज़िंदा रहते उनकी पीड़ा और बढ़ती चली जाती। 

गोदान में सिर्फ किसानों की कहानी ही नहीं है (Godan main sirf kisano ki kahani hi nahi hai)

गोदान एक किसान की ही कहानी नहीं है बल्कि यह उपन्यास उस समय के सामाजिक और आर्थिक सभी पहलुओं को बहुत ही बारीकी से बयां करता है। इस उपन्यास में समाज की राजनीति और धर्म भी नज़र आता है। इसमें तथाकथित ऊंची जाति की ज़मींदारी प्रथा, महाजनों, सरकारी पदाधिकारियों के कार्य शैली और पाखंड से रूबरू करवाता है। एक तरह से देखें तो गोदान बहुत ही साधारण लोगों की कहानी है, लेकिन यही साधारण विषय इस उपन्यास और इसके लेखक प्रेमचंद को महान बना देते हैं। यही इस उपन्यास की सबसे बड़ी खासियत है। 

इस आर्टिकल में हमने गोदान उपन्यास के बारे में बात की। साथ ही हमने प्रेमचंद के लेखनी के बारे में भी समझने का प्रयास किया। यह पढ़कर आपको कैसा लगा हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं। इसी तरह के और भी आर्टिकल पढ़ने के लिए सोलवेदा हिंदी से जुड़ें रहें।

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