बादल

बादल

“सुनो! देखो ना कितना अच्छा मौसम हो रहा है।“ रोशनी ने आकाश को पुकारा। आकाश अपने काम में इतना मशगूल था कि उसने रोशनी की बात का कोई जवाब नहीं दिया।

रोशनी दो कप चाय बनाकर लाई और टेबल पर रखकर, खुद आकाश के सामने बैठ गई। आकाश लैपटॉप पर अपने ऑफिस का काम करने में व्यस्त था। उसे पता था कि रोशनी वहां बैठी है, पर लैपटॉप में गड़ी हुई नज़रें उठकर उसने रोशनी को नहीं देखा।

रोशनी कुछ देर उसे खामोशी से देखती रही। फिर उठकर बालकनी की रेलिंग से सट कर खड़ी हो गई। बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी।

“सुनो! देखो ना कितना अच्छा मौसम हो रहा है।“ रोशनी ने आकाश को पुकारा। आकाश अपने काम में इतना मशगूल था कि उसने रोशनी की बात का कोई जवाब नहीं दिया।

हल्की बुंदे मूसलाधार बारिश में बदल गईं। कुछ बुंदे रोशनी को भी भिगोंने लगी।

“अंदर आ जाओ। भींग जाओगी।” आकाश ने लैपटॉप में नजरें जमाए हुए ही कहा।

रोशनी ने आकाश की तरफ मुड़ कर देखा, और कुछ देर वही से उसे देखती रही। सामने की छत पर नेहा और अर्जुन एक दूसरे पर बारिश की बूंदें फेंकते हुए, भींग रहे थे। दोनों के खिलखिलाने की आवाज़ रोशनी के कानों में पड़ी। उन्हें देखकर रोशनी को अच्छा नहीं लगा, सो वो अंदर चली आई, और आकर पलंग पर लेट गई।

रोशनी गहरी सोच में डूबकर पंखे को देखे जा रही थी।

“क्या हुआ..?” आकाश ने पहली बार लैपटॉप से नजरें हटा कर रोशनी को देखा।

“कुछ नहीं… सामने नेहा और अर्जुन बारिश के मज़े ले रहे हैं।“ रोशनी ने बताया।

“लेने दो… उम्र है उनकी।“

आकाश ने कुछ ऐसे कहा जैसे वो खुद उस उम्र में होने के बावजूद भी उस उम्र से बहुत दूर निकल आया है।

रोशनी ने लेटे हुए ही उसकी तरफ देखा। वो अब भी लैपटॉप पर बिजी था। रोशनी फिर पंखे को घूरने लगी, और पता नहीं कब उसे नींद आ गई।

रोशनी शादी से पहले बैंक कैशियर थी। शहर बदलने पर नौकरी छोड़नी पड़ी। दिन भर काम में बिजी रहकर, छुट्टियों में सारा दिन दोस्तों के साथ घूमने वाली लड़की, शादी के बाद सिर्फ हाउसवाइफ होकर रह गई थी। आकाश अपने काम में इतना व्यस्त रहता था कि, वो रोशनी से दो पल बैठकर प्यार भरी बातें करना भी भूल चुका था।

दो साल पहले हुई शादी, रोशनी को दस-पंद्रह साल पुरानी लगती थी। उसके जीवन में उल्लास खत्म हो चुका था। लेकिन फिर भी वो चुपचाप बिना कुछ कहे, बिना शिकायत किए दिन गुजार रही थी।

रोशनी की आंख खुली तो शाम के छः बज चुके थे। आकाश अब भी ऑफिस का ही काम कर रहा था।

“तुमने जगाया भी नहीं” कहते हुए रोशनी शाम के काम निपटाने के लिए किचन की तरफ भाग गयी।

किचन में पहुंच कर रोशनी हैरान थी। बर्तन धुले हुए रखे थे और किचन पूरा साफ था। रोशनी आकाश से पूछने के लिए उसके पास आई।

“ये सब तुमने किया?” रोशनी ने कहा।

“हम्म… चलो जल्दी तैयार हो जाओ। हम बाहर जा रहे हैं।“ आकाश ने कहा।

रोशनी उसे हैरानी से देखने लगी, “कहां” उसने पूछा।

“मूवी देखने और खाना भी बाहर ही खाएंगे… चलो अब जल्दी करो।”

“पर तुम्हारा काम?”

“मैंने बात कर ली है…कल कर लूंगा।” आकाश ने उठकर अलमारी से रोशनी के लिए कपड़े निकालते हुए कहा।

रोशनी अब भी हैरान थी। उसकी नज़र बालकनी की तरफ चली गई। बाहर बादल हट चुके थे, आसमान साफ था। उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

“हम्म…चलो बाद में मरीन ड्राइव पर भुट्टा भी खाएंगे।” कहते हुए वो आकाश के गले लग गई।

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