हम तो दोस्त थे ना!

हम तो दोस्त थे ना

पढ़िए अनिता और सिया की कहानी। बचपन से ससुराल तक साथ रहने वाली दोस्ती जब अचानक टूट गई। तो कैसे हुआ दोनों को अपनी गलती का एहसास।

अनिता और सिया बचपन की सहेलियां थीं। दोनों के घर पास-पास ही थे। बचपन से एक ही स्कूल में साथ पढ़ीं। फिर कॉलेज भी एक ही चुना। और तो और उनकी इतनी गहरी दोस्ती देखकर, उनके घरवालों ने एक ही घर में दो लड़के देखकर दोनों की शादी कर दी। 

सगी बहनों से भी ज़्यादा सगी सहेलियां अब एक दूसरे की देवरानी-जेठानी बन गई थीं। सिया बड़े भाई की पत्नी थी और अनिता छोटे भाई की। शुरुआत में दोनों में बहुत प्यार था। शादी के बाद भी अलग‌ ना होने की खुशी से दोनों फूले नहीं समाती थीं। मिल-जुल कर घर का सारा काम करतीं और सास ससुर का ध्यान भी रखतीं थीं। 

पर शादी के कुछ महीनों बाद ही उनकी दोस्ती को जैसे किसी की नज़र लग गई थी। शुरुआत छोटे-मोटे कामों पर हल्की बहस से हुई और देखते ही देखते मनमुटाव कहासुनी में बदलने लगे। 

जब कहासुनी बढ़ने लगी, तो सास ससुर ने दोनों से अलग-अलग रहने को कहा। इसपर दोनों के घरवालों ने आकर उन्हें समझाने की कोशिश भी की, पर कोई सफलता हाथ ना लगने के कारण वो लोग भी लौट गए। अंत में एक ही घर के दो हिस्से हो गये। किचन घर के एकदम बीच में था। वो किसके हिस्से आएगा इसपर भी खूब लड़ाइयां हुईं और फिर दरवाज़ा एक ही होने के बावजूद भी किचन दोनों के हिस्से में आधा-आधा बांट दिया गया।  

बंटवारे से घर में कुछ दिन शांति रही, पर लड़ाइयों की वजह बच्चे बनने लगे। दोनों के ही छोटे बच्चे थे। आपस में खेलते वक़्त अगर किसी को चोट लग जाती तो उसकी मां दूसरे की मां से लड़ने लग जाती। दोनों ने अपने बच्चों को भी एक दूसरे के साथ खेलने से मना कर दिया था। 

जान से प्यारी सहेलियों को एक दूसरे की जान की दुश्मन बनता देखकर, घर में भी सब बहुत दुखी थे पर कोई कुछ कर भी नहीं सकता था।

फिर एक दिन किसी रिश्तेदार के यहां से शादी का निमंत्रण आया। परिवार के सभी सदस्यों के साथ अनिता और सिया भी शादी में शामिल हुईं।

वहां उन्हें उनके कालेज की एक सहेली नम्रता मिली। नम्रता को देखकर दोनों ही बहुत खुश हुईं।

नम्रता ने कहा “यार तुम लोग अभी भी साथ हो। मुझे यकीन नहीं हो रहा कि तुम दोनों अब भी इतने अच्छे दोस्त हो। सच में, कॉलेज में तुम्हारी दोस्ती की मिसालें सब सही ही‌ देते थे।” नम्रता बोले जा रही थी और अनिता और सिया चुपचाप सुनती रहीं। 

फिर नम्रता ने आगे कहा ”हम सब तो अलग-अलग हो गए। पर तुम्हें साथ देखकर बहुत अच्छा लगा। पता है, मेरे पास हमारे कॉलेज के दिनों की बहुत सारी तस्वीरें हैं। मैं तुम्हें भेजूंगी।” नम्रता ने दोनों को साथ देखकर अपनी खुशी ज़ाहिर की और दोनों से उनका फोन नंबर लेकर चली गई।

सब वापस घर आ गए। उसी रात नम्रता ने दोनों को उनके कॉलेज की यादों से भरी तस्वीरें भेज दी। हर तस्वीर में अनिता और सिया साथ में थे। तस्वीरों को देखकर उनकी पुरानी यादें ताज़ा हो गईं और उन्हें एहसास हुआ कि एक समय पर वो कितनी पक्की दोस्त हुआ करती थीं। और अब उन्होंने सब खराब कर दिया है।

पश्चाताप से भरी होने के कारण दोनों को ही नींद नहीं आई। सुबह जब अनिता किचन में गई तो वहां सिया चाय बना रही थी। सिया ने एक नज़र उसकी तरफ देखा और चाय बनाने में व्यस्त हो गई। अनीता भी अपनी गैस पर चाय बनाने लगी। दोनों इतनी नज़दीक होने के बावजूद भी पहल करके अपनी गलती के लिए माफी मांगने से कतरा रही थीं। 

तभी सिया, अनिता की तरफ मुड़ी और उसके गले लग गई। गले लगकर उसने कहा “मुझे माफ कर दे। मैं अब कभी तुझसे नहीं लड़ूंगी।”

अनिता को भी गलती का एहसास था। उसने भी जबाव दिया “मुझे भी माफ कर दो। देखो तुम बड़ी हो फिर भी मुझसे माफी मांगने में नहीं झिझकी और मैं नालायक हमेशा तुमसे झगड़ा करती रही।” अनिता इतना कहकर फूट-फूट कर रोने लगी।

सिया ने उसके आंसू पोंछते हुए कहा “अरे रो मत पगली। हम तो दोस्त हैं ना? तो फिर क्या बड़ा और छोटा? हमें अपनी गलतियों का एहसास हुआ वो ही बड़ी बात है।”

अनिता ने यह सुनकर मुस्कुरा दिया और फिर दोनों साथ खुशी-खुशी रहने लगी।

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