सामंजस्य

रिश्तों में थोड़ा सामंजस्य भी है ज़रूरी

अपने ड्रीम रिलेशनशिप के विचारों से आगे बढ़ने के साथ-साथ देव और तान्या को बहुत कुछ मिल गया।

सब कुछ कैसे खत्म हो गया? बिस्तर से लिपटी तान्या सिवाय अपने टूटे हुए रिश्ते के बारे में सोचने के अलावा कुछ और कर ही नहीं सकती थी। बिस्तर पर पड़े-पड़े रोना जैसे तान्या के लिए एक दिनचर्या बन गई थी। वह सोच में डूबी रहती थी।

देव इतना भी कुछ खास नहीं था। बालकनी में बैठकर या आसमान को निहारते-निहारते वह अपनी रात यूं ही गुजार देता था।

जब शहर में लॉकडाउन की घोषणा हुई, तो तान्या और देव को एक साथ रहने को लेकर किसी तरह का फैसला लेने में जरा सा भी समय नहीं लगा। उनके फैसले बिल्कुल स्पष्ट थे। वे एक-दूसरे से प्यार करते थे। दोनों एक-दूसरे की अच्छी तरह केयर भी करते थे। लॉकडाउन जैसी विपरीत परिस्थिति को छोड़ दें, तो सबकुछ ठीक ही चल रहा था।

शुरुआत के कुछ दिन तो किसी सपने से कम न थे। देव को तान्या के छोटे-छोटे नोट काफी पसंद थे, जो वह हर सुबह उसके लिए छोड़ जाती थी। इस दौरान तान्या भी सुबह की कॉफी पीना बंद नहीं कर पाई। उसे नहीं पता था कि देव इतनी अच्छी कॉफी बनाता है।

लेकिन… ये सुखद पल कुछ ही दिन के थे।

अपने सामान्य दिनों और बेफिक्र होकर घूमने-फिरने वाले पल को याद कर दोनों के मन में निराशा के भाव पनपने लगे। मनमोहक आदतें और एक-दूसरे के शरारत भरे इशारे अब अच्छे नहीं लगते थे। उन्हें इससे चिढ़ लगती थी। जैसे ही दोनों को एक-दूसरे के व्यवहार के बारे में पता चलने लगा, धीरे-धीरे उनके रिश्तों में एक तरह से खटास आने लगी। दोनों एक-दूसरे को नीचा दिखाने से बाज नहीं आ रहे थे। वे इसे अच्छी तरह महसूस भी कर रहे थे। इस तरह जल्द ही दोनों के बीच बातों-बातों में ही एक-दूसरे को कष्ट पहुंचाने का सिलसिला शुरू हो गया।

‘काम खत्म करने के बाद किचन की सफाई कर देना…’। ‘मैं तुम्हारी सेवा करने के लिए नहीं रह रही हूं।’

‘क्या तुम इस बकवास म्यूजिक के बिना अपना योगा नहीं कर सकती?’

‘कभी-कभार सोफे से उठ लिया करो। मैं तुम्हारी कोई नौकर नहीं हूं’

‘तुम इतना गुस्सा दिलाओगी। मैं तुम्हारे साथ रहने की सोच भी नहीं सकता।’

इतना होने के बाद हर रात अपने-अपने कमरे में जाने के बाद ही तान्या और देव को मूड ठीक करने के लिए थोड़ी फुर्सत मिल पाती। ठंडे दिमाग से सोचने पर उन्हें अहसास होता कि परिस्थिति को अच्छी तरह संभाल नहीं पाने में उनकी अक्षमता के कारण ही उनके रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान घर में रहते-रहते तान्या और देव को घर जेल सा लगने लगा था। रिश्ते भी काफी बंधे-बंधे से लग रहे थे। ऐसी स्थिति में उन्हें बस अपने व्यवहार, सोचने के नज़रिए और एक-दूसरे की अपेक्षाओं के साथ सामंजस्य बनाने की ज़रूरत थी।

उस रात बातचीत की शुरुआत करते हुए देव ने तान्या के साथ उन मामलों की सूची बनाई, जिस पर दोनों की अक्सर तकरार होती है। तान्या और देव दोनों ने इस समस्या को ठीक करने के लिए एक-दूसरे से वादा भी किया। तान्या ने भी ऐसा ही की।

एक-दो दिन में ही उनके बीच आने वाले निराशा के भाव छंटने लगे। देव को एक तरह से तनाव से मुक्ति मिल गई। वहीं, तान्या भी योगा करने के दौरान ईयरफोन का उपयोग करने लगी। इससे अब ध्यान लगाने में भी काफी मदद मिलती थी। इस तरह दोनों ने धीरे-धीरे उन सभी शिकायतों को समझदारीपूर्वक निपटा दिया।

तान्या और देव के बीच आपसी सामंजस्य और थोड़े बहुत समझौते से सब कुछ ठीक हो गया। उन दोनों की कोशिश रंग लाई। अपने ड्रीम रिलेशनशिप के विचारों से आगे बढ़ने के साथ-साथ दोनों को बहुत कुछ मिल गया। एक ऐसा वास्तविक रिश्ता जिससे वे सीख सकते हैं और एक साथ बढ़ सकते हैं। क्या इससे बढ़कर भी कोई वास्तविक रिश्ता हो सकता है?

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