पुराने दोस्त से नई मुलाकात

रिश्ता

मधु ने रिया को अकेले पाला था। और आज रीया चाहती थी कि, अब उसकी मां अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़े और फिर से शादी करके अपनी ज़िंदगी के खालीपन को किसी के साथ बांट लें। इन सब में रीया का पति राघव ना केवल उसका साथ दे रहा था। बल्कि अपनी सास की शादी की आइडिया भी राघव ने ही दिया था।

मधु का वहां जाने का मन नहीं था। उसे लग रहा था, जैसे जल्दबाज़ी में वो कोई गलत फैसला ले रही है। 

रिया उसके लिए अपनी पसंदीदा साड़ी निकाल चुकी थी। रिया ने मधु को उठाकर, शीशे के सामने खड़ा कर दिया।

“वैसे तो आपको किसी मेकअप की ज़रूरत नहीं है, पर आज मैं आपको अपने हाथों से तैयार करूंगी।” रिया ने मधु के बाल बनाते हुए कहा।

रिया, मधु की 27 साल की बेटी थी। मधु के पति बहुत साल पहले ही गुज़र चुके थे। मधु ने रिया को अकेले पाला था। और आज रिया चाहती थी कि, अब उसकी मां अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़े और फिर से शादी करके अपनी ज़िंदगी के खालीपन को किसी के साथ बांट ले।

इन सब में रिया का पति राघव ना केवल उसका साथ दे रहा था बल्कि अपनी सास की शादी का आइडिया भी राघव ने ही दिया था।

बहुत सारी डेटिंग साइट्स और मैट्रिमोनियल साइट छानने के बाद, रिया और राघव ने मधु के लिए एक शख्स को चुना और दोनों की मुलाकात तय करा दी।

राघव और रिया भले ही मधु के बेटी और दामाद थे, पर इस वक्त दोनों उसके माता पिता की तरह बर्ताव कर रहे थे। दोनों ने मधु को लड़के से मिलने के लिए राजी कर लिया और अंतिम फैसला मधु के कांधे पर छोड़ दिया।

रिया ने मधु को तैयार कर दिया और दोनों साथ मिलकर मधु को रेस्टोरेंट तक छोड़ कर आए। मधु डर रही थी। उसे लग रहा था कि इस उम्र में यह सब करना सही नहीं है।

लेकिन, अपने बच्चों की बात रखने के लिए, वो चुपचाप जाकर टेबल पर बैठ गई। कुछ देर बाद, जब वह व्यक्ति वहां आया तो मधु को यह जानकर बड़ी हैरानी हुई कि वो शख्स कोई और नहीं बल्कि मधु का पुराना क्लासमेट मुकेश था। उसे इतने सालों बाद देखकर मधु चौंक गई। उसने उससे पूछा कि, “क्या तुम्हें पता था कि तुम मुझ से मिलने आ रहे हो?”

मुकेश ने बताया, “हां… मैं जानता था। मेरी पत्नी मुझे बहुत सालों पहले ही तलाक दे चुकी है। ना मेरे कोई बच्चे हैं।

कुछ देर रुककर मुकेश ने आगे कहा “पसंद तो तुम मुझे स्कूल में ही थी, मगर मेरे कभी कहने की हिम्मत नहीं हुई। पहले मैं बहुत हैरान था कि तुमने मुझे चुना, पर बाद में तुम्हारे बच्चों से पता चला कि उन्होंने तुम्हारे लिए मुझे चुना है। मेरी बायो में हमारे स्कूल का नाम एक ही होने की वज़ह से उन लोगों ने मुझसे बात की।”

मुकेश की बात सुनकर मधु के चेहरे पर मुस्कान आ गई। मुकेश ने फिर कहा “तुम सच में बहुत भाग्यशाली हो मधु! जो तुम्हें ऐसे बच्चे मिले हैं, कितना सोचते हैं तुम्हारे बारे में। मैं ऐसे बच्चों का पिता और अपनी बचपन की क्रश का साथी भी बनना चाहूंगा।” 

उसकी बात सुनकर मधु का सीना गर्व से चौड़ा हो गया और आंखें पुरानी यादों में भीग गईं। अपने स्कूल के दिनों के साथी से मिलकर भी वो‌ बहुत खुश थी। दोनों ने बहुत सारी पुरानी यादें ताज़ा की और अंत में एक दूसरे से शादी करने के लिए हां कह दी।

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