सकारात्मक विचार

फैसले लेने के लिए सकारात्मक सोच है ज़रूरी

ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव सभी के जीवन में आते हैं, लेकिन नाज़ुक दौर में हमेशा सही निर्णय लेकर, सकारात्मक विचार के रास्ते पर चलते रहना ही अहम होता है।

फॉरेस्ट गम्प फिल्म मुझे काफी पसंद है। इसलिए नहीं कि उसके किरदार टॉम हैंक्स मेरे चहेते कलाकार हैं, बल्कि इसलिए कि वह फिल्म सिनेमा जगत पर उपलब्ध एक जीता-जागता सबक है। मैंने इस फिल्म को बार-बार देखा है ताकि मैं इसके फॉरेस्ट के किरदार से कुछ नई बात निकाल सकूं व सकारात्मक विचार (Positive Thoughts) कर सकूं।

आखिरी बार जब मैंने यह फिल्म देखी, तो उसका एक दृश्य मेरी नज़र में चढ़ गया। वह यह कि फॉरेस्ट का किरदार निभाने वाले कलाकार जब एक बस स्टॉप पर अपने हाथों में चॉकलेट का बॉक्स लेकर बैठे होते हैं, वह बस स्टैंड पर बैठे एक अनजान व्यक्ति से कहते हैं, “मेरी मां कहा करती थीं कि ज़िंदगी इस चॉकलेट बॉक्स की तरह है, जिसमें से क्या निकलेगा, यह आपको नहीं पता होता।”

यह सीन मैंने कई बार देखा, लेकिन यह मुझे हमेशा नया ही लगता है। मैं यह सोचने लगा कि आखिर वह अपने शब्दों से क्या संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। मैं सोचता था कि क्या फॉरेस्ट जीवन के उस पहलू की ओर इशारा कर रहे थे कि जहां हमें पता नहीं होता कि हमारे हिस्से में क्या आने वाला है। हम सभी जानते हैं कि ज़िंदगी शानदार होती है, लेकिन यह भी सच है कि कभी-कभी जीवन की नाव हिचखोले भी खाती है। ऐसे ही वक्त के लिए हमें यह सीख दी गई थी कि व्यक्ति को हमेशा सही फैसले करते हुए सकारात्मक विचार रखना चाहिए, चाहे कुछ भी हो जाए।

सही फैसला लेना तो ज़रूरी है, लेकिन सकारात्मक सोच (Sakaratmak soch) से क्या लाभ होगा। क्या ज्यादा सकारात्मक विचार रखने से हम जिसकी आशा ना हो वैसे खतरों की अनदेखी नहीं करेंगे? आखिर ज़िंदगी तो चौंकाती रहती है ना। इसीलिए हमेशा बेहतर के बारे में सोचते हुए खराब के लिए तैयार रहने की आदत बना लेनी चाहिए। अभिनेता और उद्यमी एलेक्स फिशर के अनुसार, “कोई भी बीमारी के लिए तैयार नहीं हो सकता। कोई यह भी नहीं सोचता कि उसके मकान पर पेड़ गिर जाएगा। कोई भी इसके लिए तैयार नहीं होता,” लेकिन मेरा मानना है कि लोगों को इस बात की तैयारियां करके रखनी चाहिए। इन बातों के लिए समय निकालना ही होगा। ऐसा सोचने वाले को हम निराशावादी नहीं कह सकते। यह सोच उन्हें बेहतर नियोजक बनाकर बुरी स्थिति से निपटने में सक्षम बनाती है।

बेंगलुरु निवासी वेडिंग प्लानर दिव्या चौहान इस सोच से इत्तेफाक रखती हैं। उनका मानना है कि “हमें अच्छी व बुरी दोनों ही स्थितियों पर विचार करते हुए दोनों से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए।”

बेंगलुरु को गार्डन सिटी ऑफ इंडिया के रूप में पहचाना जाता है। स्वाभाविक है कि हर खास और आम खुले लॉन में ब्याह रचाना चाहता है। परंतु 10 मिनट की बारिश इस विशेष दिन को खराब कर सकती है। दिव्या कहती हैं कि “इसी बात को ध्यान में रखकर वेडिंग प्लानर हमेशा दो योजनाओं पर तैयारी करते हैं ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।” किसी भी सूरत से निपटने की तैयारियों में क्या बुराई है। अच्छी स्थिति के लिए तैयार रहने के साथ बुरी पर निगाह जमाए रखने में ही समझदारी है।

पीटर टी अंडरवुड ने अपनी किताब यू एस आर्मी सर्वाइवल मैनुअल में लिखा है कि “जब आप अस्तित्व से संघर्ष की स्थिति में अवास्तविक उम्मीद के साथ जाते हैं, तो आप निराशाजनक परिणाम की तैयारियां कर लेते हैं। इसीलिए इस कहावत को याद रखें कि बेहतर की उम्मीद रखो और खराब के लिए तैयार रहो। ऐसा करने पर ही आप खुद की उम्मीदों पर खरा उतरने के बाद खुश होंगे और उम्मीदों पर खरा ना उतरने पर आपको ज्यादा निराशा नहीं होगी।”

पेस्ट्री शेफ संध्या सुरेश कुमार का भी यही सोचना है। वह कहती हैं कि “अस्तित्व बचाने की योजना बेकिंग के लिए काफी अहम होती है। यही कारण है कि बेकर्स हर चीज़ को नापने और तोलने पर इतनी बारीकी से ध्यान रखते हैं। जब आर्डर में नियमितता ज़रूरी हो जाती है। ऐसे में हर चीज़ पर बारीकी से नज़र रखकर उसे सही नाप-तौल में रखना महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। ऐसा करने पर ही चौंकाने वाले हादसों को टाला जा सकता है।”

यदि संध्या का तरीका सही नहीं है, तो मुझे पता नहीं कि कौन सा तरीका सही होगा। सकारात्मक विचार रखने की सोच आपको किसी भी स्थिति से निपटने में सक्षम बनाते हुए भविष्य के हादसों से बचाकर रखने में सफल रहती है। इसी सोच के चलते आप विभिन्न समस्याओं के अलग-अलग पहलुओं पर विचार कर सकते हैं।

दुर्भाग्यवश सकारात्मक विचार का उपयोग समस्या निवारण के लिए नहीं किया जाता। सम्पूर्ण समस्या पर ध्यान दिए बगैर केवल सकारात्मक सोच से काम चलाने की कोशिश करना झूठी उम्मीद पालना ही है। आप सभी जानते हैं कि झूठी उम्मीद पालने से कुछ हासिल नहीं होता।

हम हमेशा सकारात्मक सोच के बुलबुले में नहीं जी सकते। यदि हम सकारात्मक विचार रख बचत नहीं करेंगे, तो आपत्ति आने पर कौन हमारी मदद करने को तैयार होगा। हम प्यास लगने पर कुआं खोदने लगेंगे। आपको चींटी और टिड्डी की कहानी तो पता ही होगी। जब गर्मियों में टिड्डी मस्ती करती, तो चींटी सर्दियों के लिए भोजन एकत्रित करने में जुटी रहती। यह सच है कि चींटी ने गर्मियों के मजे नहीं लिए लेकिन सर्दियों में भोजन भी उसी के पास था, टिड्डी के पास नहीं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि सदैव सकारात्मक विचार सोचकर बुरे के लिए तैयार रहना ज़रूरी है।

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