अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस: हर देश के लिए ज़रूरी है साक्षरता

शिक्षित होने और साक्षर होने में बड़ा अंतर है। शिक्षित होने का मतलब है पढ़ा-लिखा होना और साक्षर होने का अर्थ है मात्र लिखना-पढ़ना आना। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पूरे विश्व में करोड़ों लोग ऐसे हैं जो अपनी भाषा में लिख और पढ़ भी नहीं सकते।

साक्षरता यानी पढ़ने-लिखने का ज्ञान। साक्षर होना सभी के लिए ज़रूरी है, हर देश के हर नागरिक के लिए। मात्र साक्षरता से एक नागरिक की ज़िंदगी से लेकर देश की अर्थ-व्यवस्था तक को बदला जा सकता है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि बाकी तमाम देशों में लोगों को साक्षर होने की ज़रूरत है। किसी भी देश में जितने अधिक लोग साक्षर होंगे, देश उतना ही उन्नति करेगा।

शिक्षित होने और साक्षर होने में बड़ा अंतर है। शिक्षित होने का मतलब है अच्छी तरह पढ़ा-लिखा होना और साक्षर होने का अर्थ है मात्र लिखना-पढ़ना आना। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पूरे विश्व में करोड़ों लोग ऐसे हैं जो अपनी भाषा में लिख और पढ़ भी नहीं सकते।

इसलिए शिक्षा के महत्व को समझते हुए पूरा विश्व साक्षरता दिवस को एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में मनाता है। इस दिन पर शिक्षा का प्रचार-प्रसार पूरे विश्व में किया जाता है। आइए जानते हैं अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस कब मनाते हैं, विश्व की साक्षरता दर क्या है, भारत की साक्षरता दर क्या है, अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का उद्देश्य क्या है और साक्षरता किस तरह से किसी भी देश की तस्वीर बदल सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस कब मनाया जाता है? (World Literacy Day kab manaya jata hai?)

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हर साल 8 सितंबर को मनाया जाता है। विश्वभर में हर साल इस दिन के लिए एक खास थीम रखी जाती है। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2023 का थीम है “साक्षरता सीखने के स्थानों में परिवर्तन”।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का इतिहास क्या है? (World Literacy Day ka itihas kya hai?)

7 नवंबर 1965 को यूनेस्को ने अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का निर्णय लिया था। इसके बाद, 1966 से हर साल 8 सितंबर के दिन विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का उद्देश्य क्या है? (Antarrashtriye saksharta divas ka uddeshye kya hai?)

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का उद्देश्य है पूरे विश्व को शिक्षा के महत्व के बारे में बताना, साक्षरता दर बढ़ाने के लिए जागरूक करना और दुनिया से अशिक्षा को जड़ से मिटाने की तरफ आगे कदम बढ़ाना।

विश्व की साक्षरता दर क्या है? (Vishv ki sakshrta dar kya hai?)

एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में पुरुषों की साक्षरता दर लगभग 90.0% और महिलाओं की साक्षरता दर लगभग 82.7% है। 2023 में लोगों की जनसंखा लगभग 8,045,311,447 है। इसमें से अगर 10 प्रतिशत भी लोग अक्सर साक्षर नहीं है, इसका मतलब है निरक्षर लोगों की संख्या अमूमन 804,531,147 है। यह एक बहुत ही बड़ा आंकड़ा है, जो पूरे विश्व के लिए एक बड़ी चुनौती है।

सबसे ज़्यादा निराश करने वाली बात ये है कि विश्वभर में महिलाएं अधिक निरक्षर हैं। एक दूसरे रिपोर्ट के अनुसार विश्व के 127 देशों में से 101 देश अभी भी पूरी तरह साक्षरता हासिल नहीं कर पाएं हैं। इसीलिए पूर्ण साक्षरता हासिल करने के लिए अभी भी विश्व को काफी काम करना है।

भारत की साक्षरता दर क्या है? (Bharat ki sakshrta dar kya hai?)

भारत देश की साक्षरता दर लगभग 77.70% है। ये दर पुरुषों के लिए अमूमन 84.4% और महिलाओं के लिए 71.5% है। विश्व में आबादी के अनुसार, दूसरे नंबर पर आने वाला भारत देश अभी भी साक्षरता के नाम पर काफी पीछे है। हालांकि, आज़ादी के वक्त को याद किया जाए तो उस समय मात्र देश की 18% जनता पढ़ी-लिखी थी। तब से लेकर आज तक बड़ा सुधार आया है लेकिन अभी भी काफी सुधार की गुंजाइश है।

हर देश के लिए क्यों ज़रूरी है साक्षरता? (Har desh ke liye kyun zaruri hai sakshrata?)

एक साक्षर व्यक्ति न सिर्फ अपनी हालात में बड़ा बदलाव ला सकता है बल्कि पूरे देश के विकास में भी मदद कर सकता है।

साक्षरता कुछ इस तरह बदल सकती है किसी भी देश की तस्वीर:

गरीबी मिटेगी

एक साक्षर व्यक्ति निरक्षर व्यक्ति से अच्छा काम कर सकता है और अच्छा पैसा कमा सकता है, जो गरीबी मिटाने में मदद करेगी। एक व्यक्ति भी अगर साक्षर होता है तो वह पूरे परिवार को साक्षर बनाकर गरीबी से बाहर निकल सकता है।

धोखाधड़ी में आएगी कमी

जो लोग पढ़ना लिखना नहीं जानते हैं, अक्सर उन्हें बेवकूफ बनाना आसान होता है। ऐसे लोग कई बार अलग-अलग तरह की धोखाधड़ी में फंस जाते हैं। साक्षर होने से लोग जागरूक होंगे और ऐसी घटनाओं से बचेंगे।

जनसंख्या में आएगी कमी

अनपढ़ लोगों को जनसंख्या विस्फोट के बारे में समझाना मुश्किल होता है। लेकिन, साक्षर लोग अधिक जागरूक होते हैं और बात को ढंग से समझ सकते हैं। इससे जनसंख्या वृद्धि में कमी आएगी, जो उन देशों के लिए एक बड़ी जीत बनेगी, जहां जनसंख्या ज़रूरत से अधिक है।

बाल मृत्य दर कम होगी

जो लोग पढ़े-लिखे नहीं होते हैं, वो अक्सर बहुत-सी चीज़ों को चाहकर भी नहीं समझ सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान अक्सर ऐसे लोग अपने बच्चों को खो देते हैं, कई बार तो मांओं की भी जान चली जाती है। साक्षरता इसमें एक बड़ा बदलाव लेकर आ सकती है।

लैंगिक समानता प्राप्त करना

साक्षर लोग हर जेंडर के लोगों का बराबर सम्मान करना समझेंगे। भारत देश में अभी भी ग्रामीण इलाकों में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले कम साक्षर हैं, जिससे उन्हें बराबरी का सम्मान नहीं मिल पाता है। साक्षरता दर इस तस्वीर को बदल सकती है।

ये तो मात्र कुछ चीज़ें हैं, असल मायने में तो साक्षरता हर समस्या से किसी न किसी तरह जुड़ी हुई है। एक देश हर क्षेत्र में विकास करें, इसीलिए लोगों का शिक्षित होना बहुत ही ज़रूरी है। इस साक्षरता दिवस पर आप भी प्रण लें कि अपने आस-पास के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने में मदद करेंगे।

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