World Population Day

क्यों मनाया जाता है विश्व जनसंख्या दिवस, जानें इससे जुड़ी दिलचस्प बातें

जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाना बहुत जरूरी है। यही कारण है कि दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही आबादी की समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से, हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।

बीते पांच दशकों में दुनियाभर की जनसंख्या में काफी तेजी से इजाफा हुआ है। विश्व जिन गंभीर मुद्दों का सामना कर रहा है, उनमें से एक जनसंख्या वृद्धि भी एक है। इस समस्या से भारत भी अछूता नहीं है। जनसंख्या वृद्धि की वजह से दुनिया भर में अनाज और व्यवसायों की कमी के बारे में अक्सर खबरें आती रहती हैं, जो वाकई चिंता का विषय है।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की ओर से जारी विश्व जनसंख्या रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जनवरी, 2023 को अनुमानित विश्व जनसंख्या 7,942,645,086 रही, जो 2022 से 73,772,634 यानी 0.94% अधिक है। 

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया कि ‘अगर यही स्थिति रही, तो भारत साल 2023 के मध्य तक विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा और भारत की जनसंख्या पड़ोसी देश चीन से भी अधिक हो जाएगी।’ अप्रैल के महीने में चाइना वाकई में भारत से जनसंख्या के मामले में पीछे रह गया था।

ऐसे में जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाना बहुत जरूरी है। यही कारण है कि दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही आबादी की समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से, हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। सोलवेदा के इस लेख में जानें बढ़ती जनसंख्या के कारण, रोकथाम के उपाय और विश्व जनसंख्या दिवस मनाने के खास उद्देश्यों के बारे में।

11 जुलाई 1987 को पहली बार मना जनसंख्या दिवस

दुनियाभर में विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day)  मनाने की कहानी काफी दिलचस्प है। दरअसल, 11 जुलाई 1987 को विश्व की जनसंख्या 5 अरब हो गई थी। दुनियाभर की आबादी में काफी तेजी से हो रहे इजाफे को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने काफी चिंता जाहिर की। 

लिहाजा, 11 जुलाई 1989 को संयुक्त राष्ट्र ने बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने और फैमिली प्लानिंग यानी परिवार नियोजन को लेकर लोगों को जागरूक करने के मकसद से एक कार्यक्रम का आयोजन किया। 

इसके साथ ही पहली बार विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया। इस तारीख को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया और दिसंबर 1990 में इसे आधिकारिक बना दिया गया। तब से जनसंख्या वृद्धि के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने और बढ़ती जनसंख्या को कंट्रोल करने के लिए 11 जुलाई को दुनिया-भर के विभिन्न देशों में कई सारे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महामारी के बीच ‘अब महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और अधिकारों की सुरक्षा कैसे करें’ साल 2023 के विश्व जनसंख्या दिवस का विषय है।

विश्व जनसंख्या दिवस के मायने

वर्ल्ड पॉपुलेशन डे के अवसर पर हर साल 11 जुलाई को जनसंख्या को नियंत्रित करने के विभिन्न उपायों पर विचार-विमर्श किया जाता है। आबादी बढ़ने के चलते, देश और दुनिया के सामने जो परेशानियां हैं, उनसे पर्यावरण और मानवजाति को होने वाले नुकसान के प्रति लोगों को अवेयर करने के लिए यह दिन मनाया जाता है। 

इस दिन परिवार नियोजन, गरीबी, लैंगिक समानता, नागरिक अधिकार, मां और बच्चे का स्वास्थ्य, गर्भनिरोधक दवाओं के इस्तेमाल जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा और विचार-विमर्श किया जाता है। 

हमारा देश काफी बड़ी आबादी वाला देश है। कोरोना काल में हमें बढ़ी हुई आबादी के दुष्प्रभाव साफ नजर आएं। स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा तक, हर क्षेत्र में मुश्किलें बढ़ी हैं, ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण के महत्व को समझना और भी जरूरी हो गया है।

देश में बढ़ती जनसंख्या की प्रमुख चुनौतियां

लगातार बढ़ती आबादी की वजह से सबसे बड़ी चुनौती है – प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव। इन प्राकृतिक संसाधनों में जमीन, पानी, जंगल और खनिज शामिल हैं। लोगों की संख्या बढ़ने की वजह से इन संसाधनों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। नतीजतन, कम कृषि उत्पादकता (agricultural production) और पानी की कमी के साथ, पर्यावरण को नुकसान होने की सम्भावना बढ़ गई है। 

इसके अलावा कुछ प्रमुख चुनौतियां इस प्रकार है:

स्थिर जनसंख्या (Stable Population)

स्थिर जनसंख्या के लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह जरूरी है कि सबसे पहले प्रजनन दर में कमी आए। देश के कुछ राज्यों जैसे- बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ समेत कई अन्य राज्यों में प्रजनन दर काफी अधिक है। यह देश के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। हालांकि, नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों की मानें, तो भारत के अधिकतर धार्मिक समूहों में प्रजनन दर कम हो रही है।

जीवन की गुणवत्ता (Quality Life)

देश के लोग अच्छी जिंदगी जी पाएं, उन्हें क्वालिटी लाइफ मिल पाए, इसके लिए शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में इंवेस्ट करने की जरूरत है। क्वालिटी लाइफ के लिए अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों का अधिक-से-अधिक उत्पादन करना होगा।

लोगों को रहने के लिए घर और पीने का साफ पानी ज्यादा-से-ज्यादा उपलब्ध कराना होगा। सड़क, ट्रांसपोर्ट और बिजली जैसे बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने की जरूरत पड़ेगी। 

देश में रहने वाले लोगों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए और बढ़ती आबादी को सामाजिक बुनियादी ढांचा (social infrastructure) प्रदान करने के लिए, भारत सरकार को अधिक खर्च करने की जरूरत है। इसके लिए भारत को हर तरफ से अपने रिसोर्स बढ़ाने होंगे।

जनसांख्यिकीय विभाजन (Demographic Segmentation)

बढ़ती जनसंख्या का फायदा उठाने के लिए भारत को ह्यूमन रिसोर्स यानी मानव पूंजी का मज़बूत आधार बनाना होगा, जिससे लोग देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे सकें। हालांकि, भारत की कम साक्षरता दर (लगभग 74 प्रतिशत) इस लक्ष्य की सबसे बड़ी बाधा है।

शहरी विकास (Developmet of City)

साल 2050 तक भारत की शहरी आबादी लगभग दोगुनी हो जाएगी। इसकी वजह से शहरी सुविधाओं में सुधार और सभी को रहने की जगह उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती भी आएगी। इसे पूरा करने के साथ ही पर्यावरण का भी ख्याल रखना होगा

असमान आय वितरण (Unequal Income Distribution)

बढ़ती जनसंख्या की वजह से गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या बढ़ सकती है। साथ ही आमदनी की असमानता भी बढ़ने का ख़तरा है। लोगों के इनकम का बड़ा फर्क, कई नकारात्मक परिणामों के रूप में सामने आएगा। अमीरी और गरीबी में बंटे समाज में गरीबी को कम करना और भी मुश्किल हो जाएगा। 

जनसंख्या नियंत्रण के लिए कुछ कारगर उपाय

परिवार-नियोजन (Family Planning)

एक समृद्ध राष्ट्र के लिए सबसे बड़ी जरूरी चीज ये है कि उसके नागरिक स्वस्थ हों और देश के संसाधनों के अनुसार ही देश की जनसंख्या हो। इसके लिए फैमिली प्लानिंग के बारे में सोचना चाहिए और फैमिली प्लानिंग के आधुनिक तरीकों तथा दवाइयों की मदद ली जानी चाहिए। परिवार नियोजन के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए प्रचार-प्रसार सही तरीके से किया जाना चाहिए।

शादी की निर्धारित उम्र (Age of Marriage)

भारत में शादी की उम्र लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गई है। इसका पालन पूरे देश में सख्ती से होना चाहिए। इसके लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।

सन्तति सुधार (Breeding Stock)

दो बच्चों के जन्म के बीच का फासला कम से कम तीन से पांच साल का होना ही चाहिए। साथ ही ‘हम दो, हमारे दो’ की नीति को अपनाना चाहिए। 

ऊपर बताए गए उपायों से बढ़ती आबादी पर रोक लगाई जा सकती है। आइए विश्व जनसंख्या दिवस पर शपथ लें कि खुद के अलावा अपने आसपास के लोगों को जनसंख्या की बढ़ोतरी को लेकर जागरूक करेंगे। इसी तरह के और आर्टिकल पढ़ते रहें सोलवेदा हिंदी पर। 

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