भूलना

भूलना एक सकारात्मक अमल

वर्तमान संसार में हर इंसान को किसी न किसी प्रकार के नुकसान से सामना पड़ता है।

नुकसान का यह अनुभव एक कड़वी याद बनकर उसके ज़हन में बैठ जाता है। यह एक ऐसी समस्या है, जो हर स्त्री और हर पुरुष के साथ सामान्य रूप से पेश आती है। इस समस्या का हल क्या है। एक उर्दू शायर ने कहा:

यादे माज़ी अज़ाब है या रब

छीनले मुझ से हाफ़ज़ा मेरा

यह नुकसान के मामले का एक नकारात्मक हल है और नकारात्मक हल केवल दिल की संतुष्टि के लिए होता है, वह असल मामले का वास्तविक हल नहीं होता। इस समस्या का एक समाधान “जॉर्ज बर्नार्ड शॉ” ने बताया है। उसने कहा…. सबसे अधिक अशिक्षित इंसान वह है, जिसके पास भुलाने के लिए कुछ न हो।

नुकसान, जीवन का एक अनिवार्य अंश है। वह विभिन्न रूपों में हर एक के साथ पेश आता है। इस समस्या का हानि रहित समाधान केवल यह है कि इसको भुला दिया जाए। भुला देना इस मामले का सैक्यूलर समाधान है। इसका धार्मिक समाधान यह है कि इस प्रकार के अनुभवों को खुदा के खाने (कोष्ठक) में डाल दिया जाए।

अधिक यह कि इस दुनिया में हर चीज़ का एक सकारात्मक पक्ष होता है। नुकसान के अनुभव का सकारात्मक पक्ष यह है कि वह आदमी के सोए हुए ज़हन को जगाता है। वह आदमी की सोचने की योग्यता में वृद्धि करता है। वह आदमी को नए-नए अनुभवों से परिचित कराकर उसके बौद्धिक क्षितिज को विस्तृत करता है। कड़वा अनुभव एक शॉकिंग अनुभव बन जाए, जबकि संवेदन हीनता किसी इंसान के लिए मानसिक मौत की हैसियत रखती है।

मौलाना वहीदुद्दीन ख़ान (1925–2021), सेंटर फ़ॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी इंटरनेशनल (CPS) के संस्थापक, एक प्रतिष्ठित इस्लामी विद्वान और आध्यात्मिक चिंतक थे। उन्होंने इस्लाम, अध्यात्म और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर 200 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया।

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