भीमबेटका

पांडवों को आश्रय देने वाली गुफाएं; भीमबेटका

आदिकाल को अपने में संजोए भीमबेटका की गुफाएं इतिहास का खज़ाना हैं। यहां 30,000 साल पुरानी जानवरों और शिकार करते मनुष्यों की पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियां हैं।

महाभारत (Mahabharata) में अपने ही राज्य से 12 वर्ष के वनवास पर भेजे गए पांडव अर्थात युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव ने जंगलों में समय गुजारा था। पौराणिक कथाओं (mythology) के अनुसार इस दौरान पांडवों ने भीमबेटका (जहां भीम बैठा था) नामक स्थान पर समय गुजारा था। मध्यप्रदेश में भोपाल से 50 किलोमीटर की दूरी पर यह स्थान है, जहां स्थित ऐतिहासिक टीले को भीम के नाम से पहचाना जाता है। झरनों, पहाड़ों और वादियों से घिरे इस हरे-भरे जंगल में इस स्थान को भारतीय आर्कियोलॉजिस्ट वीएस वाकणकर ने 1958 में खोजा था। 2003 में यूनेस्को ने इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया था।

यहां अप्पर पुरापाषाण युग (पालेओलिथिक), मध्यपाषाण काल (मेसोलिथिक), चॉकोलिथिक, ताम्र पाषाण और इतिहास के आरंभ से (मध्यकालीन भारत) मीडिएवल पीरियड तक सातों युगों (सेवन पीरिएड्स) के दौरान बनाई गई कलाकृतियों को देखा जा सकता है। यहां की पेंटिंग्स को देखकर यह पता चलता है कि उस वक्त के लोग भी कैनवास का उपयोग करते थे। यहां मिले पत्थरों के औज़ार भीमबेटका की गुफाओं को आधुनिक मानव के लिए आर्कियोलॉजिकल ट्रेजर बना देते हैं।

इस नैचुरल आर्ट गैलरी में समय उस वक्त थम सा जाता है जब हम लिखित इतिहास के पहले के समय के मनुष्यों की प्रगति (प्रीहिस्टोरिक) पर नज़र डालते हैं। सिम्पल स्टिक फिगर्स से लेकर कॉम्पलेक्स आर्ट वर्क इस बात का संकेत देते हैं कि तब मानव ने कितना विकास किया था।

हालांकि वर्षों से इन गुफाओं में पानी जमा होने से कुछ चिह्न खराब हो गए हैं, लेकिन घने जंगल में पत्थरों पर उकेरी गई कला को प्राकृतिक आपदा से बचाकर रखा है। यहां की पेंटिंग्स पर बने जानवर, हथियार, मानव युद्ध की कला, समूह नृत्य और सामाजिक जीवन के दृश्य लोगों को अपनी ओर खींच लेते हैं। आरंभिक काल में मानव के पास पेंट, ब्रश और ऑयल पेस्टल्स नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने यहां पर अपने हाथों से पक्षियों के पंखों से ब्रश का निर्माण कर लकड़ियों की टहनियों और प्रॉक्यूपाइन के कांटों से पत्थरों पर अपनी कला को उकेरा था। रंगों के लिए मानव ने पत्तियों, जली हुई लकड़ियों, एनिमल फैट, सब्जी और कभी-कभी पत्थरों का भी उपयोग किया। यह गुफा इस बात का संकेत है कि मानव हमेशा से ही एक बेहतरीन कलाकार रहा है।

इस ओर जाने वाला रास्ता भी अपने आप में बहुत सुंदर है। यहां पर टीले दिखाई देते हैं जो घने जंगल और रोड के साथ-साथ चलते हैं। पहाड़ियों पर दिखने वाले जानवर की शक्ल की याद दिलाने वाले विशाल पत्थर देखे जा सकते हैं। यह विशाल पत्थर टेकड़ी पर इस प्रकार प्राकृतिक रूप से छोटे पत्थरों पर रखे हुए हैं कि वे बेहद खूबसूरत दिखाई देते हैं। अपने पौराणिक नाम और ऐतिहासिक महत्व के साथ प्राकृतिक खूबसूरती को समेटे भीमबेटका की गुफाएं हमारे समृद्ध पुरातत्व, हमारी ऊर्जावान संस्कृति और खूबसूरत प्रकृति को दर्शाती है।

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