ब्रम्हांड की रचना से जुड़ा है बसंत पंचमी का त्योहार

मां सरस्वती की पूजा को समर्पित बसंत पंचमी हिंदू धर्म मानने वालों के लिए एक प्रमुख त्योहार है। बसंत पंचमी को ज्ञान पंचमी या फिर श्री पंचमी भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मां सरस्वती का यह दिन हमारी बुद्धि,कला और विद्या को समर्पित है।

बसंत ऋतु के आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। इंसान तो क्या, पशु और पक्षी तक खुशी से सराबोर हो जाते हैं। हर दिन नई उमंगों से सुबह होती है और खुशियों से दुनिया नहा जाती है। यूं तो माघ का पूरा महीना उत्सवों से भरा हुआ है, लेकिन बसंत पंचमी इसमें से सबसे खास है। प्राचीन काल से ही इस पर्व को ज्ञान और कला की देवी, मां सरस्वती के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है।

मां सरस्वती की पूजा को समर्पित बसंत पंचमी हिंदू धर्म मानने वालों के लिए एक प्रमुख त्योहार है। बसंत पंचमी को ज्ञान पंचमी या फिर श्री पंचमी भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मां सरस्वती का यह दिन हमारी बुद्धि, कला और विद्या को समर्पित है। वहीं, हिंदू धर्म के पौराणिक कहानियों में कहा गया है कि जब भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की थी, तो इसी दौरान मां सरस्वती धरती पर प्रकट हुईं थीं। वो जिस दिन प्रकट हुई थीं, उस दिन बसंत पंचमी का दिन था, तभी से ही इस दिन पर मां सरस्वती की पूजा होती है।

तो आइए सोलवेदा हिंदी के इस आर्टिकल में हम जानते हैं कि बसंत पंचमी का महत्व क्या है। साथ ही हम यह भी जानेंगे कि ब्रम्हांड की रचना से किस तरह से जुड़ा हुआ है बसंत पंचमी का त्योहार।

कमंडल का जल छिड़कने से मां सरस्वती की उत्पति (Kamandal ka jal chhidakane se Maa Saraswati ki utpati)

भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रह्मांड की रचना करने के बाद एक बार ब्रह्माजी भ्रमण पर निकले थे, तो उन्हें सारा ब्रह्मांड मूक नज़र आया। मतलब हर ओर खामोशाी छाई हुई थी। यह स्थिति देखने के बाद उन्हें लगा कि संसार की रचना में उनसे कुछ कमी रह गई है। इसके बाद ब्रह्माजी एक जगह रुक गए और अपने कमंडल से जल (पानी) निकालकर छिड़क दिया, जिससे एक देवी प्रकट हुईं, उनके हाथों में वीणा थी। वो देवी मां सरस्वती थीं। इसके बाद से इस दिन को मां सरस्वती के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

मां सरस्वती ने मौन ब्रह्मांड को दी आवाज़ (Maa Saraswati ne maun brahmand ko di awaaz)

मां सरस्वती की उत्पति के बाद ब्रह्माजी ने उनसे कहा कि इस संसार में सभी लोग मौन हैं। इसके कारण लोगों के बीच किसी भी तरह की बातचीत नहीं है। ये लोग सिर्फ जीवन जी रहे हैं, लेकिन संवाद शून्यता के कारण ये एक-दूसरे के भाव को सही तरह से समझ नहीं पा रहे हैं। इस पर मां सरस्वती ने ब्रह्माजी से पूछा कि प्रभु मेरे लिए क्या आज्ञा है। तब ब्रह्माजी ने कहा कि देवी आप अपनी वीणा का उपयोग करते हुए इन्हें आवाज़ दें, जिससे कि ये लोग एक-दूसरे से बात कर सके और भाव समझ सकें। इसके मां सरस्वती ने सभी को आवाज़ प्रदान दी।

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की कैसे करें पूजा? (Basant Panchami par Maa Saraswati ki kaise karein puja?)

बसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती की पूजा की जाती है। इसलिए इस दिन को सरस्वती पूजा भी कहा जाता है। मां सरस्वती की पूजा करने से पहले नहा-धोकर नये कपड़े पहन लें। इसके बाद मां की प्रतिमा या तस्वीर की स्थापना कर लें। यह करने के बाद नवग्रहों की पूजा करें और फिर मां सरस्वती की उपासना करें। बसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती को सफेद कपड़े चढाएं। साथ ही खीर या फिर दूध से बने प्रसाद चढाएं।

बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का है खास महत्व (Basant Panchami ke din pile rang ka hai khas mahtv)

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य में पीला रंग प्रमुख होता है। यह भगवान विष्णु के वस्त्रों का रंग है। वहीं, पूजा-अर्चना में पीला रंग बहुत ही शुभ माना जाता है। पीला रंग खुशियों का भी प्रतीक है। इसलिए हर शुभ कार्य में पीले रंग का उपयोग किया जाता है। साथ ही धार्मिक कार्य को करते समय भी पीले कपड़े पहने जाते हैं। इसलिए ही बसंत पंचमी के अवसर पर पीले रंग का विशेष महत्व है।

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