मेरी पत्नी मेंढक है

जैसे परी कथाओं के मेंढक-राजकुमारों के साथ होता है, ये रानियां भी मेंढक से इंसान बन गईं।

विश्वभर की संस्कृतियों में मेंढक वर्षा और उर्वरता के साथ निकटता से जुड़े रहे हैं। चीन में वे फ़ेंगशुई शिल्पकृतियों में देखे जाते हैं। ऐसी ही एक शिल्पकृति जिन चानअर्थात मनी फ्रॉगकहलाती है। उसे अक्सर एक नर मेंढक के रूप में चित्रित किया जाता है, जिसकी लाल आंखें और केवल एक पिछला पैर होता है। यह मेंढक परंपरागत चीनी सिक्कों के ढेर पर मुंह में एक सिक्का पकड़े बैठा होता है। ऐसी मान्यता है कि मनी फ्रॉग सौभाग्य को आकर्षित कर दुर्भाग्य से हमारी रक्षा करता है।

लेकिन भारतीय पौराणिक कथाओं में मेंढकों की प्रमुख भूमिका न के बराबर रही है। मुझे इन कथाओं में मेंढकों के केवल दो दुर्लभ संदर्भ मिले। दोनों उदाहरण मेंढक-रानियों को लेकर हैं। जैसे परी कथाओं के मेंढक-राजकुमारों के साथ होता है, ये रानियां भी मेंढक से इंसान बन गईं।

पौराणिक कथाओं में एक कहानी मंदोदरी की है। कहते हैं कि एक बार शिव, जो भोले तपस्वी थे, ने रावण से उसकी कोई भी इच्छा पूरी करने का वादा कर दिया। आखिर वे रावण के छल से अपरिचित जो थे। यह सुनते ही रावण ने कहा, ‘मैं आपकी पत्नी से विवाह करना चाहता हूं।शिव को अपना दिया हुआ वचन पूरा करना पड़ा। शिव की पत्नी शक्ति को पता था कि रावण ने शिव के भोलेपन का लाभ उठाया है और इसलिए उन्होंने अपने पति को दोष नहीं दिया। वे समझ गईं कि उन्हें स्थिति को अपने दम पर ही सुधारना होगा। इसलिए शक्ति ने एक मेंढक को अप्सरा में बदल दिया। रावण ने अप्सरा को देखकर मान लिया कि वही पार्वती होगी। आखिर कैलाश पर्वत की बर्फ़ीली ढलानों पर शिव के साथ कौन-सी अन्य कन्या निवास करती? रावण ने कन्या को लंका ले जाकर अपनी रानी बना लिया। उसे मंदोदरी नाम दिया गया, क्योंकि वह मूलतः मंडूक थीं। रावण सोचते रहता कि मंदोदरी हमेशा वर्षा-ऋतु की शुरुआत में ही उनका ध्यान क्यों आकर्षित करती थी, जब महल के तालाब में नर मेंढक टरटराते थे।

दूसरी कहानी महान धनुर्धर अर्जुन के पोते परीक्षित से जुड़ी है। इस कहानी में परीक्षित की सुशोभना नामक बड़ी अजीब पत्नी थी। उसने परीक्षित को उससे विवाह करने की सहमति देते हुए कहा था, ‘सुनिश्चित करो कि मुझे किसी भी जलाशय को देखने का अवसर नहीं मिलेगा।परीक्षित ने मान लिया कि उसकी पत्नी पानी से डरती होगी। एक दिन जब वह आनंदित था, तब वह अपनी पत्नी को एक बगीचे में ले गया, जिसके बीच एक झील थी। झील को देखते ही सुशोभना उसमें कूद गई और फिर कभी बाहर नहीं आई। परीक्षित अनर्थ से डर गया। उसने झील को सुखाने का आदेश दिया। झील के सूखने पर भी उसे उसकी पत्नी कहीं नहीं दिखी। वहां केवल ढेर सारे मेंढक थे। उसने सोचा कि संभवतः उन मेंढकों ने उसकी पत्नी को मारकर खा लिया होगा।

सभी मेंढकों को मार डालो,’ उसने आदेश दिया। जब परीक्षित के सैनिकों ने मेंढकों को मारना शुरू किया, तभी मेंढक-राजा आयु ने परीक्षित से उन्हें रोकने के लिए कहा और उससे छिपाया हुआ रहस्य बता दिया, ‘आपकी पत्नी मेरी बेटी और एक मेंढक राजकुमारी है। जिस तरह उसने आपको लुभाकर आपका दिल तोड़ा, वैसे वह अन्य पुरुषों के साथ भी करती रही है। मैं आपसे मेंढकों की हत्या बंद करने की विनती करता हूं। यदि आप ऐसा करेंगे तो मैं अपनी बेटी को आपके पास लौटने का आदेश दूंगा। वह प्यार के क्रूर खेल खेलना बंद कर देगी और जीवनभर पत्नी की तरह आपकी सेवा करेगी।

परीक्षित मान गया और मेंढक-राजा ने अपनी बेटी को फिर से मानव रूप धारण करके अपने पति की सेवा करने को विवश किया। सुशोभना परीक्षित के साथ महल में वापस चली गई, लेकिन उन दोनों के बीच प्यार पहले जैसा नहीं रहा।

संभवतः इस तरह की कहानियों ने मेंढकों को मानवीय बनाकर बच्चों को प्रौढ़ होकर अधिक प्रकृति-प्रेमी बनाने में मदद की।

देवदत्त पटनायक पेशे से एक डॉक्टर, लीडरशिप कंसल्टेंट, मायथोलॉजिस्ट, राइटर और कम्युनिकेटर हैं। उन्होंने मिथक, धर्म, पौराणिक कथाओं और प्रबंधन के क्षेत्र मे काफी काम किया है।

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