त्योहार क्यों मनाने चाहिए

चाणक्य के विचार से हमें त्योहार क्यों मनाना चाहिए? जानें इसके कारण

एक साधारण आदमी को सिर्फ सम्मान चाहिए, चाहे वह उसके धर्म या त्योहार के प्रति ही क्यों ना हो। सम्मान दिखाने का सबसे अच्छा तरीका विभिन्न त्योहारों और समारोह में शामिल होना है।

त्योहार का दूसरा नाम जश्न होता है। त्योहार कोई भी हो, जश्न मनाना उसका एक अहम अंग है। लेकिन, कई बार ऐसा होता है कि लोग त्योहारों को जाति-धर्म, समुदायों से जोड़कर देखते हैं। इस धारणा की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि त्योहार हमें जोड़ने की बजाय, एक दूसरे से अलग कर देते हैं।

ऐसा होना किसी भी तरह से सही नहीं है। आपकी परंपरा चाहे कोई भी हो, लेकिन सभी त्योहारों की सराहना करनी चाहिए और उसमें भाग लेना चाहिए। आपका ऐसा व्यवहार अन्य संस्कृतियों के प्रति सम्मान दिखाता है और अंततः सभी को प्रेम, सम्मान और सौहार्द के रास्ते पर ले जाता है।

चाणक्य का भी ऐसा ही मानना था। अर्थशास्त्र  की पुस्तक के 13वें अध्याय में एक खंड में कहा गया है कि एक नेता या राजा जब किसी राज्य को जीत लेता है, तो उसे उस क्षेत्र की परंपराओं के अधीन व्यवहार करना चाहिए।

ऐसी स्थिति में क्या राजा को उस क्षेत्र के सभी त्योहारों का सम्मान करना चाहिए और उसमें शरीक होना चाहिए? क्या यह जानते हुए भी त्योहारों में शामिल होना चाहिए कि जिस देश को जीत लिया गया है, उसमें एक शत्रु देश भी शामिल हो रहा है। किसी अन्य मित्र देश के मामले में क्या करना चाहिए?

इसके लिए चाणक्य का मत है कि, “राजा या नेता को जीते गए देश के देवी-देवताओं का सम्मान, उनके त्योहारों, उत्सवों में और खेल-कूद में शामिल होने के साथ अपनी श्रद्धा दिखानी चाहिए।”

एक साधारण आदमी को सिर्फ सम्मान चाहिए, चाहे वह उसके धर्म या त्योहार के प्रति ही क्यों ना हो। सम्मान दिखाने का सबसे अच्छा तरीका विभिन्न त्योहारों और समारोह में शामिल होना है।

इस चाणक्य सूत्र से हम निम्नलिखित बातें सीख सकते हैं :

सभी देवताओं के प्रति भक्ति और सम्मान दिखाएं

अक्सर त्योहारों का अपना धार्मिक महत्व होता है, वे देवी-देवताओं से संबंधित होते हैं। इसी कारण से हर व्यक्ति का त्योहारों से संबंधित देवताओं से भावनात्मक जुड़ाव भी होता है। तो फिर, क्या हुआ अगर त्योहार आपके धर्म का नहीं है, आप कम से कम उस त्योहार के प्रति सम्मान और उससे संबंधित देवता के लिए श्रद्धा दिखा सकते हैं। दूसरे धर्म, संस्कृति या त्योहार का सम्मान करने से आपका कुछ नहीं बिगड़ेगा है। असल में आपका यह व्यवहार अन्य समुदायों के साथ सौहार्द और स्वीकृति का मार्ग प्रशस्त करेगा।

किसी भी नई जगह में रहने वाले लोगों का विश्वास पाने के लिए, हमें उनके स्थानीय देवताओं का सम्मान करना पड़ेगा। चाणक्य ने भी राजाओं (नेता) को इस बात का अनुसरण करने की सलाह दी है। इस क्षेत्र के स्थानीय लोगों को नेता का यह व्यवहार पसंद आएगा। चाणक्य की इस सलाह को हम अपने जीवन में भी लागू कर सकते हैं। हम अपने त्योहारों तो मनाते ही है, वहीं हमें दूसरे क्षेत्र या समुदाय के लोगों के त्योहारों में भी हिस्सा ले सकते हैं और उनकी सराहना कर सकते हैं।

त्योहार समारोह में भाग लें

त्योहार मनाने का मज़ा तब आता है, जब परिवार और दोस्त साथ में हो। किसी भी त्योहार में सिर्फ घर पर अकेले ना बैठें, बल्कि तैयार होकर बाहर जाएं… (लेकिन, कोरोना महामारी में अपना ध्यान रखें, कृपया सतर्क रहें और प्रोटोकॉल का पालन करें)। नए-नए कपड़े पहनें, अपने घर में सजावट करें और सेल्फी या फोटो ज़रूर लें। त्योहारों में खुशियां ऐसे ही बढ़ती हैं। इसलिए, खुद का त्योहार तो मनाएं ही, साथ ही दूसरों के त्योहारों में हिस्सा लेकर उनकी खुशियों में चार चांद लगा दें।

आपने देखा होगा कि सभी त्योहार किसी ना किसी भोजन से भी जुड़े रहते हैं। अब तो न सिर्फ घरों में बल्कि बाजार, होटलों और रेस्तरां में भी त्योहारों से संबंधित विशेष व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं। अगर घर पर नहीं बना सकते, तो बाहर जाएं और त्योहारों के खास व्यंजनों का लुत्फ उठाएं। लेकिन, अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रख कर। ऐसी ही छोटी-छोटी खुशियों का नाम ही तो जीवन है, इनसे न चूकें।

खेल से संबंधित मनोरंजनों का आनंद लें

त्योहारों में कई तरह की मनोरंजन गतिविधियां होती हैं, जिसमें खेल संबंधी मनोरंजन भी एक है। हमारे देश में कई मंदिर और विभिन्न राज्य सरकार त्योहारों के दौरान टूर्नामेंट का आयोजन करती हैं। उदाहरण के तौर पर, ओणम त्योहार के दौरान केरल में सर्प नौका दौड़ होती है। इसी तरह से महाराष्ट्र में गणेशोत्सव, पंजाब में बैसाखी के दौरान विभिन्न खेल संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इस तरह के खेल संबंधित मनोरंजन न सिर्फ हमारे देश के लोगों को, बल्कि अंतरराष्ट्रीय लोगों को भी आकर्षित करती हैं।

इन सबका एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि त्योहारों में देश की अर्थव्यवस्था को सहायता मिलती है। त्योहारों पर लोग अपने साथ-साथ दूसरों के लिए भी बहुत से उपहार खरीदते हैं। उपहार के लेन-देन से खुशी तो मिलती ही है, साथ ही रिश्तों में मज़बूती भी आती है।

इसलिए, कंजूसी ना करें, त्योहारों के मौसम का आनंद लें (होली भी आ रही है)। अपनी क्षमता के अनुसार दूसरों के लिए कुछ ना कुछ ज़रूर लें और मज़े की बात तो यह है कि जब हर कोई मिलकर त्योहार मनाता है, तो खुशी कई गुना बढ़ जाती है।

तो, फिर सोचिए नहीं, आइए हम त्योहार ही नहीं बल्कि अपने जीवन के हर पल का उत्सव मनाएं।

डॉ राधाकृष्णन पिल्लई एक भारतीय मैनेजमेंट थिंकर है, लेखक और आत्म-दर्शन और चाणक्य आंविक्षिकी के संस्थापक हैं। डॉ पिल्लई ने तीसरी सदी ईसा पूर्व के ग्रंथ कौटिल्य के अर्थशास्त्र पर रिसर्च की है और इसे माॉडर्न मैनेजमेंट में शामिल किया है ।

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