मिस्र का इतिहास

जीवन और उससे आगे की मिस्र की दास्तान

मिस्र का इतिहास बताता है कि उस युग के लोगों ने यह सुनिश्चित किया था कि उनके पूर्वज, मृत्यु के बाद भी एक शानदार जगह पर रह कर सकें।

नाक के रास्ते से दिमाग को निकालने के बाद शरीर के बाकी अंगों को भी अलग कर, शरीर के खाली खोखे की नमी को सुखाने के लिए उसे न्यूट्रॉन और नमक से भरकर रख देना। फिर सूखे शरीर को तेल से साफ कर पट्टियों में बांधना और एक ताबूत में रख देना। ममीफिकेशन की यह प्रक्रिया आसान नहीं थी। लेकिन मिस्र के लोगों ने इसे बखूबी अंजाम दिया।

प्राचीन मिस्र के लोग इस बात पर विश्वास करते थे कि जीवन अमर है।

इसी विश्वास की नींव पर उन्होंने मम्मी और मिस्र का पिरामिड बनवाया, ताकि आधुनिक विज्ञान उसका पता लगा सके। बारीक से बारीक चीज़ पर ध्यान देकर विशाल मिस्र का पिरामिड बनाया। मिस्र का इतिहास (History of Egypt) ही है कि उस युग के लोगों ने यह सुनिश्चित किया था कि उनके पूर्वज मृत्यु के बाद भी एक शानदार जगह पर रह सकें।

आम धारणा यह है कि प्राचीन मिस्र के लोग मृत्यु को लेकर कभी चिंतित नहीं रहते थे। वे जीवन को लेकर जुनूनी थे। उनका मानना था कि मृत्यु के बाद आत्मा लौटेगी और अपने मृत शरीर को पुन: हासिल करेगी। यही वजह है कि उन्हें सबसे ज्यादा आशावान सभ्यता के लोगों में से एक माना जाता है।

मौत ने हमेशा ही मानव जीवन को आश्चर्यचकित किया है। मानव जीवन के लंबे इतिहास के बावजूद आज भी मौत के बाद जीवन को लेकर काफी चर्चा की जाती है।

कुछ सभ्यताओं में स्वर्ग और नर्क की अवधारणा है। कुछ सभ्यताएं मानती हैं कि मृत्यु के बाद भी आत्मा जिंदा रहती है। लेकिन मिस्र का इतिहास देखें तो वहां के लोगों ने मौत को एक कला में बदल दिया था।

उनका मानना था कि ‘का’ (आत्मा के लिए मिस्र की भाषा का शब्द) शरीर को छोड़ने के बाद लौट सकती है। आत्मा के लौटने पर उसे शरीर उपलब्ध करवाने के लिए ही शरीर को मम्मी में बदलने की प्रक्रिया ने जन्म लिया।

यह प्रक्रिया शुरू में एकदम सरल थी! शुरुआती दौर में वे मृत शरीर को रेगिस्तान की रेत में दफना देते थे ताकि रेत शरीर की नमी सोख ले। किंतु उस वक्त के जंगली जानवरों से मिस्र के लोगों ने मृत शरीर को ताबूत में रखना शुरू कर दिया था। ताबूत में मौजूद नमी से कीड़े शरीर को नष्ट कर देते थे। अत: ममीफिकेशन (मिस्र मम्मी) की प्रक्रिया को ठोस बनाने में मिस्र के लोगों को सदियां लग गईं।

ममीफिकेशन (मिस्र मम्मी) की प्रक्रिया आज भी रहस्यों से भरी दिलचस्प बात है।

मिस्र का इतिहास देखें तो जीवन से मिस्र के लोगों को इतना लगाव था कि केवल शरीर को सुरक्षित रखना ही उनकी प्राथमिकता नहीं थी। बल्कि वे ऐसे मकबरे बनाते थे, जिसमें ज़िंदगी में काम आने वाले साजो-सामान और अन्य वस्तुएं रखी जा सकें ताकि मृत शरीर उसका उपयोग कर सके। इस मकबरे की दीवार पर ज़िंदगी को दर्शाने वाले चिह्न, प्रार्थना की पुस्तकों आदि चीज़ों के चित्र बनाए जाते थे।

उनका मानना था कि भगवान का नाम लेने और प्रार्थना करने से मृत शरीर में आत्मा लौट सकती है। मिस्र का इतिहास (Egypt ka Itihas) बताता है कि उनकी सभ्यता में राज परिवार और आम आदमी की मम्मी में अंतर होता था। लेकिन जीवन और मृत्यु को लेकर भावनाएं एक जैसी होती थी। 3000 से अधिक वर्षों तक मिस्रवासियों ने मृत्यु की प्रक्रिया में लिप्त होकर जीवन को संभाल कर रखा था।

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