देवदत्त पटनायक

देवदत्त पटनायक की ‘द प्रेग्नेंट किंग’ में है महाभारत की कहानी

एक दिन वल्लभी के राजा युवनाश्व ने गलती से अपनी पत्नियों के लिए रखी संतानदायक जादुई औषधि पी ली। नतीजतन उसका पूरा जीवन इस असमंजस में बीत गया कि वह खुद को पिता कहे, माता या राजा।

हाल ही में पौराणिक कथाओं में नारी सशक्तिकरण पर बातचीत के दौरान एक किताब मेरे हाथ लगी, जिसने दो वजहों से मेरा ध्यान आकर्षित किया। पहली वजह थी किताब का अलग तरह का शीर्षक और दूसरी वजह थी हिंदू महाग्रंथ महाभारत के समय की कहानी।

‘द प्रेग्नेंट किंग’ देवदत्त पटनायक की पहली काल्पनिक कहानी है। यह उस राजा की कथा है, जो महाभारत के काल में रहता था। कहानी का मुख्य पात्र वल्लभी का शासक राजा युवनाश्व और उसका परिवार अपने धर्म की लड़ाई लड़ता है। महाभारत की तरह इस लड़ाई का मूल विषय भी स्वयं के अस्तित्व, आकांक्षा और लैंगिक भूमिका के इर्द-गिर्द घूमता है।

देवदत्त पटनायक (Devdutt Pattanaik) के उपन्यास में राजा की मां शीलावती का वर्णन पाठकों को बांधे रखता है। एक बुद्धिमान, शक्तिशाली और महत्वाकांक्षी रानी, जो अपने प्रथम पुत्र के जन्म के दो महीने पहले ही विधवा हो गई थी। उसकी शादी एक ऐसे राजा से होती है, जिसकी मृत्यु पूर्व निर्धारित थी। उसके पिता ने उसका विवाह एक ऐसे राजा से करवाया, जिसकी मृत्यु पूर्व निर्धारित थी। उसके पिता को शीलावती की समझदारी और क्षमताओं का ज्ञान था। पिता से मिली धर्म की सीख और उसके पति से मिले शिकार और प्रकृति प्रेम के दम पर शीलावती अपने बेटे के बड़े होने तक बखूबी वल्लभी राज्य की बागडोर संभालती है।

देवदत्त पटनायक की इस किताब की खासियत यह है कि यह सशक्त महिला पात्रों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ती है। उस समय के सामाजिक बंधनों के बावजूद सभी महिलाएं, सशक्त और निर्णायक होती थीं। देवदत्त पटनायक ने समलैंगिकता और पुरुष की मातृ प्रवृत्ति जैसे विवादित विषयों के प्रति लगाव को लेकर मानवीय स्वभाव का बेहतरीन तरीके से सहजता के साथ चित्रण किया है।

देवदत्त पटनायक पाठकों को उस काल्पनिक दुनिया में खींच ले जाते हैं, जहां लैंगिक भूमिकाओं को लेकर तय सीमाएं धूमिल होती दिखाई देती हैं। उपन्यास उस कशमकश पर प्रकाश डालता है, जब लोग अपनी इन स्थितियों को स्वीकार करने को तैयार नहीं होते हैं।

राजा युवनाश्व इस असमंजस में रहते हैं कि उनसे क्या उम्मीद की जा रही है और वे स्वयं क्या करना चाहते हैं। यह अपने काल और सामाजिक किरदारों का सटीक वर्णन करने वाली कहानी है, जिसमें गुंथे विभिन्न पात्र पाठकों को एक पेचिदा किताब का लुत्फ उठाने पर मजबूर कर देते हैं।

यह पुस्तक कभी चौंकाती है, तो कई बार मन को मोह लेती है। ‘द प्रेग्नेंट किंग’ की अनोखी विषय-वस्तु इसे पढ़ने के लिए रोचक बनाती है।

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