क्या तुम मेरे साथ जवान होना चाहोगी?

जिंदगी की यही रीत है, हार के बाद…

73वां जन्मदिन इतना यादगार होगा, यह खुद राजेश ने भी नहीं सोचा था।

राजेश ने अपने जीवन के 73 वसंत देख लिए थे और आज 73वें जन्मदिन का केक काटने की तैयारी में था। पिछले कई सालों से वह अपना जन्मदिन अपने बच्चों और पोते-पोतियों के साथ साधारण तरीके से मनाते थे। बच्चे और पोते-पोतियां घर पर आ जाते थे। इसके बाद दोपहर को विशेष व्यंजनों के साथ परिवार की दावत हो जाती थी। इसके बाद शाम को टीवी पर कोई फिल्म लग जाती थी और पूरा परिवार साथ में उस फिल्म का लुफ्त उठाता था।

हालांकि, इस जन्मदिन (Birthday) के लिए बच्चों ने कुछ अलग ही प्लान बनाया था। राजेश से पोते-पोतियों ने पास के पार्क में चलने की ज़िद की। इस पर राजेश को थोड़ा सा शक हुआ, लेकिन, वह बच्चों की खुशी के लिए चलने को तैयार हो गए। जब राजेश अपनी पत्नी सुप्रिया के साथ पार्क के गेट पर पहुंचे, उन्हें सरप्राइज देने के लिए बच्चे वहां मौजूद थे। राजेश ने देखा कि पार्क में एक छोटा सा स्टेज बना हुआ था, जिसके सामने कुर्सियों पर करीबी दोस्त और पड़ोसी बैठे थे। राजेश ने हैरानी भरी नज़रों से अपनी पत्नी की तरफ देखा। सुप्रिया शरारती अंदाज़ में मुस्कुराई।

स्टेज की तरफ जाते हुए राजेश को सुप्रिया के साथ हुई एक बातचीत याद आ गई। राजेश ने एक दिन सुबह-सुबह अपनी पत्नी को बोला कि “विश्वास ही नहीं होता है कि हमारी शादी को 40 साल हो गए हैं। मानो कल की ही बात हो, जब हम एक-दूसरे को डेट कर रहे थे और आज हम दादा-दादी बन चुके हैं।” सुप्रिया का हाथ अपने हाथों में लेते हुए राजेश ने कहा था “सुप्रिया! हमने अपना जीवन बच्चों के लिए समर्पित कर दिया है। अब तक हम उनके लिए ही जिए हैं। आज वो सब अपने पैरों पर खड़े हैं और अपने जीवन में एक मुकाम पर हैं। तो अब हमें अपने लिए जीना चाहिए।” पति के मुंह से ये बात सुनकर सुप्रिया खुशी से झूम उठी थी। सुप्रिया को संगीत रचना में रूचि थी और वह बच्चों के कारण अपने इस शौक को बहुत पीछे छोड़ चुकी थी। उस दिन से दोनों ने अपने शौक को आगे बढ़ाया। इस तरह से उन्होंने जीवन का सुख पाया।

“राजेश… राजेश…” अतीत की सुनहरी यादों से अपने पति को वर्तमान में वापस लाते हुए सुप्रिया ने आवाज़ लगाते हुए कहा “मौका भी है और दस्तूर भी, तो क्यों ना हम और आप अपनी धुन पर अपनों को झूमने पर मजबूर करें!” सुप्रिया के इस सवाल पर राजेश ने हां में सिर हिलाया। दोनों स्टेज पर गए, लोगों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया। इसके बाद राजेश ने गिटार पर धुन छेड़ी और फिर दोनों ने मिल करजिंदगी की यही रीत है, हार के बाद ही जीत है  गाना गाया, जिसके बाद लोगों ने उनसे और ज्यादा गाना सुनने की इच्छा जाहिर की। फिर क्या था, यह सिलसिला आधे घंटे तक चलता रहा। हर गाने के बाद लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देती थी। यह सब देख कर दंपति बहुत भावुक हो गए। राजेश की निगाहें एक टक सुप्रिया की मुस्कान को निहारती रहीं। राजेश ने अपनी पत्नी को पास खींचते हुए कहा “क्या तुम मेरे साथ ज़िंदगी (Zindgi) बिताना चाहोगी?”

पहले तो सुप्रिया हैरान हुई और फिर पति को गले लगाते हुए बोली, “हां।”

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