दादाजी

दादाजी

पापा ने एक बार बताया था कि दादा जी बुआ से बहुत प्यार करते थे। वो उनकी लाडली बेटी थीं। बुआ के दादा जी के खिलाफ जाने से दादा जी को बहुत तकलीफ़ हुई थी।

मेरे दादा जी को ब्लड कैंसर था। डाक्टर ने बताया वो कुछ ही दिनों के मेहमान हैं। दादा जी अपनी जिंदगी के बचे हुए वक्त को मेरे साथ बिताना चाहते थे, इसलिए मुझे हॉस्टल से घर बुला लिया गया।

मैं हॉस्टल से घर पहुंचा और सीधा दादा जी के कमरे में चला गया। मेरी आंखों में आंसू थे, जो मैंने कमरे के बाहर ही पोंछ लिए थे। दादा जी ने जैसे ही मुझे देखा कसकर मुझे अपने गले से लगा लिया। आंसू छिपाने की लाख कोशिशों के बाद भी मेरी आंखें उनके सामने छलक गई।

“रो मत बच्चे। मुझे तो एक ना एक दिन मरना ही था ना… और इसकी वजह कैंसर बनना चाहता है, तो इसमें हर्ज ही क्या है?” कहते हुए दादा जी हंस पड़े।

उन्होंने मेरे आंसू पोंछे और फिर से अपने गले से लगाते हुए कहा “जब तक मेरी आंखें खुली हैं, तब तक नो रोना-धोना।“

दादा जी की बात सुनकर, मैंने उसी वक़्त ठान लिया कि दादाजी के पास जितना भी वक्त बचा है, मैं उन्हें खुश रखूंगा।

मैं दादा जी को खुश रखने की पूरी कोशिश करने लगा। और इसमें मेरे घर वाले भी मेरा साथ देने लगे।

हम एक ज्वाइंट फैमिली में रहते थे। पापा और चाचा जी के अलावा हमारी एक बुआ भी थी। जिनके बारे में हमारे घर में बात करना भी बंद हो चुका था। क्योंकि बहुत साल पहले बुआ ने दादा जी की मर्जी के खिलाफ जाकर शादी कर ली थी। इसलिए दादा जी ने उनसे अपने सारे रिश्ते तोड़ दिए थे।

पापा ने एक बार बताया था कि दादा जी बुआ से बहुत प्यार करते थे। वो उनकी लाडली बेटी थीं। बुआ के दादा जी के खिलाफ जाने से दादा जी को बहुत तकलीफ़ हुई थी, पर आज भी वो पापा के नाम से बुआ को हर महीने पैसे भिजवाते है, क्योंकि वो जानते हैं कि फूफा जी का कारोबार अच्छा नहीं चलता।

लेकिन बुआ को ये पता नहीं था कि पैसे उन्हें दादाजी भेजते है। दादा जी बुआ से भले ही नाराज़ हैं, पर उनसे आज भी बहुत प्यार करते हैं।

इस बात से मुझे दादा जी को खुश करने का आईडिया आया कि हम बुआ से मिलेंगे और उन्हें बताएंगे कि दादा जी उनसे कितना प्यार करते हैं। और बुआ को दादा जी से भी मिलवाएंगे ताकि उन दोनों के बीच जो भी नाराजगी है वो खत्म हो जाए।

मेरे इस प्लान में घर के बड़ों ने भी साथ दिया और हम बुआ से मिलने चले गए। बुआ हमें अपने घर देखकर बहुत खुश हुई। उन्हें हमने दादा जी की बीमारी के बारे में बताया तो वो रोने लगीं और दादाजी से मिलने के लिए बेचैन हो गयी। हमने उन्हें ये भी बताया कि अबतक दादाजी ही पैसों से उनकी मदद करते आ रहे थें।

बुआ हमारे घर आयी तो उन्हें देखकर दादाजी दंग रह गए। बुआ ने दादा जी से माफी मांगी और दादा जी ने बुआ को झट से गले लगा लिया। जैसे वो बहुत सालों से बुआ के आने का इंतजार कर रहे हों।

बाद में जब बुआ ने बताया कि, ये मेरा आईडिया था तो दादा जी ने मुझे भी गले लगा लिया।

मैं अपने दादा जी के अंतिम दिनों में उन्हें उनकी सबसे बड़ी खुशी देकर बहुत खुश था।

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