सपना सच होना

सपना सच होना

राम 10 साल के किसी भी सामान्य बच्चे की तरह ही था। उसका भाग्य उस वक्त बदल गया जब उसके पिता एक दुर्घटना का शिकार हो गए।

अपनी धुंधलाती आंखों के साथ राम उठा, लेकिन अलार्म पर स्नूज के बटन को दबाने के लिए। अंतत: जब वह उठा तो सुबह के सवा 5 बज चुके थे। वह गहरी नींद में सो रहे अपने माता-पिता और छोटे भाई को डिस्टर्ब किए बगैर बिस्तर से उठ गया। जल्दबाज़ी में तैयार होकर उसने अपनी साइकिल निकाली और शहर की ओर दूध और अखबार बांटने निकल गया।

एक साल पहले राम 10 साल के किसी भी सामान्य बच्चे की तरह ही था। वह स्कूल जाने के बाद कड़ी मेहनत से पढ़ाई कर ‘ऑफिसर’ बनने की इच्छा रखता था। लेकिन जब उसके पिता दुर्घटना का शिकार होकर कमजोर हो गए तो उसकी स्कूली शिक्षा पीछे छूट गई।

अपनी मां को परिवार का पालन-पोषण करने के लिए दो-दो काम करता देखने के बाद दुखी होते हुए राम ने तय किया था कि वह भी अपने समय का घर के लिए उपयोग करेगा। अपनी मां की नाराज़गी के बावजूद उसने स्कूल छोड़ दिया और काम करना शुरू कर दिया। वह सुबह के समय अखबार बांटने के बाद रात 8 बजे तक एक होटल में काम करता था। उसने शाम को काम से लौटने के बाद अखबार नियमित रूप से पढ़ने की आदत भी लगा ली थी।

एक दोपहर को होटल के एक ग्राहक ने राम को अखबार पढ़ते हुए देखा। उसने इशारा करते हुए उसे अपनी मेज़ पर बुलाया।

उस व्यक्ति ने जिज्ञासावश पूछा, ‘क्या तुम पढ़ना जानते हो?’।

राम ने जवाब दिया, ‘यस सर’।

उस आदमी ने राम को गौर से देखते हुए कहा, ‘फिर, तुम स्कूल जाने की बजाय यहां अपना समय क्यों बर्बाद कर रहे हो?

यह सुनकर राम के चेहरे पर आंसू छलक आए। उसने उस व्यक्ति को अपने पिता की दुर्घटना और कैसे वह अपने पिता की सर्जरी के लिए पैसे बचाने के लिए दो जगह काम कर रहा था इसकी जानकारी दी।

अपनी आंखों में उम्मीद की किरण जगाए राम ने कहा, ‘यदि मेरे पिता ठीक हो जाते हैं तो मैं वापस स्कूल जा सकता हूं’।

उस व्यक्ति ने राम को बड़े गौर से देखते हुए कहा, ‘कभी घर आ जाओ। मैं शाम को 6 बजे के बाद खाली होता हूं’। उसने अपनी जेब से विजिटिंग कार्ड और पेन निकाला और कार्ड के पीछे कुछ लिखा। फिर वह कार्ड उसे सौंपकर चल दिया। राम ने हैरानी से कार्ड पर लिखे हुए पते को देखा। यह एक घर का पता था। उसने कार्ड पलटकर देखा। उस पर लिखा था ;

डॉ. सैमुअल पिंटो, एमएससी

प्रोफेसर ऑफ बिजनेस मैथ्स

सेंट पॉल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट

फोन नंबर: 246-87-

मोबाइल: 887-65-

राम को टीचर मिल गया था। यह सपना सच होने के समान था।

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