वृद्धाश्रम

रात को कार्तिक के मम्मी पापा घर आए, तो कार्तिक ने उनके सामने एक अजीब सी ज़िद रख दी। वो कहने लगा कि मुझे दादी-दादाजी, नानी और नाना जी चाहिए।

कार्तिक नौ साल का था। उसके मम्मी पापा एक ही कंपनी में काम करते थे। उनके ऑफिस चले जाने के बाद वो अकेला रह जाता था, इसलिए उसका ध्यान रखने के लिए घर में एक नैनी रखी हुई थी।

कार्तिक अपने मम्मी पापा की इकलौता संतान था। इसलिए कार्तिक की हर इच्छा पूरी की जाती थी। कार्तिक के पास ढेर सारे खिलौने थें। पर नैनी और खिलौनों के साथ खेलते हुए वो ऊब चुका था। इसलिए एक दिन उसने मम्मी पापा से कहा कि, वो लोग उसे छोड़ कर, ऑफिस ना जाया करें और उसके साथ घर में ही रहें।

मम्मी पापा के लिए ऑफिस छोड़कर घर पर रहना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने नैनी से कहा कि वो कार्तिक को पास के ही पार्क में रोज़ घुमाने ले जाया करे।

उनका कहा मानकर नैनी कार्तिक को पास के ही एक पार्क में ले गयी। शाम का वक़्त था। पार्क में बहुत सारे लोग थे। वहां झूले लगे हुए थे, जिनपर बच्चे झूल रहे थे। कार्तिक भी उन सब बच्चों के साथ झूलने लगा।

झूलते हुए एक बच्चा अचानक ही झूले से गिर गया और रोने लगा। उसको रोता देख, उसकी दादी उसके पास आई और उसे गोद में उठाकर चुप कराने लगीं। बच्चे को चुप कराने के लिए उसकी दादी ने पार्क में ही खड़े आईसक्रीम वाले से आईसक्रीम भी दिलवा दी। बच्चा चुप हो गया।

नैनी ने भी कार्तिक के बिना मांगे ही उसे आईसक्रीम दिलवा दी।

कार्तिक बहुत देर से उस बच्चे और उसकी दादी को देख रहा था। वो बच्चा फिर से कार्तिक के बगल में आकर झूलने लगा।

“ये तुम्हारी नैनी हैं?” कार्तिक ने उस बच्चे से पूछा।

“नहीं वो मेरी दादी हैं…मुझे बहुत प्यार करती हैं।” उस बच्चे ने कहा और भागकर अपनी दादी के पास चला गया।

“दीदी, आपकी भी दादी हैं?” कार्तिक ने अपनी नैनी से पूछा।

“नहीं मेरी दादी तो अब इस दुनिया में नहीं रही। पर नानी है, और नानाजी भी।” नैनी ने बताया, फिर कार्तिक और नैनी घर आ गए।

रात को कार्तिक के मम्मी पापा घर आए, तो कार्तिक ने उनके सामने एक अजीब सी ज़िद रख दी। वो कहने लगा कि मुझे दादी-दादा जी, नानी और नाना जी चाहिए।

उसके मम्मी पापा उसकी बात सुनकर चौंक गए। नैनी ने बताया कि पार्क में बहुत से बच्चे अपने दादा-दादी के साथ आते हैं, उन्हें देखकर ही कार्तिक के मन में यह बात आई। कार्तिक की मांग गलत नहीं थी, पर पूरी भी नहीं हो सकती थी। क्योंकि चारों में से कोई भी अब इस दुनिया में नहीं था। और रही रिश्तेदारों की बात तो उसके मम्मी पापा दूसरे शहर में रहते और रिश्तेदार दूसरे शहर में थे।

मम्मी पापा ने कार्तिक को समझाने की बहुत कोशिश की, मगर वो नहीं समझा। उसने नैनी के साथ पार्क जाना भी बंद कर दिया, और हमेशा चुप-चुप और चिढ़ा हुआ रहने लगा।

कार्तिक की ऐसी हालत देखकर, उसके पापा को एक उपाय सूझी।

“चलो आज हम दादा जी, दादी, नानी और नाना जी, सबसे मिलेंगे।“ कार्तिक के पापा ने कहा।

कार्तिक बहुत खुश हुआ। फिर उसके मम्मी पापा उसे एक वृद्धाश्रम ले गए। कार्तिक को देखकर वृद्धाश्रम में मौजूद वृद्ध लोग बहुत खुश हुए। उन्हें कार्तिक के रूप में एक पोता मिल गया था और कार्तिक को दादा-दादी। कार्तिक सभी के साथ खूब खेलता रहा। फिर वो लोग रोज़ शाम को वृद्धाश्रम के लोगों से मिलने जाने लगे।

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