मल्टीटास्किंग से होने वाले नुकसान से खुद को ऐसे बचाएं

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार इंसान का मल्टीटास्कर होना उसके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। इसकी वजह से आपकी जिंदगी में तनाव बढ़ने के साथ-साथ, आपकी प्रोडक्टविटी, मोटिवेशन, और आपकी मनोदशा भी प्रभावित हो सकती है।

दुनिया में हर चीज बदल रही है। यहां तक की हमारी लाइफस्टाइल भी। इस बदलाव का हमारे जीवन पर काफी ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है। यही बदलाव इंसान को आगे बढ़ने के लिए और अलग-अलग काम करने के लिए मोटिवेट कर रहा है। मल्टीटास्किंग भी इसी बदलाव का हिस्सा है। आज के दौर में हर जगह मल्टीटास्क करने वाले लोगों की डिमांड है। वैसे तो मल्टीटास्किंग बहुत अच्छी चीज मानी जाती है, लेकिन इसका बुरा असर सेहत पर भी पड़ता है।

अलग-अलग फील्ड में मल्टीटास्कर लोगों की जरूरत को देखते हुए, हर कोई आगे बढ़ने के लिए ऐसा बनने की कोशिश कर रहा है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार इंसान का मल्टीटास्कर होना उसके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। इसकी वजह से आपकी जिंदगी में तनाव बढ़ने के साथ-साथ, आपकी प्रोडक्टविटी, मोटिवेशन, और आपकी मनोदशा भी प्रभावित हो सकती है।

एक रिसर्च के अनुसार भारत में 80 प्रतिशत लोग जॉब के दौरान तनाव से जूझ रहे हैं। वहीं, 60 प्रतिशत लोग तनाव को कम करने के लिए जॉब बदलने के मूड में हैं।

न्यूरो साइंस के अनुसार आप एक समय पर एक से ज्यादा काम पर फोकस नहीं कर सकते हैं। अगर आप फोन पर बात कर रहे हैं और साथ में ईमेल भी लिख रहे हैं, तो इसका मतलब है कि बैकग्राउंड में कुछ गलत हो रहा है। एक समय में दिमाग एक ही काम कर रहा होता है। हालांकि, दूसरा काम इसकी जगह कब ले लेता है, आपको पता नहीं चल पाता। हम इस आर्टिकल में आपको मल्टीटास्किंग से होने वाले नुकसान के साथ-साथ उससे बचाव के बारे में बताएंगे।

मल्टीटास्किंग से होने वाले नुकसान

दिमाग पर पड़ता है असर

एक रिसर्च के अनुसार मल्टीटास्कर्स के दिमाग में धीरे-धीरे ग्रे मैटर कम होता जाता है। ग्रे मैटर में बड़ी संख्या में न्यूरॉन्स मौजूद होते हैं, जो दिमाग को, इनफॉर्मेशन को प्रोसेस और रिलीज करने में मदद करते हैं। ग्रे मैटर के कम होने के कारण इच्छा शक्ति कमजोर होने लगती है, साथ ही भावनाओं पर पकड़ भी कमजोर हो जाती है। ग्रे मैटर के कम होने से भावनाओं का महसूस होना भी कम हो जाता है।

पार्टनर और परिवार के साथ संबंध पर पड़ता है असर

एक साथ कई काम करने की वजह से हम अपने लोगों को समय नहीं दे पाते हैं। इसका असर हमारे रिलेशन पर पड़ता है। किसी भी रिश्ते की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि हम उस रिश्ते को कितना समय देते हैं। लेकिन, जैसे ही हम मल्टीटास्किंग करने लगते हैं, हमारे पास खुद के लिए भी समय नहीं होता है। ऐसी स्थिति में हम किसी और को समय नहीं दे पाते हैं। इसके कारण हम परिवार से दूर होते चले जाते हैं और ज्यादा काम करने से दबाव महसूस करते हैं।

सोचने की क्षमता होती है कमजोर

हमेशा काम में बिजी रहना ठीक है, लेकिन इसकी वजह से हम कुछ और सोच नहीं पाते हैं। नई चीजों को एक्सप्लोर नहीं कर पाते हैं। इसका असर हमारे दिमाग पर पड़ता है। इससे हमारी सोचने की क्षमता कमजोर होने लगती है, क्योंकि हम न तो कुछ नया देखते हैं और न ही नया समझते हैं। जब तक हम कुछ नया देखते या समझते नहीं हैं, तब तक हम नया सोच भी नहीं सकते हैं।

फोकस नहीं कर पाते हैं

बहुत से लोगों को लगता है कि मल्टीटास्किंग करने की वजह से उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ जाएगी, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता है। इसकी वजह से हम कभी-कभी बहुत आसान काम भी नहीं कर पाते हैं। ऐसा फोकस नहीं कर पाने की वजह से होता है। जब हम एक ही समय पर अलग-अलग काम कर रहे होते हैं, तो यह हमारी एनर्जी को प्रभावित करता है।

मल्टीटास्किंग से होने वाले नुकसान से खुद को ऐसे बचाएं

दिमाग की मेमरी को छुट्टी दें

मोबाइल पर जब आप कई कमांड एक साथ देते हैं, तो वह गर्म हो जाता है, ठीक ऐसा ही दिमाग के साथ भी होता है। इससे आपकी मेमरी कम हो जाती है, जो कि सही फैसला लेने की क्षमता को भी प्रभावित करती है। इसलिए मल्टीटास्किंग से होने वाले नुकसान से खुद को बचाने के लिए दिमाग की मेमरी को छुट्टी दें। टास्क की एडवांस प्लानिंग करें और उन्हें नोट करें। इससे दिमाग पर बिना ज्यादा जोर दिए आप अधिक काम कर पाएंगे।

रोज करें प्रैक्टिस

आप यदि हर दिन प्रैक्टिस करेंगे, तो मल्टीटास्किंग में आप एक्सपर्ट बन जाएंगे। इससे काम करते समय आपको ज्यादा परेशानी नहीं होगी, साथ ही आपकी क्षमता भी बढ़ जाएगी।

ब्रेकडाउन की योजना बनाएं

मल्टी टास्कर कई बार ऐसे मौके पर फेल हो जाते हैं, जब उन्हें तुरंत कहीं ध्यान देने की जरूरत हो। इसका आसान उपाय यह है कि हर तीन से चार घंटे के बाद ब्रेक डाउन को हैंडल करने के लिए 30 मिनट का ब्रेक लें।

जरूरी काम तय करें

एक साथ कई काम करने से पहले हर उस काम की लिस्ट बनाएं, जो आप करना चाहते हैं। फिर तय करें कि सबसे जरूरी क्या है। इसके बाद देखें कि उस काम को करने की प्रक्रिया क्या है, काम में समय कितना लगेगा और क्या आप उस काम को पूरा कर पाएंगे। जैसे ही आप इस तरह से काम बांटना शुरू करेंगे, आपको काम का बोझ हल्का लगने लगेगा और आप पूरी क्षमता के साथ काम करेंगे।

काम शुरू करने से पहले गहरी सांस लें

कोई भी काम शुरू करने से पहले रुकें। सांसों पर ध्यान दें। एक मिनट के लिए अपना ध्यान अपनी सांसों पर केंद्रित करें। फिर काम शुरू करें। एक मिनट तक सांसों पर ध्यान देने से आपका ध्यान पिछले टास्क से हट जाएगा और आपकी प्रोडक्टिविटी सुधर जाएगी।

रिमांइडर लगाएं

अपने लैपटॉप पर नोट लगाएं या फिर मोबाइल में अलार्म लगाएं। इससे आपको वर्तमान में रहने में मदद मिलेगी। दिमाग से तनाव वाली बातें निकाल दें। काम पर फोकस करें। इससे आप काम पर पूरा ध्यान लगा पाएंगे।

ब्रेक लें

जब तनाव का बोझ ज्यादा हो, तो ब्रेक लें। सीट से उठ कर थोड़ा घूम लें, कॉफी पिएं, बाहर घूमें और साथियों से बात करें। इससे आप जब काम पर दोबारा बैठेंगे, तो अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर पाएंगे।

इस आर्टिकल में हमने मल्टीटास्किंग के बारे में और उससे होने वाले नुकसान के बारे में बताया, साथ ही इसके नुकसान से बचने के उपाए भी बताएं। इसी तरह के और आर्टिकल पढ़ते रहें सोलवेदा हिंदी पर। आर्टिकल कैसा लगा कमेंट करके हमें जरूर बताएं।