इंसान की शख़्सियत

अगर कोई शख़्स किसी अनुभव में ग़लत साबित होता है, उसके बाद उसे अपनी ग़लती का एहसास होता है और वह आपसे माफ़ी माँगता है, तो समझ लीजिए कि वह सही इंसान है।

एक बरतन में पानी है। उसमें से एक बूँद टपकी। अगर यह बूँद बदबूदार है, तो इसका मतलब है कि बरतन का सारा पानी बदबूदार है। पानी की एक बूँद पानी के पूरे भंडार की प्रतिनिधि है। पानी की एक बूँद जैसी है, समझ लीजिए कि सारा पानी वैसा ही होगा।

यही मामला इंसान का भी है। हर इंसान मानो पानी का एक भंडार है। इस भंडार से बार-बार उसकी बूँदें टपकती रहती हैं। इन बाहर दिखने वाली बूँदों में आप देख सकते हैं कि अंदर का इंसान कैसा होगा।

अगर आप किसी आदमी से बात करें और बातचीत के दौरान उसकी ज़ुबान से एक कड़वा बोल निकल जाए; अगर आप किसी के साथ कोई लेन-देन करें और उसमें वह कोई कमज़ोरी दिखाए; अगर आपका किसी के साथ सफ़र पर हों और सफ़र में उसकी तरफ़ से कोई बुरा बरताव सामने आए, तो यह इस बात का पक्का सबूत है कि वह आदमी अच्छा इंसान नहीं है।

इंसान एक पूरा-का-पूरा संग्रह है, जैसे बरतन का पानी एक पूरा संग्रह होता है। अगर किसी इंसान से कोई कमज़ोरी ज़ाहिर होती है, तो वह उसकी शख़्सियत की कोई अलग या अपवाद वाली घटना नहीं होगी, बल्कि वह उसकी पूरी शख़्सियत का इज़हार होगी। वह एक ऐसा अक्स होगा, जिसमें उसकी पूरी शख़्सियत झलक रही होगी। अगर कोई आदमी एक मामले में कमज़ोर साबित होता है, तो समझ लीजिए कि वह हर मामले में कमज़ोर है। एक मामले में भरोसे के लायक़ नहीं रहने के बाद एक इंसान ख़ुद को हर मामले में भरोसे के लायक़ नहीं साबित कर देता है।

इस क़ायदे में सिर्फ़ एक अपवाद है और वह है उस इंसान का, जो ख़ुद का हिसाब-किताब करता हो। जिसके अंदर अपने कर्मों का लेखा-जोखा रखने की क़ाबिलियत ज़िंदा हो। जो बार-बार अपने अंदर झाँककर देखता हो कि उसने क्या सही किया और क्या ग़लत किया। उसकी ज़ुबान ने किस मौक़े पर इंसाफ़ की बात बोली और किस मौक़े पर वह इंसाफ़ से हट गई।

अगर कोई शख़्स किसी अनुभव में ग़लत साबित होता है, उसके बाद उसे अपनी ग़लती का एहसास होता है और वह आपसे माफ़ी माँगता है, तो समझ लीजिए कि वह सही इंसान है। वह ग़लती करके उसे सुधारना जानता है, लेकिन अगर किसी का हाल यह हो कि उससे कोई ग़लत बोल या काम हो जाए, उसके बाद उसकी अंतरात्मा उसे न सताए, उसके अंदर आत्म-निरीक्षण की भावना न जागे और उसकी ज़ुबान माफ़ी माँगने के लिए न खुले, तो ऐसा इंसान बिलकुल बेकार इंसान है। वह इस लायक़ नहीं है कि उस पर किसी भी मामले में भरोसा किया जा सके।