पालतू जानवरों को ठीक करें

पालतू जानवरों को ठीक करने की वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है ज़रूरी

उपचारों के सहयोग से शारीरिक और मानसिक बीमारी-पीड़ा को दूर किया जा सकता है। सोलवेदा ने इसका उपयोग कर यह पता लगाने की कोशिश की है कि उपचार की मदद से पालतू जानवरों को ठीक कर कैसे स्वस्थ रखा जा सकता है।

जब हम बीमार या परेशान होते हैं तो हम आपस में बात करके या फिर विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर उपलब्ध उपचार पद्धति से इलाज करवाने की कोशिश करते हैं। लेकिन हमारे घरों के अभिन्न अंग बन चुके पेट्स बेचारे बोल भी नहीं सकते। अत: वे अपनी तकलीफ के बारे में कुछ नहीं कर सकते। बेबस होकर बैठने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं होता। वे तो दर्द से परेशान होने के बावजूद आंसू तक नहीं बहा सकते। हमें ही किसी वजह से यह बात पता चलती है कि हमारे प्यारे साथी को कोई बात परेशान कर रही है। इसके बाद ही हम पालतू जानवरों को ठीक करने व उनकी सहायता के लिए कुछ सोच पाते हैं। इस स्थिति में जानवरों का डॉक्टर ही हमारी पहली पसंद होता है। लेकिन जैसे हम खुद के लिए कभी किसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति का सहारा लेते हैं ठीक उसी प्रकार पालतू जानवरों को ठीक करने के लिए भी सिर्फ जानवरों के डॉक्टर के पास जाने से काम नहीं चलने वाला, बल्कि उन्हें भी विशेषज्ञ अथवा वैकल्पिक चिकित्सक के पास लेकर जाना चाहिए।

जानवरों के लिए भी उपचार की अनेक पद्धतियां हैं जैसे एक्यूपंक्चर, प्राणिक हीलिंग, मायोथेरेपी, क्रिस्टल हीलिंग, रेकी, होमियोपैथी और अन्य। इसमें मायोथेरेपी सिर्फ शारीरिक रोग पर काम करती है, जबकि उपचार के अन्य तरीकों में मरीज की आभा (ऊर्जा स्रोत) पर काम करके उसे राहत पहुंचाई जाती है। जैसे मानव का आभामंडल होता है वैसे ही जानवरों का भी होता है। अपनी किताब, ‘ऑरा एनर्जी फॉर हेल्थ, हीलिंग एंड बैलेंस’ में पारासाइकोलॉजिस्ट डॉ. जो एच स्लेट लिखते हैं कि जानवरों का आभामंडल आमतौर पर ढांचे में कम जटिल होता है लेकिन मानव आभा की तुलना में रंगों में ज्यादा गहन होता है। डॉ. स्लेट यहां रंगों की जिस गहनता की बात कर रहे हैं उसका संबंध ऊर्जा स्रोत के घनत्व के साथ है।

अनेक ऊर्जा चिकित्सकों (एनर्जी हीलर्स) का कहना है कि जानवरों का आभामंडल मानवीय आभामंडल से ज्यादा घना होता है। लेकिन मानव और जानवरों पर चिकित्सा एक जैसे सूत्र पर ही काम करती है। पालतू जानवरों को ठीक करने के लिए जब इन चिकित्सा पद्धति को उनपर लागू किया जाता है तो यह शारीरिक एवं मानसिक रोग पर काम करती है। यह पद्धति भले ही आधुनिक एलोपैथिक औषधि या बर्ताव प्रशिक्षण का स्थान नहीं ले सकती लेकिन यह निश्चित रूप से सहयोगी चिकित्सा पद्धति है जो दर्द निवारण, तनाव नियंत्रण व गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने में उपयोगी है।

सोलवेदा ने विशेषज्ञों से बात कर यह पता लगाने की कोशिश की है कि यह पर्यायी चिकित्सा पद्धति पालतू जानवरों को ठीक करने के लिए कैसे उपयोगी साबित हो सकती है।

प्राणिक हीलिंग अथवा क्वीगोंग

प्राणिक हीलिंग जिसे क्वीगोंग भी कहा जाता है एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसमें चिकित्सक, मरीज की आभा से गंदगी, बीमारी अथवा नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर उसमें नए प्राण फूंक देता है। प्राणिक हीलर सलोमी सिंह ने अपने पालतू जानवरों पर इस चिकित्सा पद्धति का एलोपैथिक औषधि के साथ-साथ सफलता के साथ उपयोग किया है। उनका कहना है कि उनकी बिल्ली रूमी तीन दिन से उल्टी कर रही थी। उसके वेटेनरी डॉक्टर ने जांच के बाद पाया कि उसके पेट में एक गोला है। डॉक्टर ने उसे एक ड्रीप लगा दी लेकिन उल्टियां फिर भी बंद नहीं हुईं। इसके बाद चौथे दिन सिंह ने उसे वैकल्पिक उपचार भी दिया। इसके बाद रूमी ने उल्टी करते हुए दो नाखूनों के टुकड़ों और झाडू की पत्तियों को बाहर फेंक दिया। इसमें खून तो नहीं निकला लेकिन इसके बाद रूमी काफी थक गई थी। इसके बाद ड्रीप ने अपना काम शुरू किया।

मायोथेरेपी

मायोथेरेपी एक मस्क्युलोस्केलेटल थेरेपी है, जिसमें मरीज़ को मांसपेशियों में जकड़न और दर्द से राहत मिलती है। वहीं शरीर के कमजोर हिस्सों में रक्त संचार बढ़ता है। यह नसों को ठीक करती है व जोड़ों को राहत पहुंचाने में उपयोगी है। इससे मांशपेशियों को ताकत मिलती है और मूवमेंट आसान हो जाता है। कुत्तों (श्वान) के मायोथेरेपिस्ट सिंधुर पंगल कहते हैं कि जानवरों पर यह काफी सरलता से काम कर जाती है। वैसे भी जानवर मनुष्यों से ज्यादा समझते हैं। यदि हम उनकी जांच करते हैं तो उन्हें पता चल जाता है कि उन्हें क्या परेशानी है। इसके इस्तेमाल के दौरान हम कोई बंधन जैसे रस्सी आदि का उपयोग नहीं करते। पालतू जानवरों को ठीक करने के लिए उनपर निगरानी रखते हुए उसकी सूचना पर ध्यान देकर इलाज करते हैं।

क्रिस्टल हीलिंग

क्रिस्टल्स के सहयोग से मरीज की ऊर्जा के ढांचे को ठीक किया जाता है। क्रिस्टल की अनूठी ऊर्जा की तरंगों से ऊर्जा के ढांचे को मिलाने का काम क्रिस्टल से निकलने वाली ऊर्जा पल्स करती है। यह पल्स फिर कोशिकाओं के स्तर पर काम करती हुई नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित कर देती है।

ऊर्जा चिकित्सक (एनर्जी हिलर) करेन रयान ने क्रिस्टल चिकित्सा पद्धति से कई पालतू जानवरों को ठीक किया है। करेन कहती हैं कि उन्होंने एक घोड़े का उपचार किया था जिसे खेल के दौरान दूसरे घोड़े ने काट लिया था। रयान ने एमेथिस्ट क्रिस्टल का उपयोग किया था और रक्त का बहना तुरंत रुक गया था। रयान ने कुछ ही क्षणों में घाव को भरते हुए भी देखा है।

होम्योपैथी

इस पद्धति में मरीज़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा दिया जाता है ताकि मरीज स्वयं बीमारियों से लड़ सके। इसमें लक्षण को दबाने की कोशिश नहीं की जाती। होम्योपैथी में शरीर को खुद से निपटने के सूत्र पर काम किया जाता है। पालतू जानवरों को ठीक करने के लिए इस चिकित्सा पद्धति से उनमें एलर्जी, त्वचा की बीमारी, लकवा, अर्थराइटिस, टिक्स, कार्डियोमेगली, गैस्ट्रिक परेशानी, इंफेक्शन को ठीक करने में आसानी होती है। डॉ. फारूक मास्टर कहते हैं कि उन्होंने एक बिल्ली का संपूर्ण लकवा ठीक किया था। उसके जानवरों के डॉक्टर ने कहा था कि उसके रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर हुआ है और वह अब कभी चल नहीं सकती। होम्योपैथी से उपचार के 15 दिन बाद वह घर में दौड़ने लगी थी। होम्योपैथी बूढ़े जानवरों को दर्द से निजात दिलवाकर उनकी ज़िंदगी को खुशहाल बना सकती है। डॉ. वेलांकन्नी सेलवन को एक ऐसा ही किस्सा याद है। वे कहते हैं कि फ्रोसटी (एक कुत्ता) को एक्युट रीनल फेलियर (एआरएफ) हुआ था और साथ में उसे इंफेक्शन की पुरानी बीमारी थी। यह कुत्ता 10-12 वर्ष का हो गया था। उसके डॉक्टर को अब कोई उम्मीद नहीं रही थी। उसने उसे मेरे पास भेज दिया। मेरे उपचार से फ्रोसटी दो साल तक बगैर किसी तकलीफ के जीवित रहा।

एक्यूपंक्चर

एक्यूपंक्चर को पालतू जानवरों को ठीक करने की चिकित्सा में दर्द प्रबंधक माना जाता है। इसके इस्तेमाल से जानवरों में रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों, नसों पर लगी चोट, लकवा, अर्थराइटिस और गंभीर किडनी की बीमारी को ठीक करने में सहायता मिलती है। वेटेरनरी एक्यूपंक्चर चिकित्सक डॉ. प्रथमेश देशमुख ने चार वर्षीय ल्हासा अप्सो (श्वान) का उपचार किया था। उसको पैरों के पिछले हिस्से में लकवा मार गया था और उसका ब्लैडर पर से नियंत्रण छूट गया था। हर्नियेटेड डिस्क की वजह से उसके स्पाइनल कॉर्ड में कम्प्रेशन आ गया था। एक्यूपंक्चर से दो माह तक उपचार के बाद वह पूरी तरह चलने लगा और अब वह सामान्य है।

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