अवसाद का इलाज

डिप्रेशन का इलाज करने के अचूक उपाय

डिप्रेशन (depression) का इलाज मुश्किल होता है और कभी-कभी दवा और मनोचिकित्सा भी इसके लिए पर्याप्त नहीं होते, लेकिन पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली (traditional medicine) डिप्रेशन के इलाज में मददगार साबित होती है।

कुछ सालों पहले तक जब भी कोई यह शिकायत करता था कि वह लगातार परेशान रहता है या फिर वह लगातार निराश रहता है, तो लोग यही कहते थे कि आप सोचते बहुत हैं। अरे! आपको कैसी चिंता? ज्यादा सोचा मत करो और सबसे क्लासिक तो होता था कि यह सभी दिमाग की उपज है। आखिरकार सहानुभूति की तलाश में अथवा एक पेशेवर मदद की तलाश में भटकते हुए वह एक ऐसी स्थिति में आ जाता था, जिसमें वह समाज में ही खुश रहने के बहाने खोजने लगता था जबकि वह भीतर से परेशान होता था।

समय बदल रहा है। अब इस तरह की फालतू सलाह नहीं दी जाती है। आज सभी जान गए हैं कि डिप्रेशन होता है और यह एक बीमारी ही है। इसके लिए मदद उपलब्ध है और केवल परम्परागत दवाइयों में ही डिप्रेशन का इलाज नहीं है, बल्कि अवसाद के इलाज के लिए सहायक और वैकल्पिक दवाइयों में भी इलाज उपलब्ध होता है। आखिरकर लोगों ने अपने और अपने प्रियजनों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना शुरू कर दिया है।

डिप्रेशन एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति सहज रूप से काम नहीं कर पाता है। आम-तौर पर व्यक्ति डिप्रेशन में दुखी होता है और उसे ऐसा लगता है, जैसे वह एक बेकार व्यक्ति है और इस कारण उसमें बेबसी और निराशा की भावना पैदा हो जाती है, डिप्रेशन कई लोगों में कई तरह से हो सकता है। इसके कुछ आम लक्षण हैं जैसे थकान, आलस्य, कम खाना या ज्यादा खाना, नींद न आना या फिर ज्यादा नींद आना, रुचि का खो जाना, बेचैनी, खालीपन की भावना, आत्महत्या के विचारों का बार-बार आना, एक ही बात दिमाग में चलते रहना, फैसले लेने और ध्यान लगाने में परेशानी होना आदि।

बेंगलुरु में क्राइस्ट विश्वविद्यालय (Christ University, Bangalore) में मनोविज्ञान के प्रोफ़ेसर डॉ. किशोर अधिकारी डिप्रेशन की अवस्था को फेनोमेनोलोजी (घटना) नामक एक शोध के तरीके से समझाते हैं। इस अवस्था की प्रक्रिया में घटनाओं और अवस्था तक पहुंचने के साधन को कारण मान लिया जाता है। जिसमें चीज़ों और घटनाओं को उसी तरह से देखा जाता है जैसा व्यक्ति के दिमाग में है या चेतना में है और वह इंसान की चेतना से अलग नहीं है।

अधिकारी कहते हैं कि एक उदास (depressed) व्यक्ति खुद के बारे में नकारात्मक विचारों से भरा होता है, उसके लिए यह दुनिया अंधेरी और बेकार जगह होती है। वह कहते हैं कि “वह खुद को एक बोझ के रूप में देखता है और उसके दिमाग में हमेशा ही नकारात्मक विचार भरे रहते हैं जो कि बार-बार उभरते रहते हैं। सबसे महत्वपूर्ण तो यह होता है कि उदास (depressed) व्यक्ति जब गुस्से में होता है तो वह खुद को ही नुकसान पहुंचाता है।”

प्रसिद्ध अमेरिकी उपन्यासकार, डेविड फ़ॉस्टर वालेस (David Foster Wallace) फांसी लगाकर आत्महत्या करने से पहले कई सालों तक लगातार अवसाद (डिप्रेशन) में रहे थे। मरने के समय उनकी उम्र केवल 46 वर्ष थी। अपनी किताब ‘इनफाइनाइटजेस्ट’ में उन्होंने अपने अवसाद (डिप्रेशन) के संघर्ष के बारे में लिखा है। “ऐसा कोई रास्ता नहीं था जिससे केट गोम्पर्ट किसी को यह समझा पाएं कि क्लिनिकल डिप्रेशन (clinical depression) क्या होता है, यहां तक कि किसी ऐसे व्यक्ति को भी नहीं जो खुद ही क्लीनिकली रूप से डिप्रेस्ड है क्योंकि जो व्यक्ति खुद ही ऐसी स्थिति में होता है, वह किसी भी जीवित व्यक्ति के साथ संवेदना नहीं जता पाता। अगर किसी इंसान को किसी कारण से असहनीय दर्द है, तो क्लिनिकली डिप्रेस्ड व्यक्ति कभी भी किसी व्यक्ति को उस दर्द से परे नहीं देख सकता है, उसे वह दर्द ही हर तरफ नज़र आता है, जो उसके शरीर में परत दर परत घुसता जा रहा है। उसे लगता है हर चीज़ समस्या का हिस्सा है और इसका कोई हल नहीं है।”

वैलेस अकेले नहीं थे। कई ऐसी हस्तियां थीं, जैसे फ्रेडरिक नीत्शे, विसेंट वैन गो, चार्ल्स डिकेंस, विंस्टन चर्चिल, अगाथा क्रिस्टी जो इस बीमारी से पीड़ित थे।

डिप्रेशन का इलाज कैसे किया जाये ये कहना बहुत कठिन है। कभी-कभी परम्परागत दवाइयां इसमें कुछ हद तक मदद करती हैं, तो कभी-कभी एंटी डिप्रेसेंट और साइकोथेरेपी (psychotherapy) भी पर्याप्त नहीं होती है। जिन लोगों का डिप्रेशन का इलाज इससे संभव नहीं है, डिप्रेशन के इलाज के लिए कई और तकनीकें भी अब उपलब्ध हैं।

वैकल्पिक चिकित्सा

वैकल्पिक इलाज (alternative treatment) ने पूरी दुनिया में हलचल पैदा कर दी है। जैसा कि नाम से ही पता चलता है, यह परम्परागत या एलोपैथिक दवाइयों का एक विकल्प है। इसमें बहुत सारे तरीकों की डिप्रेशन का इलाज होता है, जिन्हें आम-तौर पर किए जाने वाले इलाज के स्थान पर किया जा सकता है। इसमें वैकल्पिक दवाइयों जैसी ही सहायक दवाइयां होती हैं परन्तु इन दोनों में अन्तर यह होता है कि सहायक दवाइयां परम्परागत दवाइयों का विकल्प नहीं देती हैं, बल्कि वह मानक दवाइयों का साथ देती हैं। सहायक और वैकल्पिक, दवाइयों की यह जो दो तकनीकें हैं, उन्हें सीएएम के रूप में जाना जाता है।

वैकल्पिक पद्धतियां जैसे रेकी, प्राणिक हीलिंग और एक्यूपंचर शरीर के चक्रों पर उपचार करती हैं। ये चक्र हमारे शरीर के सात ऊर्जा केंद्र होते हैं और ये शरीर के विभिन्न हिस्सों में स्थापित होते हैं, यही हमारी सभी भावनाओं और मानसिक व्यवहार को नियंत्रित करते हैं।

आइए, अब हम कुछ पद्धतियों पर एक नज़र डालते हैं :

रेकी

रेकी शब्द दो जापानी शब्दों से मिलकर बना है- रे अर्थात यूनिवर्स और की माने ऊर्जा। रेकी इलाज की वह पद्धति है, जहां चिकित्सक अपने हाथों को मरीज के अंदर ऊर्जा हस्तांतरित करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। रेकी की प्रक्रिया करने वाले इस ब्रह्माण्ड से ऊर्जा लेते हैं और फिर उसे आगे भेजते हैं। रेकी करने वाले लोग इस पूरी धरती पर कहीं भी यह ऊर्जा भेज सकते हैं। प्राणिक हीलिंग, एक्यूपंचर और रेकी में विशेषता प्राप्त वैकल्पिक हीलिंग थेरेपिस्ट ऊषा रानी कहती हैं, “रेकी के इस्तेमाल से हम चक्रों को सक्रिय करते हैं और उनमें ऊर्जा प्रदान करते हैं। रेकी के पहले स्तर में हाथ को मरीज के प्रभावित हिस्से पर रखा जाता है और ऊर्जा प्रवाहित की जाती है, जबकि दूसरे स्तर में, प्रतीकों को ऊर्जा प्रवाहित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। डिप्रेशन के इलाज के लिए दूसरे स्तर की हीलिंग ज़्यादा अच्छे तरीके से काम करती हैं।”

प्राणिक हीलिंग

जापान से मास्टर चोक सुई द्वारा विकसित प्राणिक हीलिंग ऊर्जा हीलिंग का वह प्रकार है, जो बल या प्राण का प्रयोग सेहत को बेहतर करने में करती है। प्राणिक हीलिंग को काफी शक्तिशाली कहा जाता है और यह शरीर के जीवन बल को बढ़ाने के द्वारा शरीर की हीलिंग क्षमता को बढ़ाती है।

हीलर चक्र पर रंग का प्रयोग उन्हें साफ़ करने और ऊर्जा देने के लिए करते हैं। उदाहरण के लिए, मूलधार चक्र को लाल रंग से साफ किया जाता है और इसे नीले रंग से स्थापित किया जाता है। एक प्राणिक हीलर को चक्रों के भाव का पता चल जाता है, चक्रों के अधिक सक्रिय होने पर या उनमें छिद्र होने पर वह उन्हें महसूस कर सकता है। ऊषा कहती हैं, “मूलधार चक्र में छिद्र वाला व्यक्ति अवसाद (डिप्रेशन) से प्रभावित होगा और इसे केवल प्राणिक हीलिंग से ही डिप्रेशन का इलाज किया जा सकता है।”

संगीत थेरेपी

इस चिकित्सा में संगीत का इस्तेमाल डिप्रेशन के इलाज सहित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार करने के लिए किया जाता है। अलग-अलग थेरेपिस्ट अलग-अलग तरह की पद्धतियों का इस्तेमाल करते हैं। हैदराबाद के संगीत चिकित्सक राजम शंकर नाद अनुसंधान नामक प्राचीन पद्धति का प्रयोग करते हैं। इस पद्धति में सात चक्र संगीत के सात स्वरों के अनुसार होते हैं और चिकित्सक एक उचित संगीतमय सुर का इस्तेमाल एक खास चक्र को जगाने के लिए करते हैं।

शंकर इसके विषय में और खुलकर बताते हैं, “हर चक्र किसी न किसी भावना से जुड़ा हुआ है। डिप्रेशन से किसी भी मरीज़ में एक या एक से अधिक चक्र अवरोधित हो जाते हैं। डिप्रेशन का मूल कारण जानकार कोई भी यह पता लगा सकता है कि कौन–सा चक्र प्रभावित है। जैसे ही यह पता चलता है कि कौन–सा चक्र अवरोधित है, तो मैं उससे संबंधित सुर का प्रयोग मरीज़ के डिप्रेशन के इलाज के लिए करता हूं।”

एक्यूपंक्चर

सबसे पुरानी वैकल्पिक चिकित्सक पद्धति के रूप में जानी जाने वाली एक्यूपंचर सदियों से इस्तेमाल होती है। लगभग 100 ईसा पूर्व पुरानी यह एक प्रकार की चीनी औषधि है जो क्यूई नामक महत्वपूर्ण ऊर्जा, जो इंसान के शरीर में बहती है, के सिद्धांत पर कार्य करती है। जब भी इसके प्रवाह में कोई भी अवरोध आता है तो बीमारी पैदा होती है। एक्यूपंचर में ऊर्जा के प्रवाह को दोबारा स्थापित करने के लिए त्वचा में सुइयां चुभोई जाती हैं।

उषा के अनुसार एक्यूपंचर डिप्रेशन के इलाज के लिए एक मजबूत चिकित्सा पद्धति है। वह आगे कहती हैं, “रेकी और प्राणिक हीलिंग एक्यूपंचर से अधिक समय लेती हैं और यह नतीजे भी जल्दी देती हैं।”

चिकित्सा के उन उपायों के अलावा जो शरीर के चक्र पर कार्य करते हैं, कई और पद्धतियां हैं, जो अलग-अलग सिद्धांतों पर कार्य करती हैं और वह डिप्रेशन का इलाज करने में काफी असरदायक हैं।

प्रकाश थेरेपी

रोशनी या उसका अभाव, हमारे मूड को प्रभावित करता है। रोशनी के संपर्क में आने से शरीर सेरेटोनिन (serotonin) निकालता है, यह दिमाग का एक रसायन है जो मूड को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, जब काफी दिन तक बादल छाए रहें या सर्दियों के मौसम में, सेरोटोनिन का स्तर बढ़ सकता है और अवसाद (डिप्रेशन) हो सकता है। टहलने जाना या फिर धूप में जाना आपको खराब मूड से निजात दिला सकता है।

एरोमाथेरेपी

त्वचा में कुछ खुशबू डालने से या मालिश करने से आपकी नसें स्पंदित होती हैं और उनमें एक शान्ति आती है। एरोमाथेरेपी को आवश्यक तेल थेरेपी अथवा चिकित्सा भी कहते हैं, इसमें तनाव से छुटकारा पाने के लिए और नींद न आने और डिप्रेशन के इलाज के लिए पौधों की छाल, पत्तियों अथवा जड़ों से निकाले गए तेल का इस्तेमाल किया जाता है।

योग थेरेपी

योग एक ऐसा ताकतवर क्षेत्र है, जो उन सभी लोगों की सेहत सुधारता है जो इसे करते हैं। बैंकॉक में ओरिएण्टल स्पा में योगिक लाइफस्टाइल ट्रेनर नीलम खत्री कहती हैं, “मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य आपस में साथी ही नहीं होते हैं, बल्कि वह एक-दूसरे से मिले हुए भी होते हैं। शरीर और दिमाग में खुद स्वस्थ होने की बहुत बड़ी ताकत होती है और योग इस ताकत को और मजबूत करता है। प्राणायाम और आसन जैसे उत्तानासन, सेतु बंधासन और बालासन दिमाग के कार्य को बेहतर करते हैं और पूरी प्रणाली में ताज़ा ऑक्सीजन और प्राण देते हैं, जिससे आप अवसाद (डिप्रेशन) से लड़ सकते हैं।”

अवसाद (डिप्रेशन) के साथ रहना सरल नहीं है। जो इसे झेल रहे हैं वह एक ऐसे दर्द से गुज़रते हैं, जो न केवल शारीरिक है बल्कि मानसिक भी है। कई लोग जब इस पीड़ा से बाहर नहीं आ पाते हैं, तो खुद को समाप्त कर लेते हैं।

यह बहुत ज़रूरी है कि जो इसका सामना कर रहे हैं और जो इससे हर रोज़ लड़ रहे हैं उनकी मदद की जाए। उन्हें ज़िन्दगी के हर कदम पर अपना समर्थन दिया जाए।

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