क्षमा दिवस

माफ करना आपको कैसे हील कर सकता है?

अपनी गलती पर माफी मांगने के लिए हिम्मत चाहिए होती है, पर किसी और की गलती के लिए उसे माफ करना उससे भी ज़्यादा हिम्मत का काम है।

जाने अनजाने में अक्सर हम कितने लोगों का दिल दुखा देते हैं, और इस बात का एहसास होने पर हम उनसे माफी भी मांग लेते हैं। पर क्या आप जानते हैं माफी मांगने से ज़्यादा मुश्किल है, माफ करना। जी हां! अपनी गलती पर माफी मांगने के लिए हिम्मत चाहिए होती है, पर किसी और की गलती के लिए उसे क्षमा करना उससे भी ज़्यादा हिम्मत का काम है। जिसने हमारा दिल दुखाया है उसे माफ करके आगे बढ़ना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। पर किसी के दिल दुखाने के बाद उस दर्द को बार-बार याद करना भी तो सही नहीं है। उसी दर्द को बार-बार याद करके दुखी होने से बेहतर है माफ करके आगे बढ़ जाना।

क्या आपको पता है किसी को क्षमा करने से हमारे ऊपर कितने सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं? तो चलिए मैं आपको बताती हूं कि माफ करना आपको कैसे हील करता है।

क्या है माफी दिवस की खासियत? (Kya hai Maafi Divas ki khashiyat?)

क्षमा दिवस (Global Forgiveness Day) आपसी संबंधों में पैदा हुईं गलतफहमियों और दूरियों को दूर करने करने के लिए मनाया जाता है। हम सब जानते हैं कि हमारे दोस्तों, परिवार और करीबियों के बीच अक्सर किसी बात को लेकर मनमुटाव या झगड़े हो जाते हैं। छोटे सी बात पर हुए मनमुटाव दिल पर गहरी छाप छोड़ जाते हैं और रिश्तों में दूरियां आ जाती हैं।

वहीं अगर हम इन मनमुटावों को ज़्यादा लम्बा न खींच कर जल्द ही एक-दूसरे को माफ कर दें, तो चीज़ें बेहतर हो जाती हैं। रिश्तों के इन्हीं आपसी मनमुटावों को भूलाकर एक-दूसरे को माफ करना सिखाने के लिए हर साल ग्लोबल फोरगिवनेश डे यानी विश्व माफी दिवस मनाया जाता है।

इस दिन को मनाने की शुरुआत 1990 के दशक में हो चुकी थी। फिर धीरे-धीरे इस दिन का हर साल महत्व बढ़ा लोग इस दिन की खासियत को अपनाकर एक-दूसरे को माफ करना, अपनाने लगे। माफ कर देना हमारे बहुत से गुणों में से एक है, जो न केवल बेहतर इंसान बनाता है, बल्कि हमारे रिश्तों में प्यार बढ़ाता है।

कब है ग्लोबल फोरगिबनेश डे? (Kab hai Global Forgiveness Day?)

हर साल 7 जुलाई को ग्लोबल फोरगिबनेश डे या माफी दिवस मनाया जाता है।

माफ करने से हम कैसे होते हैं हील? (Maaf karne se hum kaise hote hain heal?) 

माफ या क्षमा करना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता, पर एक बेहतर जीवन जीने के लिए हमें इसे आसान बनाना होगा। आपने वो कहावत तो ज़रूर सुनी होगी कि अगर हम किसी रस्सी को कसकर पकड़े रखते हैं तो उससे हमारे ही हाथ घायल होते हैं, और जब हम उस रस्सी को छोड़ देते हैं, तो हमारे हाथ रस्सी के भार से आज़ाद और हल्का महसूस करते हैं। ठीक वैसे ही हम पर माफ करने की क्रिया काम करती है। हम रस्सी की तरह ही अपने मन में मनमुटावों को कस कर पकड़े रहते हैं, और खुद को घायल करते रहते हैं, जबकि हमें मनमुटाव रूपी उस रस्सी को छोड़ देने की ज़रूरत होती है, और माफ करके खुद को उस भार से मुक्त कर देने की ज़रूरत होती है।

जब हम किसी को माफ करते हैं, तो इसके सकारात्मक प्रभाव हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य (Mental wellbeing) पर पड़ते हैं। रिसर्च की मानें तो जो लोग जल्द ही माफ नहीं कर पाते वे अक्सर अवसाद, चिंता और चिड़चिड़ेपन से घिरे रहते हैं। वहीं जो लोग जल्द ही दूसरों को माफ कर देते हैं, वे खुशनुमा और दिलदार किस्म के होते हैं। साथ ही, माफ करने से हम हृदय की बीमारियों से दूर रहते हैं और माइग्रेन, हाई ब्लडप्रेशर जैसी समस्याएं भी नहीं होतीं। क्षमा करना हमारे चारों तरफ एक सकारात्मक चक्र बना देता, जिससे हम हल्का और शांत महसूस करते हैं।

तो देखा आपने, हमारे स्वास्थ्य के लिए क्षमा करना कितना ज़रूरी है? तो चलिए इस माफी दिवस पर हम भी कुछ पुराने मनमुटावों को भूला दें और सभी को क्षमा करना सीख लें।

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