जीवन में कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब दुख हमारे अंदर घर कर लेता है। यह दुख कुछ दिनों तक ही नहीं, बल्कि महीनों तक बना रहता है। बाहर से हम ठीक दिखते हैं, लेकिन अंदर का बोझ हमें धीरे-धीरे तोड़ रहा होता है। हैरानी की बात यह है कि यह सिर्फ हमारे मूड को ही नहीं बिगाड़ता, बल्कि हमारी याददाश्त पर भी गंभीर असर डालता है।
आपने भी कभी न कभी महसूस किया होगा कि जब हम बहुत ज़्यादा परेशान होते हैं, तो छोटी-छोटी बातें भी याद नहीं रहतीं जैसे कोई तारीख, कोई ज़रूरी काम, किसी दोस्त की बात, सब कुछ जैसे दिमाग से फिसलता जाता है। ऐसा केवल इसलिए नहीं होता कि हमारा ध्यान कहीं और होता है, बल्कि इसलिए भी होता है क्योंकि गहरा दुख दिमाग की उस क्षमता को धीमा कर देता है जो यादों को स्टोर और प्रोसेस करती है।
तो चलिए, सोलवेदा हिंदी के इस आर्टिकल में जानें कि आखिर यादाश्त कमजोर होना (Memory Loss) स्वास्थ्य पर कैसे डालता है।
दुख और दिमाग का सीधा कनेक्शन
जब आप लंबे समय तक दुख में रहते हैं, तो दिमाग में लगातार तनाव वाले हार्मोन रिलीज होते रहते हैं। यह हार्मोन शुरू में नुकसान नहीं करता, लेकिन जब लंबे समय तक शरीर में बना रहता है, तो हिप्पोकैम्पस (hippocampus) नाम के दिमाग के हिस्से को प्रभावित करता है। यही वह हिस्सा है जो आपकी मेमोरी को संभालता है। इसी वजह से कई लोग गहरे दुख में धीरे-धीरे महसूस करने लगते हैं कि उनकी याददाश्त कमजोर हो रही है।
नींद पर असर और याददाश्त पर भी प्रभाव
गहरा दुख अक्सर नींद को सबसे ज़्यादा प्रभावित करता है। जब रातभर विचारों का तूफ़ान चलता रहता है, तो नींद पूरी नहीं हो पाती। नींद पूरी न होना, याददाश्त कमजोर होने की एक बड़ी वजह है। वैज्ञानिक मानते हैं कि दिमाग नींद के दौरान ही जानकारी को व्यवस्थित करता है, मतलब दिनभर की चीज़ें मेमोरी में तब्दील होती हैं। लेकिन जब नींद ठीक से पूरी नहीं होती, तो दिमाग यह काम भी ठीक से नहीं कर पाता।
लगातार सोचते रहने की आदत भी है बड़ा कारण
गहरे दुख में रहने वाला इंसान अक्सर हर बात को बार-बार सोचता है। वही बातें, वही यादें, वही परेशानियां बार-बार दिमाग पर नकारात्मक असर डालती हैं। यह ओवरथिंकिंग दिमाग को इतना थका देती है कि वह ज़रूरी जानकारी भी स्टोर नहीं कर पाता। किसी दर्दनाक घटना के बाद आप छोटी-छोटी चीज़ें भी भूलने लगते हैं, जैसे चाबियां कहां रखीं हैं, किससे क्या बात हुई या कोई ज़रूरी तारीख। यह सब इस बात के संकेत हैं कि याददाश्त कमजोर होने लगी है।
भूख कम लगना और पोषण की कमी
दुख का असर सिर्फ दिमाग पर नहीं, बल्कि शरीर पर भी पड़ता है। कई लोग गम में खाना कम कर देते हैं या उन्हें खाना खाने का मन ही नहीं करता। लेकिन जब शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो दिमाग को भी ज़रूरी विटामिन और मिनरल्स नहीं मिलते। इसका सीधा असर आपकी मेमोरी पर पड़ता है और याददाश्त कमजोर होने लगती है।
दिमाग की प्रोसेसिंग का स्लो हो जाना
दुख इंसान की मानसिक गति को धीमा कर देता है, यानी दिमाग किसी जानकारी को प्रोसेस करने में ज़्यादा समय लेने लगता है। जब प्रोसेसिंग धीमी होती है, तो मेमोरी पर भी असर पड़ता है। इस दौरान लोग अक्सर कहते हैं—“दिमाग चल ही नहीं रहा… कुछ याद नहीं रह रहा… फोकस नहीं हो रहा।” ये सभी लक्षण संकेत हैं कि दुख के कारण आपकी याददाश्त कमजोर हो रही है।
आत्मविश्वास कम होना भी मेमोरी के लिए खतरा
गहरे दुख में इंसान खुद पर शक करने लगता है। यह लगातार होने वाला सेल्फ-डाउट दिमाग पर अतिरिक्त दबाव डालता है, और यह दबाव याददाश्त को और कमजोर कर देता है। जब आत्मविश्वास गिरता है, तो दिमाग नई जानकारी को ग्रहण करने से पहले ही हिचकने लगता है।
सोशल लाइफ से दूरी और उसका असर
जब इंसान दुख में होता है, तो कई बार समाज, दोस्तों या परिवार से दूरी बना लेता है। कम बातचीत, कम हंसी-मज़ाक और कम एक्टिविटी, ये सभी दिमाग को सुस्त बनाते हैं। रिसर्च के अनुसार जिन लोगों की सोशल एक्टिविटी कम होती है, उनमें याददाश्त कमजोर होने की संभावना ज़्यादा बढ़ जाती है। बातचीत दिमाग को एक्टिव रखती है, नई बातें सिखाती है और उसे बेहतर तरीके से अपडेट करती रहती है।
इस आर्टिकल में हमने बताया कि याददाश्त कमजोर होना गहरे दुख के कारण हो सकता है। यह जानकारी आपको कैसी लगी, हमें कमेंट करके ज़रूर बताएं। इसी तरह की और उपयोगी जानकारियों के लिए पढ़ते रहें सोलवेदा हिंदी।
