क्षमा करना

क्षमा करने से मिलती है शांति

क्षमा करना सभी रिश्तों के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करता है। यह हमें दूसरों के प्रति उम्मीद से मुक्त करता है।

इंसान का व्यवहार जटिल हो सकता है। जब कुछ अधूरा छूट जाता है, तो दुख, गुस्सा, कुंठा और निराशा होती है। हमारी आदत है कि हम घृणा को संजोकर रखते हैं। हम इस बात पर बहस कर सकते हैं कि ‘‘हम और क्या करें, जब कोई हद की सीमा पार करे और हमें दुख पहुंचाए?’’

जब मेरी दादी ज़िंदगी का आखिरी दिन गिन रही थी, तो उनसे मिलने जाना मेरे लिए सबक के समान था। उनके शब्द आज भी कानों में गूंजते हैं ‘‘यह तकलीफ मुझे कहीं न ले जा सकी। तुम्हारी चाची के प्रति मेरी घृणा से मैंने खुद को ही प्रताड़ित किया। मुझे उसे बहुत पहले क्षमा कर देना चाहिए था। “उनके संबंध मेरी दादी के साथ तभी से खराब हो गये थे, जब एक बार उन्होंने दादी को पैसे देने से मना कर दिया था। उन्होंने यह बात स्पष्ट कर दी थी कि उनकी यह कड़वाहट उन्हें धीरे-धीरे मौत के करीब ले आई थी।

मेरी दादी के अंतिम संदेश के बारे में सोचते हुए मुझे एक विचार देखने को मिला, जो उनके विचारों से मिलता था ‘‘औरों को माफ कर देना चाहिए। इसलिए नहीं कि वे माफी के लायक होते हैं, बल्कि इसलिए कि आपको शांति चाहिए।’’ गौतम बुद्ध ने भी अपने अनुयायियों को यही शिक्षा दी थी। सीधे शब्दों में कहें तो, दूसरों के साथ सहानुभूति रखना और उन्हें क्षमा करना (Pardon) हमें शांति दिला सकती है।

क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर किशोर अधिकारी भी इस बात पर सहमति जताते हैं। वे कहते हैं ‘‘द्वेष को दबाने से मानसिक परिस्थिति में ज्यादा बदलाव, संबंधों में तनाव, यहां तक कि डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।’’ वे कहते हैं कि माफ कर देने से सकारात्मक विचार उत्पन्न होता है, जो हमारे शरीर तथा वातावरण में चलते रहता है।

ऐसा नहीं है कि माफ करना (Maaf karna) केवल हमारे मस्तिष्क को ही लाभ पहुंचाता है। रिसर्च में यह सिद्ध हो चुका है कि संतुलित भावना से लंबी बीमारियों की संभावना भी कम होती है। फ्रंटियर्स इन ह्यूमन न्यूरोसाइंस द्वारा 2013 में प्रकाशित रिसर्च में उनलोगों के एमआरआई स्कैन शामिल हैं, जो माफी के बारे में सोचते हैं। इसमें पाया गया कि माफी में शामिल विचार प्रक्रिया मस्तिष्क की कोशिकाओं को सहानुभूति और भावनाओं के लिए सक्रिय करता है।

इन शोधों की सच्चाई मैंने व्यक्तिगत स्तर पर महसूस की है। मुझे आज भी याद है, जब खेलते हुए मुझसे मेरी मां का इटैलियन डिनर सेट टूट गया था। वह एकदम नया था और मेरे पिताजी द्वारा दिया गया उपहार भी था। यह जानते हुए कि यह मेरी मां के लिए बहुत कीमती है, मुझे पूरी आशा थी कि वे मुझे बहुत डांटेंगी। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। ‘‘कोई बात नहीं, लेकिन अगली बार ध्यान रखना’’ बस उन्होंने इतना ही कहा। इससे मुझ पर दो प्रभाव पड़े। पहला, मैंने अपने आपको क्षमा कर दिया और यह समझा कि मुझ पर अगली बार के लिए विश्वास किया गया है। दूसरा, यह कि मैं उस दिन से और भी ज्यादा ज़िम्मेदार हो गई।

मेरी मां द्वारा मुझे क्षमा करना मुझे सिखाया कि कोई गलती कर देने का मतलब यह नहीं होता कि सारे रास्ते बंद हो गए हैं। क्षमा करना उनका सहज स्वभाव था। लेकिन मेरी दादी ऐसा नहीं कर पाई। यहां तक कि वे इस बात की आशा करती थीं कि मेरी चाची उनसे माफी मांगे, जो कि उनके लिए घातक सिद्ध हुआ। अगर उन्होंने बिना किसी शर्त के उन्हें माफ कर दिया होता, तो शायद इससे उनके जीवन में बहुत फर्क पड़ा होता।

क्या हम अब भी यह पूछ रहें हैं कि ‘‘हम क्या करें?’’ तो इसका उत्तर एकदम सीधा है। क्षमा करना चाहिए। हां यह सच है कि यह कहना आसान है और करना कठिन है। लेकिन एक बार क्षमा करने से हमें शांति मिलती है। क्षमा करना सभी संबंधों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करता है और हमें उन अपेक्षाओं से मुक्त करता है। इसका एक लाभ यह होता है कि हम एक बेहतर इंसान बन सकते हैं।

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