रुचियां, चॉइस

आपकी रुचियां आपका भाग्य निर्धारित करती हैं

हम जीवन में जो करना चाहते हैं, उसे चुनने के लिए हम हमेशा स्वतंत्र होते हैं और हमारा भाग्य इन्हीं विकल्पों पर आधारित होता है।

कुछ अटपटा लग रहा है। नहीं, शायद, सब कुछ अटपटा लग रहा है। चीज़ें योजना के अनुसार नहीं हो रही हैं। आपको वह नौकरी नहीं मिली, जिसके लिए शायद आप बने थे; आप अपने रिश्तों में समस्याओं का सामना कर रहे हैं और आप पर अचानक बीमारियों का आक्रमण हो गया है।

आपको अंदर से लग रहा है कि सब कुछ बिखर रहा है और इसमें आपकी कोई गलती भी नहीं है। धीरे-धीरे आप नकारात्मकता (Negativity) के दलदल में धंसते चले जा रहे हैं, आप अपने साथियों से अपनी स्थिति के बारे में चर्चा करते हैं, जो आपको सुझाव देते हैं कि आपके ग्रह-नक्षत्र ठीक नहीं हैं। आप सोच में पड़ जाते हैं। मेरी किस्मत में क्या लिखा है? क्या यह हमेशा ही ऐसा रहेगा? भविष्य की कोख में मेरे लिए क्या है?

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारा आज कितना सुंदर या खराब है, हम विकल्प के तौर पर हमेशा कल की झलक पाने के लिए सहज जिज्ञासा से प्रेरित होते हैं। विकल्प की बात करें तो मानव मन यह जानने के लिए तरसता है कि अज्ञात भविष्य (Future) क्या है। इस जिज्ञासा को शांत करने के लिए मनुष्य ने भविष्य में झांकने का विकल्प खोजे। लेकिन क्या वाकई में ऐसा कुछ है जो आपको भविष्य को देखने में मदद कर सकता है? इस सवाल और कई अन्य सवालों के जवाब भविष्य वक्ताओं की दुनिया में हैं।

सहस्राब्दियों से आदमी भाग्य बताने का काम कर रहे हैं। इतिहासकारों के अनुसार यह प्रागैतिहासिक काल से हो रहा है। खानाबदोश और घुमंतुओं से जुड़े होने और मिस्र निवासियों और चीनियों द्वारा 4000 ईसा पूर्व में इसका प्रयोग किए जाने के कारण ऐसा कहा जाता है कि इसकी जड़ें लोककथाओं में हैं। भाग्य बताने के सैकड़ों विकल्प में से, लोकप्रिय विधाओं में ज्योतिष, टैरोमेन्सी (कार्ड), हस्तरेखा विज्ञान, अंक ज्योतिष, तोता ज्योतिष, चेहरा पढ़ना, फेंग शुई और क्लैरवॉयेंस शामिल हैं।

ज्योतिष खगोलीय पिंडों की गतिविधियों का अध्ययन भाग्य बताने के सबसे प्रचलित विकल्प में से एक है। इस्कॉन चौपाटी के उपाध्यक्ष गौर गोपाल दास (Gaur Gopal Das) के अनुसार ज्योतिष (Astrology) एक प्रमाणिक विज्ञान है, जिसे वैदिक साहित्य (Vedic literature) में ज्योतिष शास्त्र के रूप में जाना जाता है। व्यापक रूप से यह माना जाता है कि आकाशीय पिंडों की गति का मानव कार्यों पर प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष भी मानव मामलों पर इन पिंडों के प्रभाव की व्याख्या करने का प्रयास करता है। दास बताते हैं, “ज्योतिष विशुद्ध रूप से गणितीय गणनाओं पर आधारित है। ये मूल रूप से सख्याएं हैं इसलिए गणनाएं समान हैं, मात्र संख्याओं की व्याख्या करने के विकल्प में अंतर है, यह मुख्य रूप से व्याख्या करने वाले व्यक्ति के अनुभव, विशेषज्ञता और समझ पर निर्भर करता है।” उदाहरण के लिए, शेयर बाजार में निवेश के मामले में, आंकड़े तो एक होते हैं लेकिन पूर्वानुमान स्टॉकब्रोकर के मूल्यांकन पर आधारित है। एक कह सकता है कि स्टॉक ऊपर होगा, दूसरा विकल्प सुझा सकता है कि यह मध्यम है और किसी योग्य नहीं है। यहां पर स्टॉकब्रोकर की समझ और विशेषज्ञता पर सब कुछ निर्भर होता है।

कुछ लोग इस प्रथा को छद्म विज्ञान कह कर निरस्त करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का तर्क है कि यह विज्ञान-सम्मत है। ज्योतिष शिक्षक और बेंगलुरू स्थित भारतीय ज्योतिष संस्थान के महासचिव नागराज शर्मा कहते हैं, “कोई भी विज्ञान के सहयोग के बिना ग्रहों की चाल की भविष्यवाणी नहीं कर सकता है। ज्योतिष में दो महत्वपूर्ण कारक हैं- भाग्य और स्वतंत्र इच्छा। हर किसी को हमेशा यह चुनने की स्वतंत्रता होती है कि वह क्या करना चाहता है और उसका भाग्य इन्हीं विकल्पों पर आधारित होता है। हम केवल प्रमुख घटनाओं की भविष्यवाणी कर सकते हैं और दर्द को कम करने और खुशी को अधिकतम करने के लिए सुधारात्मक उपाय सुझा सकते हैं।”

दास कहते हैं कि ज्योतिषीय भविष्यवाणियां कर्म पर आधारित होती हैं। “वे कर्म से परे कुछ भी भविष्यवाणी नहीं कर सकते। वे थोड़ा-बहुत रोडमैप की तरह हैं। उदाहरण के लिए, आपके पास एक रोड मैप है और जीपीआरएस आपका मार्गदर्शन करता है। लेकिन जब तक आप ड्राइव नहीं करते, तब तक आप गंतव्य तक नहीं पहुंच सकते।”

लेकिन मनुष्य केवल संभावनाओं से संतुष्ट नहीं है। हम जानना चाहते हैं कि इन संभावनाओं में क्या निहित है। यह पूछने पर कि भविष्य को जानने के लिए क्या चीज़ मनुष्य को प्रेरित करती है, दास कहते हैं- आनंद और सुरक्षा। वह कहते हैं, “अगर कोई एक प्राथमिक भावना है जो विश्व को प्रेरित करती है तो वह आनंद है। आप लोगों से पूछें कि वे सुरक्षा क्यों चाहते हैं, तो उत्तर स्पष्ट है प्रसन्न रहने के लिए।”

यदि हमारे द्वारा अपना भविष्य जानने का कारण प्राथमिक रूप से प्रसन्न रहने की इच्छा है, तो जिज्ञासा भी भविष्य जानने का ही एक और कारण है। टैरो कार्ड रीडर और न्यूमरोलॉजिस्ट शीला एम. बजाज कहती हैं, अस्पष्ट और अज्ञात होने के कारण मनुष्य में भविष्य के प्रति कौतूहल होता है। भविष्य को नियंत्रित रखने और उसके लिए तैयार रहने की सोच ने ही उसे आने वाले कल को जानने के लिए प्रेरित किया है।

एक और प्रासंगिक विचार जो इस चर्चा में उभरता है वह है अपनी रुचियों के चुनाव की शक्ति। हमारी रुचियां हमें बनाती या बिगाड़ती है। स्टारवॉर्स में डार्थ वाडर की अशुभ घोषणा इसी परिप्रेक्ष्य में है, “आपकी रुचियां आपके भाग्य को परिभाषित करती है।” इस पर दास कहते हैं, “जो कुछ भी होने जा रहा है वह होकर ही रहेगा चाहे आप इससे अवगत हो या नहीं। आज हम बेहतर विकल्प क्यों नहीं बना सकते जिससे कि हमारे कल बेहतर हों? विकल्प के उदाहरण के लिए, जब हम उड़ान भरते हैं तो टेक-ऑफ, लैंडिंग और वायु विक्षोभ हमारे नियंत्रण में नहीं होता है। लेकिन हमारे नियंत्रण में यह है कि हम हवाई जहाज़ पर अपना समय कैसे बिताते हैं। इसी तरह, जीवन, मृत्यु और विक्षोभ (समस्याएं) हमारे नियंत्रण में नहीं हैं, लेकिन हम निश्चित रूप से जीवन की यात्रा में कुछ बदल सकते हैं और यही हमारी रुचि है। उन्हें हम बनाते हैं।”

शीला भी पसंद की शक्ति में विश्वास रखती है। “वास्तव में, आपकी पसंद-रुचियां आपकी वास्तविकता का निर्माण करती है। यदि आप शक्तिशाली विकल्प चुनते हैं तो आप अपना भाग्य बदल सकते हैं। अगर सब कुछ भाग्य ही है, तो आप घर बैठिए और कुछ मत कीजिए,” वे हंसते हुए कहती हैं।

दास के अनुसार, “भाग्य एक प्रभाव है जो किसी कारणवश आया है। इसका कारण इस जीवन से नहीं, बल्कि आपके पिछले जन्म से हो सकता है। सभी कहते हैं कि मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता है। हम स्थितियों को नहीं बदल सकते, लेकिन हम निश्चित रूप से इन स्थितियों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया को तो बदल ही सकते हैं।”

कई विचारधाराएं और उनके विचार सभी एक निष्कर्ष पर पहुंचते प्रतीत होते हैं। आपका चयन और कार्य ही मायने रखता है। भाग्य गतिशील है और आपके चुनाव इसे तय करते हैं। अच्छा और बुरा समय उन सुखों और दुखों की तरह है जो मनुष्य के जीवन में आते रहते हैं। कुछ दिन परिपूर्ण हैं, जबकि कुछ नहीं हैं। अगर कुछ होना है तो हो जाएगा, चाहे कुछ भी हो। अगर हम यह जानना चाहते हैं कि भविष्य में क्या कुछ होगा तो वह हो भी सकता है या नहीं भी। लेकिन चाहे जो भी हो भविष्य अबूझ, अविजित क्षेत्र तो बना ही रहेगा।

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