क्या जीवन आपके लिए एक कॉम्पिटिशन है?

प्रतिस्पर्धा करने की आपकी नेचर, आदत बन जाती है। दूसरों से आगे रहने की कोशिश में आप अपनी अवेयरनेस को खो सकते हैं और अनजाने में ही सही, हर समय भय, तनाव और चिंता में रह सकते हैं।

कॉम्पिटिशन का मतलब हममें से कौन बेहतर है, कौन नंबर वन है? क्या आप जानते हैं कि, दूसरों से बेहतर बनने की चाहत, एक कभी न ख़त्म होने वाली रेस है। इस रेस में शामिल होने से हमारी प्रेम, देखभाल और सहयोग करने की एनर्जी ब्लॉक होने लगती है।

हममें से ज्यादातर लोग यह मानते हुए बड़े हुए हैं या फिर कंडीशन्ड हैं कि, जीवन एक प्रतिस्पर्धा यानि कॉम्पिटिशन है।

आइए इसको और बारीकी से समझें:,

प्रतिस्पर्धा केवल आपकी प्रोफेशनल लाइफ तक ही सीमित नहीं है। आप अपने परिवार में रहकर भी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं – जैसे कि, कौन अधिक प्यार करता है, कौन घर की बेहतर देखभाल करता है या कौन अधिक कमाता है इत्यादि।

प्रतिस्पर्धा करने की आपकी नेचर, आदत बन जाती है। दूसरों से आगे रहने की कोशिश में आप अपनी अवेयरनेस को खो सकते हैं और अनजाने में ही सही, हर समय भय, तनाव और चिंता में रह सकते हैं।

जब आप किसी से प्रतिस्पर्धा करते हैं तो यह नुकसानदायक होता है। हो सकता है कि, आप या तो अपनी पूरी क्षमता का उपयोग ही न करें और दूसरे व्यक्ति से आगे रहने में ही खुश रहें। या हो सकता है कि, आप अपनी क्षमता से कहीं अधिक काम करने लगें और तनावग्रस्त हो जाएं। ऐसे में,

आपका निर्धारित लक्ष्य कि अपना सर्वश्रेष्ठ वर्जन बनने के बजाय, दूसरों से बेहतर बनना हो जाता है।

कॉम्पिटिशन के बजाय कोऑपरेशन (सहयोग) को अपने जीवन का उद्देश्य बनाएं। आप एक दूसरे के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि एक दूसरे के साथ हैं। और ना ही आप किसी दौड़ में हैं बल्कि आप इस यात्रा में साथ हैं। आप जो जानते हैं उसे शेयर करेंगे और आगे बढ़ते हुए, दूसरों को भी साथ लेते जाएंगे।