खुशी को तलाशें नहीं, क्रिएट करें

सच्चाई तो ये है कि, हम जहां हैं वहां ही खुशी को क्रिएट कर सकते हैं। ये हमेशा से हमारे साथ और हमारे अंदर ही है।

हममें से कई लोग खुशी जैसे सुंदर इमोशन को मुश्किल बना देते हैं और फिर ये हमें एक टेंपररी भावना लगती है। हम सभी का यह मानना है कि, जीवन में रुपया पैसा, खान पान, कार, सम्पत्ति या पद कमाने के लिए हमें कर्म करने पड़ते हैं। इसके साथ ही, खुशी कमाने के लिए भी हम यही फार्मूला लगाने लगते हैं कि हमें इसे पाने के लिए भी कुछ करने की जरूरत होती है। इसलिए, या तो हम इसका इंतज़ार करते हैं, इसे तलाशते हैं, इसके पीछे भागते हैं, इसे खरीदने की कोशिश करते हैं, दूसरों से इसकी मांग करते हैं, इसे टालते हैं या फिर इसे किसी न किसी एचीवमेंट से जोड़ देते हैं।

इसलिए एक समाज के रूप में, आज हम सफल और अमीर तो हो गए, पर सच्ची खुशी गुम हो गई है। सच्चाई तो ये है कि, हम जहां हैं वहां ही खुशी को क्रिएट कर सकते हैं। ये हमेशा से हमारे साथ और हमारे अंदर ही है। इसके लिए हमें कुछ करने की आवश्यकता नहीं है, बस हमें हर पल खुश रहने की आदत डालने की आवश्यकता है।

आइए जानें कि, क्या हम सदा के लिए खुश रह सकते हैं? खुश रहना हमारी अपनी चॉइस है। खुश रहने का अर्थ ये नहीं है कि, किसी सिचुएशन या फिर हमारे संबंधों द्वारा जो भी नेगेटिविटी हमारे पास आ रही है हम उसे इग्नोर करें। बल्कि ऐसे समय में हमें ये याद रखना चाहिए कि, हमारे जीवन की परिस्थितियां और लोग हमसे हमारी खुशियों चुराने के लिए नहीं हैं। वे सब अपना-अपना किरदार बखूबी निभा रहे हैं। वे समय-समय पर हमें चुनौतियाँ दे सकते हैं पर अंततः ये हमारे अपने विचार ही हैं जो हमें खुश रहने नहीं देते हैं।

खुश रहना सिर्फ एक मूड या इमोशन नहीं है, बल्कि ये हमें ऐसी शक्ति देता है जिससे हम जीवन में आने वाली किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं।

ये हमारे मन, बुद्धि और शरीर को शांति, विवेक द्वारा पॉजिटिव तरीके से कार्य कराने का माध्यम है। इसलिए, समस्याएं हमारी सफरिंग का कारण नहीं हैं, बल्कि इनसे प्राप्त अनुभवों से हम सीखते और आगे बढ़ते हैं।

खुश रहने वाले लोग ही दूसरों को भी खुश रख सकते हैं। लेकिन अधिकतर ये देखा जाता है कि, हम अपने लक्ष्यों पर इतना अधिक केंद्रित हो जाते हैं कि हम उन्हें हासिल करने के प्रॉसेस को इंजॉय ही नहीं करते हैं। ऐसे में भले ही, हम कोई गलत कर्म न भी करें, लेकिन हमारी खुशियां कम होना शुरू हो जाती हैं क्यूँकि हम अपने संतुष्टता और हल्केपन के मूल गुणों से दूर हो जाते हैं। इससे हमारे कार्य पर, स्वास्थ्य और संबंधों पर भी प्रभाव पड़ता है। इसके लिए, अपनी प्रायोरिटी लिस्ट में खुशी को सबसे ऊपर रखें और स्वयं से इसे निभाने का वादा करें।

क्योंकि, जब हम खुश रहते हैं तो हमारे आस-पास के सब लोग खुश रहते हैं और ये संसार को एक गिफ्ट देने के समान है जिससे ये संसार सुंदर बनता है।

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