विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत और व्यावसायिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए, कई माता-पिता यह महसूस करते हैं कि वे अपने बच्चों को पर्याप्त गुणवत्ता वाला समय नहीं दे पा रहे हैं। यह अपराधबोध व ग्लानि उनके विचारों और कंपन के रूप में निरंतर उनके बच्चों तक पहुँचता रहता है। तो, क्या आप ऐसे माता-पिता हैं जो बच्चों के साथ अधिक समय न बिता पाने पर अपराधबोध या चिंता महसूस करते हैं? आइए इसके बारे में समझें:
आपके बच्चों के साथ आपके संबंध इस पर अधिक निर्भर करते हैं कि आप उनके लिए क्या सोचते हैं, क्या महसूस करते हैं और आपके दृष्टिकोण कैसे हैं — न कि इस बात पर कि आप उनके साथ कितना समय बिताते हैं। यदि आप बार-बार सोचते हैं – मैं उनके साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पा रहा हूँ, तो यह भावना उनके अवचेतन मन में पहुंचती है और धीरे-धीरे उनका मन यह मानने लगता है – मेरे माता-पिता के पास मेरे लिए समय नहीं है। इससे आपके रिश्ते में भावनात्मक दूरी और बीच में दीवार खड़ी हो जाती है। बच्चों में व्यवहारिक समस्याएँ पैदा हो सकती हैं और उनके व्यक्तित्व पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे उनका व्यक्तिगत विकास और पढ़ाई-लिखाई दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
आप पूरे 24 घंटे बच्चों के साथ रह सकते हैं, लेकिन यदि आपके विचारों में तनाव, चिंता या मानसिक उलझन हो, तो आप उन्हें सशक्त नहीं कर पाएंगे। वहीं यदि आप किसी दूसरे देश में रहते हुए शक्तिशाली विचार क्रिएट करें – मैं अपने बच्चों के साथ हूँ, वे सुरक्षित और खुश हैं, तो यह प्रेम से भरे विचार उनके मन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। वे एक स्थिरता और अपनापन महसूस करते हैं, भले ही आप शारीरिक रूप से उनके पास न भी हों।
जीवन में कई प्रकार की चुनौतियाँ जैसे कि कार्यस्थल पर समस्याएँ, रिश्तों में उलझनें, स्वास्थ्य या आर्थिक समस्याएँ आदि हो सकती हैं। इनका समाधान करते समय शांत और मजबूत बने रहें। आपकी आंतरिक शक्ति आपके बच्चों तक पहुँचेगी और उन्हें भी भावनात्मक रूप से मजबूत बनाएगी। आप जैसे मानसिक और भावनात्मक रूप में रहेंगे, आपके बच्चे भी वैसे ही बनेंगे।
अपने जीवन में प्रतिदिन आध्यात्मिकता को शामिल करें ताकि आप भीतर से सशक्त बनें। तब भले ही आप दिन में केवल एक घंटा बच्चों के साथ बिताएं, लेकिन उस समय आपकी ऊर्जा शांति और प्रेम से भरपूर होगी। इससे बच्चे संपूर्णता से विकसित होंगे और जीवनभर आपसे प्रेम और सम्मान करेंगे। उनके मन में कोई कमी या असंतोष नहीं रहेगा।
