हम सभी के लिए, स्वयं के प्रति सजग रहना और अपनी शक्तियों तथा कमजोरियों को निकट से जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह जागरूकता हमें यह समझने में मदद करती है कि हम इस दुनिया से कैसे जुड़े हैं, हम विशेष प्रकार से क्यों व्यवहार करते हैं और हमारे व्यक्तित्व के किन पहलुओं में परिवर्तन की आवश्यकता है। फिर भी, अक्सर हम अपनी स्वयं की शक्तियों और कमजोरियों को पहचानने में संघर्ष करते हैं, जबकि दूसरों — चाहे वे हमारे प्रिय हों या सामान्य परिचित यहाँ तक कि जिन्हें हम नापसंद करते हैं; के गुणों और अवगुणों को बहुत जल्दी उजागर कर लेते हैं। आइए इसके बारे में समझें;
हम सभी एक ऐसी दुनिया का हिस्सा हैं जो दूसरों को आंकने और विश्लेषित करने में तेज है, परंतु कितनी बार हम स्वयं की शक्तियों और कमजोरियों का ईमानदारी से अवलोकन करते हैं? क्या आप जानते हैं कि आपके प्रमुख गुण क्या हैं? क्या आपने कभी यह विचार किया है कि स्वयं को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है?
हम स्वयं को देखने और समझने में पर्याप्त समय नहीं देते। अपनी पाँच प्रमुख शक्तियों और कमजोरियों की सूची बनाना हमारे लिए कठिन हो सकता है, लेकिन दूसरों के बारे में यह करना हमें सहज लगता है। यह समझना आवश्यक है कि दूसरों को बदलने की इच्छा रखना व्यर्थ है, क्योंकि वे हमारे नियंत्रण में नहीं हैं। केवल एक ही व्यक्ति जिसे हम बदल सकते हैं — वह है हम स्वयं।
प्रत्येक दिन स्वयं के साथ पाँच मिनट बिताएँ। उन विचारों और व्यवहारों पर ध्यान दें जो आपको सहजता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं — वे आपकी ताकतें हैं, उन्हें पोषित करें। वहीं जिन विचारों या व्यवहारों से आप असहज अनुभव करते हैं, वे आपकी कमजोरियाँ हैं। इन कमजोरियों को पहचान कर उन पर कार्य करें, ताकि आप स्वयं को सशक्त बना सकें।
स्वयं के साथ एक सुंदर रिश्ता बनाना और अपनी ताकत व कमजोरियों को जानना आपको लगातार सुधार करने में मदद करता है। स्वयं को रोज याद दिलाएं – मैं स्वयं को जानता हूँ। मैं अपने सुंदर गुणों का हर परिस्थिति में उपयोग करता हूँ। साथ ही, मैं अपनी कमजोरियों को भी जानता हूँ और उन्हें बदलने के लिए तैयार हूँ।
