आजकल प्रायः हम सभी मुश्किल समय से गुजर रहे हैं और हमें अपने जीवन में बार-बार कई तरह की नकारात्मक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। आमतौर पर, हम सभी सकारात्मकता का एक कवच व शील्ड अपने साथ रखते हैं, जिसका उपयोग नकारात्मक परिस्थितियों में स्वयं को बचाने के लिए करते हैं। लेकिन, कभी-कभी हमारा ये कवच इतना मजबूत नहीं होता और जीवन के कुछ युद्ध हम हार जाते हैं और, परिणामस्वरूप हम भावनात्मक रूप से लो फील करते हैं। तो आइए, इस संदेश में जानें कि, हम अपनी सकारात्मकता की शील्ड को कैसे मजबूत बना सकते हैं –
पूरे दिन अपनी एवेअरनेस में, आध्यात्मिक ज्ञान का एक सकारात्मक पाईंट हमेशा याद रखें। क्योंकि खाली दिमाग हमारी सकारात्मकता की शील्ड को कमजोर कर देता है।
हर कदम पर परमात्मा को साथ रखें; वे शांति, आनंद, प्रेम, सुख, पवित्रता, शक्ति और सत्यता के सागर हैं। ये आत्मिक गुण आपकी सकारात्मकता की शील्ड को मजबूत बनाएंगे।
जीवन में कठिन परिस्थितियाँ आने पर अपनी सोच-विचार पर पूर्ण विराम लगा दें, वरना बहुत से नकारात्मक और व्यर्थ विचार उत्पन्न होते हैं और स्थिति को और भी बड़ा बना देते हैं।
स्वयं को याद दिलाएं कि, चिंता करना एक नकारात्मक ऊर्जा है। चिंता करने से, नकारात्मक परिस्थितियां हमारा फायदा उठाकर हमें और भी डिस्टर्ब कर देंगीं।
नकारात्मक परिस्थितियां आने पर स्वयं को व्यस्त रखें, ऐसा करने से आपकी आत्मशक्ति नष्ट नहीं होगी और आप मजबूत बने रहेंगे।
अपने अंदर ‘सामना करने की शक्ति’ को विकसित करें। याद रखें, लड़ाई तभी जीती जा सकती है जब आप हार नहीं मानते हैं। ऐसा करने से आप उन मुश्किलों का समाधान ढूंढकर स्वयं को सेफ रख पाएंगे।
‘दातापन का भाव’ एक सकारात्मक और शुद्ध गुण है। अपने दिव्य गुणों और शक्तियों को दूसरों के साथ शेअर करके, हम अपने जीवन की मुश्किल परिस्थितियों को सकारात्मक तरीके से हल कर पाते हैं और साथ ही वे हमें नकारात्मक परिस्थितियों से दूर भी रखते हैं।
‘अंतर्मुखता के गुण’ का अभ्यास करें। जैसे कछुआ जरुरत न होने पर अपने शेल के अंदर चला जाता है, वैसे ही स्वयं को इंद्रियों से अलग कर, अपने अंदर के रिअल अस्तित्व को महसूस करें, जिससे आपकी शील्ड आपको प्रोटेक्ट करेगी।
