स्पीति वैली की सैर

लाहौल-स्पीति: जन्नत से भी खुबसूरत हैं यहां की वादियां

प्राचीन काल से ही लाहौल-स्पीति वैली (Spiti Valley) लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यहां दूर-दूर तक बर्फ से ढंके पहाड़ों के अलावा नदियां, झील व झरने हैं। जो लोगों को अलौकिक दुनिया का अहसास कराते हैं।

कहते हैं स्पीति वैली (Spiti Valley) में कभी बारिश नहीं होती। लेकिन यहां स्नेह, ज्ञान, परंपरा, संस्कृति व मानवीय रिश्तों की हमेशा बारिश होती रहती है। प्रक्रति से प्रेम करने वाले लोगों के लिए यह सबसे पसंदीदा जगह है। यहां दूर-दूर तक बर्फ से ढंके पहाड़ों के अलावा नदियां, झील व झरने हैं। जो लोगों को अलौकिक दुनिया का अहसास कराते हैं। भौगोलिक रूप से लाहौल, जो चट्टानों और पहाड़ों के बीच बसा है। वहीं, स्पीति ठंडा रेगिस्तान है, जहां बारिश नहीं के बराबर होती है।

यहां प्रक्रति के साथ-साथ धार्मिक परंपराओं का भी अनूठा संगम दिखता है। पहाड़ों पर बने बौद्ध मठ जहां एक ओर यहां पहुंचने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। वहीं, पारंपरिक परिधानों में स्थानीय लोग यहां पहुंचने वाले पयर्टकों का मन मोह लेते हैं। पहाड़ों के ऊपर बने बौद्ध मठों में गूंजते मंत्र लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है। वहीं, प्राकृतिक सुंदरता लोगों को नज़रें नहीं हटाने देती।

मनाली की ओर से जाते हुए रोहतांग पास को पार करते ही लाहौल-स्पीति जिला शुरू हो जाता है। रोहतांग से 7 किलोमीटर नीचे उतरकर कई घुमावदार मोड़ों को पार करने के बाद ‘ग्रामफू’ आता है। यहां से स्पीति वैली के लिए दायीं ओर से और लाहौल वैली के लिए बायीं ओर रास्ता जाता है। यहां से जब हम आगे बढ़ते हैं, तो चंद्रा नदी हमें रास्ता दिखाती है। वहीं, तांडी नामक जगह पर केलांग से आती ‘भागा’ नदी इसमें मिल जाती है और दोनों के मिलने के बाद इसका नाम ‘चंद्रभागा’ हो जाता है।

समुद्र तल से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे ताबो गांव को दुनिया का सबसे पुराना और ऊंचाई पर बसा हुआ गांव का दर्जा मिला है। गांव की खुबसूरती को देखते हुए इसे हिमालय का अजंता भी कहते हैं। ताबो गांव स्पीति वैली के मुख्यालय काजा से 46 किलोमीटर दूर है। इस गांव को बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र भी मानते हैं। इस गांव की स्थापना 948 में लामा रिन-छेन-जंग-पो ने की थी। वहीं, यहां स्थित गोम्पा में काफी पुराने भित्तिचित्र हैं। इनमें परियों, देवताओं, बौद्ध गुरुओं व राक्षसों की तस्वीरें हैं।

मनमोहक नीली झील (Manmohak neeli jheel)

लाहौल-स्पीति वैली में कई झील हैं, जिसमें प्रमुख हैं सूरजताल, चंद्रताल, मणि यंग छोह और ढंकर छोह। ये झीलें बर्फीले पहाड़ों से घिरे हैं। इन झीलों को देखने पर अलौकिक सुख का अहसास होता है। लेकिन यहां पहुंचना बहुत मुश्किल है। चंद्रताल लेक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां के पानी को दिन में कई बार रंग बदलते हुए देखा जा सकता है। यहां के गांव, झील, बर्फीले दर्रे, बौद्ध मठ देखने लायक हैं। स्पीति वैली में पिन नदी के दोनों ओर पिन घाटी है, जो अपने शानदार घोड़ों के लिए प्रसिद्ध है।

प्राचीन बौद्ध मठ हैं यहां की खासियत (Prachin Baudh math hai yahan ki khasiyat)

लाहौल-स्पीति की बड़ी खासियत यहां के बौद्ध मठ हैं। इसमें सबसे प्रमुख हैं ताबो, काजा व की गोंपा मठ। ताबो मठ गेलूकंपा संप्रदाय से संबंधित है। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 3050 मीटर है। इस मठ को तिब्बत के शासक ए-शस्ओद ने 10वीं शताब्दी में बनवाया था। इसके निर्माण में 46 वर्ष लगे थे। मठ के चारों ओर ऊंची दीवार है। यहां के 9 मुख्य कक्ष में बुद्ध की विशाल प्रतिमाएं हैं। वहीं, समुद्र तल से 3660 मीटर की ऊचांई पर बसा काजा बौद्ध मठ लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां की त्रिमूर्ति मंदिर भी काफी बेजोड़ है। वहीं, की गोंपा मठ गेलुग्पा संप्रदाय से संबंधित है, जो पूरे विश्व में काफी प्रसिद्ध है।

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