हार्ड वर्क, कठोर परिश्रम

मेहनत का फल मीठा होता है

उसके अधिकांश दोस्तों का चयन हो गया था। लेकिन उसका नहीं हुआ था। उसके अपने उन दोस्तों और शिक्षकों का सामना करने के विचार से ही बहुत घबराहट हो रही थी, जो उस पर विश्वास करते थे।

श्रेया ने नर्वस होते हुए अपना इनबॉक्स खोला। उसने उस ईमेल को देखा जिसका उसे लंबे समय से इंतज़ार था- वह ईमेल जो उसके सपनों के कॉलेज से आया था, उस कॉलेज से जहां वह हमेशा से पढ़ना चाहती थी।

“…खेद के साथ, हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि आपके आवेदन को स्वीकार नहीं किया गया है…।”

यह जानकार वह बुरी तरह टूट गई थी।

ऐसा कैसे हो सकता था? मैंने यहां पर अपना सर्वश्रेष्ठ दिया था। उसके दिमाग में अनगिनत विचार दौड़ने लगे थे।

उसके फोन पर उसके दोस्तों, खासकर दोस्तों के आपसी ग्रुप चैट पर संदेशों की बाढ़ आ गई थी, “अरे, मेरा चयन हो गया! तुम्हारा क्या हुआ?” या फिर “मेरा तो चुनाव हो गया! मुझे यकीन है कि तुम्हारा भी हो गया होगा। फिर से एक ही कक्षा में होने पर बहुत मज़ा आएगा।”

उसके अधिकांश दोस्तों का चयन हो गया था। लेकिन उसका नहीं हुआ था। उसके अपने उन दोस्तों और शिक्षकों का सामना करने के विचार से ही बहुत घबराहट हो रही थी, जो उस पर विश्वास करते थे।

उसके पीछे छूट जाने के डर, उसके दोस्तों का उसके बिना उससे आगे निकल जाने के डर ने उसे और भी चिंतित और परेशान कर दिया था। श्रेया ने अपने मन से ये सारी बात निकालने के लिए बाहर दौड़ पर जाने का फैसला किया।

वह तब तक दौड़ती रही जब तक उसका शरीर थक नहीं गया। वह सांस लेने के लिए पास की एक बेंच पर बैठ गई। सड़क के विपरीत दिशा में लगे एक बिलबोर्ड ने उसका ध्यान अपनी तरफ खींचा। इसमें लिखा था, “कभी-कभी जीवन आपको वह नहीं देता जो आप सोचते हैं कि आपको वह चाहिए, इसलिए नहीं कि आप इसके लायक नहीं हैं, बल्कि इसलिए कि आप इससे भी बेहतर के लायक हैं।”

श्रेया ने अपनी फैली हुई आंखों से बिलबोर्ड को फिर से देखा और वहां लिखे हुए संदेश को कई बार पढ़ा। जैसे ही उसने उन शब्दों पर विचार करना शुरू किया तभी उसका फोन फिर से बज उठा। यह एक नई ईमेल के द्वारा आया हुआ एक संदेश था जिसमें लिखा हुआ था, ‘आपकी छात्रवृत्ति के लिए आपको बधाई!’

यह ईमेल एक अलग विश्वविद्यालय से आया था, जहां उसने पहले आवेदन किया था। अपने ड्रीम कॉलेज से रिजेक्ट होने से श्रेया इस कदर परेशान हो गई थी कि एक पल के लिए वह उस एप्लीकेशन के बारे में भूल ही गई थी।

उसने अपने चेहरे पर एक विस्तृत मुस्कान के साथ फिर से उस बिलबोर्ड को देखा। उसके गाल आंसुओं से भरे हुए थे- लेकिन इस बार ये खुशी के आंसू थे। सब कुछ खो नहीं गया था, जैसा कि उसने पहले मान लिया था।

श्रेया ने फिर अपने दोस्तों के संदेशों का जवाब देने के लिए अपने फोन की ओर देखा और इस बार उसने उन्हें अपनी सफलता के बारे में बताने के लिए अपने फोन को उठाया था।

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