घर का मतलब

ये दुनिया ही है मेरा घर

एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना, नई-नई जगह को देखना ऐसा एक्सपीरियंस है जो किसी भी व्यक्ति को रोमांच का एहसास दिलाता है। नई जगहों पर जाने से ही उसे कई चीज़ों के बारे में पता चलता है। ये तमाम एक्सपीरियंस आपकी लाइफ में काफी परिवर्तन ला सकते हैं।

मेरा घर कहां है? ये सवाल भले ही छोटा दिखता हो, लेकिन किसी के अच्छा ना भी हो। खासतौर पर वैसे लोग जिन्हें अपने चाइल्डहुड में बार-बार जगह बदलना पड़ता हो। वो लोग इस दर्द से भली भांति परिचित होंगे। वहीं दूसरी ओर वैसे लोग भी हैं जो मेरा घर, मेरा शहर… जैसी बाते बोल सकते हो। क्योंकि वो एक ही शहर में पले बड़े, एक ही स्कूल में पढ़े, एक ही गली और एक ही घर में रहे… जिसे वो मेरा घर कहते हैं। मैं उन लोगों की बात कर रहा हूं जो अपने घर व शहर के हर एक नुक्कड़ को जानते हैं, हर पेड़ से लेकर दुकानदारों को जानते हैं। जो खुलकर ये कह सकते हैं कि ये मेरा घर है।

इसके बाद आते हैं मेरे जैसे लोग।

स्कूल में सभी प्रकार के बच्चों से पाला पड़ता था, उसमें कुछ पढ़ाकू होते थे, तो कुछ शरारती। वहीं कुछ गुमसुम तो कुछ बातुनी… और मैं उन सबमें नया। बचपन की बात करूं तो मैंने कई शहर बदले। इस दौरान हर कुछ सालों के बाद मेरा कई स्कूलों में मेरा एडमिशन हुआ। मुझे अच्छे से याद है जब तब मैं 19 साल का हुआ तो मैंने करीब 7 शहर बदले थे। स्कूल बदलने के बाद मेरा सबसे बुरा पल वो होता था जब मुझे पूरी क्लास के सामने अपना इंट्रोडक्शन देना होता था। लेकिन समय के साथ-साथ मैंने भी एक टैलेंट अपने अंदर विकसित कर लिया। मैंने अपने इंट्रोडक्शन का स्मार्ट तरीका इजात कर लिया, जिसके बाद तो मानो सभी क्लासमेट्स के साथ टीचर्स मेरे फैन हो गए।

हमेशा मैं यही सोचता रहता हूं कि अगर मैं एक ही स्थान पर पला-बड़ा होता, मेरा घर भी कोई एक ही होता, तो क्या मेरा जीवन या मैं कुछ अलग होता? इस बारे में विचार करने पर पता चला कि मैं दूसरों से अलग कैसे हूं। ये किसी नदी में नहीं बल्कि समंदर में गोले लगाने के समान था।

मौजूदा समय के घुमंतू

एक जगह से दूसरे जगह पर जाना किसी के लिए रोमांचक तो किसी के लिए भयावह हो सकता है। क्योंकि उसे फिर नए दोस्त बनाने पड़ते हैं, रास्तों को नए सिरे से याद करना पड़ता है, नए शहर व नई परिस्थिति के अनुसार ढलना पड़ता है। यही वजह भी है कि कई लोगों के लिए मेरा घर… मेरा शहर… छोड़कर निकलना मुश्किल होता है। क्योंकि आप अपना घर व अपना सामान ही नहीं छोड़ते हैं, बल्कि उन रिश्तों को भी छोड़ देते हैं जिन्हें आपने इतने वर्षों में बनाया था। यदि आपको अपनी प्यारी चीज़ों में से सिर्फ कुछ सामान को अलग करना बुरा नहीं भी लगता, तो भी आपको उन चीज़ों में से चुनना होता है, जो आपने महीनों या वर्षों में जमा किया होता है। आप यह निर्णय ही नहीं ले पाते कि किन सामान को ले जाना है और किसे नहीं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर सामान के साथ आपकी कुछ ना कुछ यादें जुड़ी होती है। सामान को पैक करना और दूसरे शहर में जाना … यह सोचकर ही मन थक जाता है। जब आप इस पूरी प्रक्रिया को अपना लेते हैं तो खुद को नए शहर में एक और घर में पाते हैं, जिसे आप मेरा घर कह सकें। आप इस घर में भले ही कुछ सामान के साथ पहुंचते हैं लेकिन धीरे-धीरे कर उन्हें संजोने में लग जाते हैं। आप अपने घर… को मेरा घर बनाने के सफर तो तय करने के लिए उसे भी सजाने व संवारने लगते हैं।

जब भी किसी को एक से दूसरी जगह लंबे समय के लिए जाना होता है, तो मन में ना जाने ही कितने ख्याल आते हैं। उन्हें माप पाना मुश्किल है। शुरुआती समय में यह मुश्किल भरा हो सकता है। लेकिन धीरे-धीरे आपको भी उसकी आदत पड़ जाती है। विक्रम सिंह के पिता सेना में सुबेदार मेजर थे। जिसे छोटी उम्र में बार-बार अपने घर को छोड़ना पड़ता था। जब वो छोटा था, तो ट्रेन पर चढ़ने के सफर को लेकर रोमांचित हो उठता था। लेकिन जैसे-जैसे बड़ा हुआ, तो पिता के ट्रांसफर की बात सुनकर मायूस हो जाता था। विक्रम पोस्टिंग के बाद अच्छे सफर को याद कर कहता है कि नए स्कूल, नई जगह पर जाने का डर तो था ही, लेकिन साथ ही उत्साह भी रहता था। मुझे पैकिंग का अच्छा अभ्यास हो गया। अब भी मैं बहुत तेज़ी से पैकिंग कर सकता हूं। मुझे पता है, मुझे क्या चाहिए; जब कहीं जाना हो, तो मैं हड़बड़ाता नहींI” बस सफर की ओर निकल पड़ता हूं… जिसे मैं मेरा घर बना सकूं।

दोस्ती ऐसी जो फासलों को ना कम सके   

मुझे ये अच्छे से पता था कि मेरा घर छोड़कर मुझे कुछ साल बाद दूसरे शहर में मेरा घर बसाने के लिए जाना पड़ सकता है। इसलिए मैं किसी के साथ मज़बूत रिश्ते कम ही बनाता हूं। क्योंकि वैसे रिश्ते जो कम समय में खत्म हो जाए मैं उनसे दूर ही रहना चाहता हूं। क्योंकि मैं मज़बूत रिश्तों में ही यकीन रखता हूं।

जब मैंने एक रिसर्च को पढ़ा, तो मुझे इस बात का एहसास हुआ कि जो लोग बहुत अधिक स्थान परिवर्तन करते हैं, वे अपनी वस्तुओं और समाप्त किए जा सकने वाले संबंधों, दोनों पर विचार करते हैं।

हालांकि हमेशा ही ऐसा नहीं होता। बेंगलुरु स्थित एक रीयल एस्टेट सलाहकार स्टेनले जोस आठ शहरों में पले और 10 विभिन्न स्कूलों में पढ़े। वे कहते हैं कि अपने पूरे जीवन में उन्होंने मज़बूत सामाजिक संबंध बनाए। वे कहते हैं, “मैं अब भी अपने स्कूली दोस्तों के संपर्क में हूं। ये चलाऊ रिश्ते नहीं हैं, ये 18-20 साल की मित्रता है। मैं कुछ दोस्तों से स्कूल के समय से संपर्क में हूं।”

मेरा घर कहां है?

कई शहरों में मेरा घर बसाते-बसाते और पलते-बढ़ते हुए मैंने कभी एक कमरे और एक घर में रहने के आराम का अनुभव नहीं किया। मुझे शायद ही कभी अपनेपन का एहसास हुआ। मुझे किसी विशेष स्थान पर हक या अधिकार का बोध भी नहीं था। आज, मेरे लिए मेरा घर वह है, जहां मेरे माता-पिता रहते हैं, चाहे वे किसी भी शहर, राज्य, या देश में रहते हों। बस वही मेरा घर है, क्योंकि इसमें सब कुछ – महक, जगहें, यादें और लोग व रिश्तेदार सभी परिचित हैं।

विक्रम कहता है, “मेरे लिए मेरा घर का मतलब, केरल में मेरे दादा-दादी और संयुक्त परिवार का घर है। वे जगह जहां मैं रहा हूं… वो भी मेरे लिए काफी अहम है। जहां भी मैं रहा हूं, वहां की दिलचस्प यादें मेरे साथ हैं।”

इंदौर के एक वरिष्ठ पत्रकार एसआर सिंह, जो भारत के विभिन्न शहरों में रहे हैं, बार-बार स्थान परिवर्तन के बारे में कहते हैं, “कोई याद नहीं रखता कि आपके पास सोफा कैसा था, आपकी दीवार पर कौन सी पेंटिंग थी – लोग आपको याद करते हैं। विभिन्न शहरों में पलना-बढ़ना एक समृद्ध अनुभव है। इसे किसी और चीज़ से बदला नहीं जा सकता”।

क्या ऐसे लोग यह कामना करते हैं कि काश वे एक ही स्थान पर पले-बढ़े होते? बिलकुल नहीं।

वर्तमान में ओडिशा में रहने वाले आईटी प्रोफेशनल वर्द्धमान सिंह, जो बचपन में लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान जाते रहे, कहते हैं, “हालांकि मैं कभी-कभी एक ही शहर में रहने और शहर को पूरी तरह जानने का अनुभव लेने के बारे में सोचने का गुनहगार हूं पर इस तरह की सोच हमेशा क्षणिक होती है और उस व्यापक अनुभव के सामने कुछ नहीं है, जो मुझे बहुत सारे लोगों से मिलकर और अपने ही व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों के बारे में जानकर मिला।”

इस कहानी के अंत में, मैंने महसूस किया है कि जो लोग अक्सर स्थान बदलते हैं, उन्हें कोई पछतावा नहीं है। विक्रम कहता है, “मैं कभी भी एक ही जगह पलना-बढ़ना नहीं चाहूंगा। दरअसल, मुझे एक ही अफसोस है कि हमने बहुत अधिक जगहें नहीं बदलीं। मेरे जन्म के बाद मेरे पिता की तैनाती पूर्वोत्तर में नहीं हुई। मुझे वहां रहना अच्छा लगता।”

स्थान परिवर्तन अलग ही अनुभव है। यह आपको कई अनुभवों और यादों से समृद्ध करता है। यह आपको अनेक घर, कई दोस्त, कई चाचा व चाची देता है। यह आपको आत्मनिर्भर और तटस्थता से रहना सिखाता है। आप जिसे मेरा घर कहते हैं वहां पर सारी चीज़ें आसानी से मिल जाती है। बाहर की बड़ी दुनिया, एक छोटा बुलबुला है, जहां आप रह रहे हैं।

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